उन्नाव रेप केस: कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से झटका, दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश पलटा
Unnao Rape Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर के आजीवन कारावास की सजा को सस्पेंड कर दिया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने बताया क्यों हाईकोर्ट का फैसला सही नहीं था.

उन्नाव रेप केस में दोषी पाए गए बीजेपी के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर के आजीवन कारावास की सजा को सस्पेंड कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. शुक्रवार, 15 मई को इस अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है.
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जज जॉयमाल्या बागची की बेंच कर रही थी. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली कोर्ट मामले पर दोबारा सुनवाई करे और दो महीनों के अंदर उसमें बदलाव करे. कोर्ट ने कहा,
“हम अपील मंजूर करते हैं और हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हैं. हाईकोर्ट कोशिश करे कि मुख्य अपील पर दो महीने के अंदर फैसला हो जाए. अगर अपील की सुनवाई जल्दी होना संभव नहीं है, तो सजा पर रोक लगाने की मांग पर नया फैसला लिया जाए. हम मामले पर अपनी तरफ से कोई टिप्पणी नहीं कर रहे.”
सुनवाई में POCSO एक्ट का भी जिक्र किया गया. उन्नाव रेप केस में जब अपराध हुआ, तब पीड़िता नाबालिग थी. POCSO एक्ट के तहत अगर कोई सरकारी कर्मचारी बच्चे के साथ यौन शोषण करता है, तो उसे सामान्य नहीं बल्कि गंभीर यौन शोषण माना जाता है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा था?दिल्ली हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा को सस्पेंड करने वाले आदेश में कहा था कि कुलदीप सिंह सेंगर को साफ तौर पर सरकारी कर्मचारी नहीं माना जा सकता है. इसी बात को आधार बनाकर सेंगर की सजा पर रोक लगाई गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली कोर्ट की इस बात से असहमति जताई है. जस्टिस जॉयमाल्या ने कहा,
“हम हाईकोर्ट की तकनीकी सोच से सहमत नहीं हैं. ये कानून बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाया गया है.”
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उन्नाव रेप केस में अब तक क्या-क्या हुआ?यह मामला 2017 का है, जब उन्नाव में एक नाबालिग लड़की से रेप का आरोप तत्कालीन BJP विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर लगा था.
- मामले में न्याय न मिलने का आरोप लगाकर पीड़िता ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर जान देने की कोशिश की थी.
- इसके बाद पीड़िता के पिता की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई. सेंगर पर पुलिस की मिलीभगत से ये हत्या कराने का भी आरोप लगा.
- साल 2019 में पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन CJI रंजन गोगोई को एक चिट्ठी लिखी. केस से जुड़े मामलों को दिल्ली ट्रांसफर करने की अपील की.
- अपील पर सुनवाई हुई. मामले को उत्तर प्रदेश से दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया.
- तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर को रेप का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
- दिसंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सजा को निलंबित कर दिया.
- दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ CBI ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई.
- मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी.
अब दिल्ली कोर्ट के पास दो महीने का समय है. कोर्ट इस मामले पर दोबारा विचार करेगा और नया फैसला सुनाएगा.
वीडियो: उन्नाव रेप पीड़िता ने इंटरव्यू में अपना दर्द, संघर्ष और डर साझा किया, कुलदीप सेंगर पर क्या कहा?

