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BJP के केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार का बेटा गिरफ्तार, नाबालिग लड़की से यौन उत्पीड़न का आरोप

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री Bandi Sanjay Kumar के बेटे Bandi Sai Bhageerath पर एक 17 साल की नाबालिग लड़की के साथ यौन शोषण करने का आरोप है. पीड़िता की मां की शिकायत पर पुलिस ने POCSO Act के तहत मामला दर्ज किया था.

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17 मई 2026 (पब्लिश्ड: 01:19 PM IST)
Union Minister Bandi  Sanjay Kumar son surrendered
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार अपने बेटे बंदी साई भगीरथ के साथ (बाएं). (फोटो: इंडिया टुडे)
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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी साई भगीरथ को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. तेलंगाना में एक 17 साल की नाबालिग लड़की के साथ यौन शोषण करने के आरोप में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था.

पीड़िता की मां की शिकायत पर भगीरथ के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद भगीरथ कथित तौर पर फरार हो गए. पुलिस ने उन्हें देश छोड़कर भागने से रोकने के लिए उनके खिलाफ 'लुक-आउट सर्कुलर' जारी किया था. आखिरकार, 16 मई को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

इससे पहले तेलंगाना के बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने दावा किया था कि उनके बेटे साई भगीरथ ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है. ‘X’ पर एक बयान में उन्होंने लिखा,

“कानून और न्यायपालिका के प्रति पूरे सम्मान के साथ, आज मेरा बेटा बंदी भगीरथ जांच के लिए हमारे वकीलों के माध्यम से तेलंगाना पुलिस के सामने पेश हुआ.”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कानून की नजर में हर कोई बराबर है, चाहे वह उनका बेटा हो या कोई आम नागरिक. उन्होंने बताया कि उनके बेटे ने बार-बार यही कहा है कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया है. बंदी संजय कुमार ने बताया कि शुरू में उनका इरादा शिकायत दर्ज होते ही अपने बेटे को तुरंत पुलिस के हवाले करने का था. हालांकि, वकीलों ने कथित तौर पर कहा कि यह मामला खारिज हो जाएगा और जमानत निश्चित रूप से मिल जाएगी. इसी वजह से इसमें देरी हुई.

एक दूसरे पोस्ट में बीजेपी नेता ने कहा,

“भगीरथ को गिरफ्तार नहीं किया गया... वह खुद पुलिस पूछताछ के लिए पेश हुए. भगीरथ दो वकीलों की मौजूदगी में पेट बशीरबाद पुलिस स्टेशन गए.”

पुलिस ने क्या बताया?

केंद्रीय मंत्री के दावे के बीच साइबराबाद पुलिस ने साफ किया है कि यह सरेंडर यानी आत्मसमर्पण नहीं था, बल्कि उन्हें हैदराबाद के बाहरी इलाके से पकड़ा गया और फिर पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने भगीरथ के फरार होने के बाद उनके खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर जारी किया था और उन्हें ढूंढने के लिए 5 विशेष टीमों का गठन किया था.

Bandi  Sanjay Kumar
(फोटो :X)
क्या है मामला?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने 8 मई को 17 साल की एक लड़की की मां की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और लैंगिक अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटी के साथ भगीरथ का प्रेम-संबंध था और उन्होंने उसका यौन उत्पीड़न किया.

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि यह रिश्ता जून 2025 के आस-पास शुरू हुआ और इंस्टाग्राम और स्नैपचैट पर जारी रहा. पीड़िता की मां ने आरोप लगाया कि भगीरथ ने नाबालिग लड़की से 18 साल की होने के बाद शादी करने का वादा किया और उसका भरोसा जीता. पीड़िता का बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने इस मामले में पॉक्सो एक्ट की और भी कड़ी धाराएं जोड़ दीं.

भगीरथ ने क्या कहा?

भगीरथ ने भी एक जवाबी शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने आरोप लगाया कि लड़की और उसके माता-पिता ने लड़की से शादी करने का दबाव डाला. जब उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, तो लड़की के माता-पिता ने कथित तौर पर उनसे पैसों की मांग की और धमकी दी कि अगर उन्होंने पैसे नहीं दिए, तो वे उनके खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज करवा देंगे.

भगीरथ ने दावा किया कि डर के मारे उन्होंने लड़की के पिता को 50,000 रुपये दिए थे, लेकिन बाद में परिवार ने उनसे 5 करोड़ रुपये की मांग की. यह भी आरोप लगाया कि परिवार ने उन्हें धमकी दी कि अगर उसने उनकी मांगें पूरी नहीं कीं, तो लड़की की मां आत्महत्या कर लेगी. पुलिस ने उनकी शिकायत के आधार पर भी एक FIR दर्ज कर ली है.

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तेलंगाना हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने 15 मई को बंदी साई भगीरथ की अंतरिम अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. साथ ही गिरफ्तारी से सुरक्षा देने से पूरी तरह इनकार कर दिया. कोर्ट ने साफ किया कि पीड़िता का बयान देखने के बाद वह इस चरण पर कोई भी अंतरिम राहत देने के पक्ष में नहीं है. अगले दिन साइबराबाद पुलिस ने भागीरथ को गिरफ्तार कर लिया. बाद में उन्हें एक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. मजिस्ट्रेट ने भगीरथ को 14 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया. अदालत के आदेश के बाद उन्हें चेरलापल्ली जेल ले जाया गया.

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