कुलदीप सेंगर की सजा सस्पेंड नहीं होगी, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
Delhi High Court में Kuldeep Singh Sengar ने अपनी अपील में 2020 के ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील पेंडिंग रहने तक सजा को निलंबित करने की मांग की थी. ये मामला Unnao Rape Victim के पिता की हिरासत में हुई मौत से जुड़ा है.

उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराए गए पूर्व BJP विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है. सेंगर ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में अपनी 10 साल की सजा को निलंबित करने की मांग की थी. सोमवार, 19 जनवरी 2026 को हाई कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी. 2020 में ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को इस मामले में दोषी ठहराया था और 10 साल जेल की सजा सुनाई थी.
हाल के दिनों में न्यायिक प्रक्रिया के तहत कुलदीप सेंगर के लिए यह दूसरा झटका है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसमें 2017 के रेप केस में पूर्व विधायक को मिली उम्रकैद की सजा निलंबित कर दी गई थी.
इंडिया टुडे से जुड़ीं नलिनी शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस रविंद्र डुडेजा ने कहा कि सेंगर की सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर सही समय पर सुनवाई होगी. सेंगर ने ट्रॉयल कोर्ट के 2020 के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दाखिल की हुई है. इस अपील के पेंडिंग रहने तक सेंगर ने हाई कोर्ट में सजा पर रोक लगाने की मांग की थी.
सजा सस्पेंड करने के लिए सेंगर की तरफ से लंबे समय तक जेल में रहने और बिगड़ती सेहत, जिसमें डायबिटीज, मोतियाबिंद और रेटिनल डिटैचमेंट शामिल हैं, को आधार बताया. अपनी याचिका में उन्होंने तिहाड़ जेल के बाहर AIIMS में मेडिकल इलाज की मांग की.
हालांकि, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और पीड़ित पक्ष ने सेंगर की याचिका का विरोध किया. कोर्ट के सामने अपराधों की गंभीरता पर जोर दिया गया, जिनमें अपहरण और हमला शामिल था, जिससे हिरासत में मौत हुई थी. CBI ने आगे तर्क दिया कि सेंगर ने पीड़िता के परिवार को चुप कराने की कोशिश में भूमिका निभाई थी. 2024 में भी सेंगर ने इसी तरह की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था.
13 मार्च 2020 को एक ट्रायल कोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में सेंगर को 10 साल की कड़ी कैद की सजा सुनाई थी और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था. कोर्ट ने जोर देकर कहा था कि परिवार के 'इकलौते कमाने वाले' की हत्या के लिए 'कोई नरमी' नहीं दिखाई जा सकती.
सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर को भी पांच अन्य लोगों के साथ कस्टडी में हुई मौत में शामिल होने के लिए 10 साल जेल की सजा सुनाई गई थी. पीड़िता के पिता को सेंगर के कहने पर आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था. 9 अप्रैल 2018 को पुलिस की बर्बरता के कारण हिरासत में उनकी मौत हो गई थी.
वीडियो: गंदा पानी पीने से बीमार लोगों से मिले राहुल गांधी, सरकार को क्या याद दिला दिया?

.webp?width=60)


