The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Thulasithara Sacred For Hindus Kerala High Court Directs Police To Take Action Against Man Who Put Pubic Hair In Tulsi

'गुप्तांग के बाल' तुलसी में डाले, कोर्ट बोला- "हिंदुओं की भावनाएं आहत होंगी, कार्रवाई क्यों नहीं"

आरोपी ने अपने गुप्तांगों से बाल निकालकर तुलसीथारा में डाल दिए थे. कोर्ट ने कहा कि तुलसीथारा हिंदू धर्म के लिए एक पवित्र स्थान है और आरोपी ने जो किया उससे हिंदुओं की भावनाएं आहत होंगी.

Advertisement
Thulasithara Sacred For Hindus Kerala High Court Directs Police To Take Action Against Man Who Put Pubic Hair In Tulsi
याचिकाकर्ता ने बेंच के सामने दलील दी कि उन्होंने केवल एक वीडियो शेयर किया था जो पहले से ही सोशल मीडिया पर मौजूद था. (फोटो- X)
pic
प्रशांत सिंह
21 मार्च 2025 (अपडेटेड: 21 मार्च 2025, 11:10 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

केरल हाई कोर्ट ने राज्य की पुलिस को निर्देश दिया है कि वो तुलसी के पौधे (तुलसीथारा) का अपमान करने वाले एक आरोपी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करे. अब्दुल हकीम नाम के शख्स पर आरोप है कि उन्होंने अपने ‘गुप्तांगों से बाल निकालकर तुलसीथारा में डाल दिए’ थे. कोर्ट ने कहा कि तुलसीथारा का हिंदू धर्म के लिए एक पवित्र स्थान है और आरोपी ने जो किया उससे हिंदुओं की भावनाएं आहत होंगी.

जस्टिस पीवी कुन्हिकृष्णन की बेंच ने अलप्पुझा की रहने वाली 32 वर्षीय श्रीराज आरए की याचिका पर विचार करते हुए पुलिस को ये निर्देश जारी किया. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक श्रीराज को एक वीडियो अपलोड करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें कथित तौर पर अब्दुल हकीम तुलसीथारा का अपमान कर रहे थे. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल किया कि आरोपी अब्दुल हकीम के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई और उसके खिलाफ कोई मामला क्यों दर्ज नहीं किया गया. बेंच ने कहा,

Embed

रिपोर्ट के मुताबिक घटना को लेकर अब्दुल हकीम के पक्ष की तरफ से श्रीराज के खिलाफ ही मामला दर्ज किया गया था. इसमें कहा गया कि अब्दुल हकीम मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति हैं और याचिकाकर्ता ने ‘धार्मिक दुश्मनी को बढ़ावा’ देने के लिए वीडियो अपलोड किया है. BNS की धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से बेवजह उकसावा देना) के तहत ये केस दर्ज किया गया था. जिसे बाद में BNS की धारा 196 (1) (ए) (धर्म के विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120 (ओ) (सार्वजनिक उपद्रव और सार्वजनिक व्यवस्था के उल्लंघन के लिए दंड) में बदल दिया गया.

बाद में याचिकाकर्ता ने जमानत याचिका दायर की. श्रीराज ने बेंच के सामने दलील दी कि उन्होंने केवल एक वीडियो शेयर किया था जो पहले से ही सोशल मीडिया पर मौजूद था. उन्होंने ये भी तर्क दिया कि इस शख्स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. कोर्ट ने ये भी कहा कि अब्दुल हकीम के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है. 

रिपोर्ट के मुताबिक अब्दुल हकीम गुरुवायूर में एक होटल के मालिक हैं और उनके पास उसका लाइसेंस भी है. बेंच ने ये भी बताया कि अब्दुल हकीम के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी है. इसी के आधार पर बेंच ने कहा कि अब्दुल हकीम के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए. कोर्ट ने बताया,

Embed

कोर्ट ने आरोपी शख्स की मानसिक स्थिति की जांच के निर्देश भी दिए हैं. अदालत ने सवाल किया कि अगर वो मानसिक रूप से बीमार है तो वो होटल कैसे चला रहा है और उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस कैसे है. जस्टिस कुन्हिकृष्णन ने कहा,

Embed

इसी के आधार पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया.

वीडियो: केरल हाईकोर्ट के पूर्व जज से ठगे लाखों रुपये, साइबर अपराधियों ने लगाया चूना!

Advertisement

Advertisement

()