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यूएस भारत को इतना बड़ा बाजार नहीं बनने देगा कि... ट्रंप के मंत्री ने दिल्ली आकर इरादे जाहिर कर दिए

Christopher Landau Statement in India: अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने दिल्ली में रायसीना डायलॉग्स 2026 में भारत और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापारिक समझौतों पर अपने इरादे जाहिर किए. ये भी कहा कि अमेरिका की विदेश नीति का मकसद अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाना है और वो कोई धर्मार्थ संस्था नहीं है. बोले कि अब यूएस, चीन वाली गलती भारत के साथ नहीं करेगा.

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us deputy foreign secretary Christopher Landau said wont let india to be another china and surpass usa in economy
अमेरिका के उप-विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ (PHOTO-X)
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विकास वर्मा
6 मार्च 2026 (अपडेटेड: 6 मार्च 2026, 03:42 PM IST)
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‘भारत को यह समझना चाहिए कि हम भारत के साथ वही गलतियां नहीं करने जा रहे हैं, जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थीं. हम आपको ये सभी मार्केट डेवलप करने देंगे, और फिर अगली बात जो हमें पता चलेगी, वह यह कि आप बहुत सी कमर्शियल चीजों में हमसे आगे निकल जाएंगे.’ ये बयान है अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ (Christopher Landau) का. क्रिस्टोफर 5 मार्च के दिन नई दिल्ली में चल रहे रायसीना डायलॉग्स 2026 को संबोधित कर रहे थे. इस सम्मेलन में उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापारिक समझौतों पर अमेरिका के इरादे जाहिर किए.

इस दौरान क्रिस्टोफर लैंडौ ने कहा,

‘हम अब ट्रेड डील के बहुत करीब पहुंच चुके हैं. ये डील दोनों देशों के बीच असीमित संभावनाओं को खोल सकती है. हम भारत पर फोकस करके आर्थिक और कॉमर्शियल मौकों को लेकर बहुत उत्साहित हैं. लेकिन भारत को ये समझना चाहिए कि हम भारत के साथ वो गलतियां नहीं दोहराएंगे जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थीं.’

Christopher Landau किस गलती की बात कर रहे?

क्रिस्टोफर लैंडौ के कहने का मतलब है कि 20 साल पहले अमेरिका ने चीन को बाजार और उसका फायदा देकर उसे इतना ताकतवर बना दिया कि कॉर्मिशियल सेक्टर में वो अमेरिका को ही हराने लगा. यानी अमेरिका भारत को इतना बड़ा बाजार नहीं बनने देना चाहता कि वो आगे चलकर उसे टक्कर दे.

उन्होंने आगे कहा, 

‘हम ये सुनिश्चित करेंगे कि हम जो भी करें, वो हमारी जनता के लिए उचित हो, क्योंकि आखिर में अपनी जनता के प्रति जवाबदेह होना है. ठीक उसी तरह जैसे भारत सरकार को अपनी जनता के प्रति जवाबदेह होना पड़ता है.’

हालांकि, अमेरिका के उप विदेश मंत्री ने ये जरूर कहा है कि टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के बीच 'विन-विन' साझेदारी बन सकती है. उन्होंने कहा कि भारत के साथ साझेदारी उनके हित में है. भारत के पास विशाल आर्थिक क्षमता और मानव संसाधन हैं, जो इस सदी के भविष्य को तय कर सकते हैं. आने वाले सालों में भारत-अमेरिका सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं. दोनों देश शीत युद्ध के उस मॉडल से आगे बढ़ सकते हैं, जब भारत अमेरिका से दूरी बनाकर रखता था. अपने संबोधन में उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप का जिक्र करते हुए कहा, 

'जिस तरह राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अमेरिका को फिर से महान बनाना चाहते हैं, उसी तरह वे भारत के प्रधानमंत्री या अन्य नेताओं से भी यही उम्मीद करेंगे कि वो भी अपने देशों को फिर से महान बनाना चाहेंगे. 

अमेरिका की ओर ये टिप्पणियां तब आई है जब ईरान के साथ चल रहे संघर्ष की वजह से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव पड़ रहा है. हालांकि अमेरिका ने भारत को रियायत देते हुए रूस से तेल खरीदने पर लगी रोक हटा दी है. अमेरिका का तर्क है कि इससे तेल के बढ़ते दामों को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक 30 दिन के लिए दी गई ये छूट उन ऑयल टैंकर्स पर लागू होगी जिनमें पहले से ही भारत आने वाला तेल लदा हुआ है. यानी खास तौर पर उन रूसी तेल टैंकरों को ये छूट मिलेगी, जो US की नई पाबंदियों के लागू होने से पहले लोड हो चुके थे, लेकिन पाबंदियां लागू होने के कारण वो भारत नहीं आ सके थे.

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक रायसीना डायलॉग में अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ से भारत के तेल खरीद के मुद्दे पर भी सवाल पूछे गए. इस पर उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि आप वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता.’ क्रिस्टोफर लैंडौ ने आगे ये भी बताया कि अमेरिका की विदेश नीति का मकसद उनके राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाना है और वो कोई धर्मार्थ संस्था नहीं है. 

वीडियो: ईरान-अमेरिका की जंग में ऑयल टैंकर पर हमला, 2 भारतीयों की मौत

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