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क्या भारत में सचमुच ब्लॉक हो जाएगा टेलीग्राम, या सरकार सिर्फ डरा रही है?

Telegram Ban: क्या भारत में सचमुच ब्लॉक हो जाएगा टेलीग्राम? जानिए कैसे 'लिमिटेड सर्च' फीचर और NEET पेपर लीक के कनेक्शन ने इस ऐप को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर ला दिया है. टेक और प्राइवेसी की इस जंग की पूरी इनसाइड क्रोनोलॉजी.

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19 जून 2026 (पब्लिश्ड: 12:02 PM IST)
Telegram Ban India
'लिमिटेड सर्च' के चक्कर में बंद हो जाएगा आपका पसंदीदा ऐप? (फोटो-AI)
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​टिकटॉक के बैन होने के बाद जब भी किसी बड़े ऐप पर गाज गिरने की बात होती है, तो टेक की दुनिया में हड़कंप मच जाता है. इस समय ठीक ऐसा ही माहौल टेलीग्राम को लेकर बना हुआ है. वॉट्सऐप से ज्यादा सुरक्षित होने का दावा करने वाला ये ऐप आज भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के सबसे बड़े रडार पर है. सरकार और टेलीग्राम के अधिकारियों के बीच हाल ही में हुई एक हाई-लेवल सीक्रेट मीटिंग की खबरें आ रही हैं, जिसमें सबसे बड़ा पेंच फंसा है टेलीग्राम के 'लिमिटेड सर्च' (Limited Search) फीचर पर.

​यह पूरा विवाद समझने के लिए हमें हाल ही में हुए NEET-UG पेपर लीक मामले को देखना होगा. पेपर लीक की जांच के दौरान जब एजेंसियां तह तक पहुंचीं, तो पता चला कि लीक हुए प्रश्नपत्रों और आंसर-की को बांटने, बेचने और वायरल करने के लिए टेलीग्राम का धड़ल्ले से इस्तेमाल हुआ. जब सरकार ने टेलीग्राम से उन चैनल्स और एडमिन्स का डेटा मांगा, तो प्राइवेसी और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की आड़ लेकर इस पर ढुलमुल रवैया अपनाया गया. यहीं से सरकार का माथा ठनका कि जो ऐप प्राइवेसी के नाम पर अपराधियों की सेफ हेवन बन रहा है, उस पर लगाम लगाना क्यों जरूरी है.

​क्या है 'लिमिटेड सर्च' का वो डार्क खेल, जिससे सरकार परेशान है?

​आसान भाषा में समझें तो जब आप टेलीग्राम पर कुछ सर्च करते हैं, तो आपको सिर्फ वही चीजें दिखती हैं जो पब्लिकली अवेलेबल हैं. लेकिन टेलीग्राम के भीतर एक ऐसा नेटवर्क काम करता है जो पूरी तरह 'इनविजिबल' या छुपा हुआ होता है. इसे ही टेक की भाषा में 'लिमिटेड सर्च' या हिडन चैनल्स का इकोसिस्टम कहा जाता है. इस फीचर की वजह से कोई भी आम यूजर या सरकारी एजेंसी बिना डायरेक्ट इनवाइट लिंक के उन सीक्रेट ग्रुप्स या चैनल्स तक नहीं पहुंच सकती, जहां देश विरोधी प्रोपेगैंडा, अश्लील कंटेंट या पायरेसी का धंधा चल रहा होता है.

​सुरक्षा एजेंसियों का आरोप है कि टेलीग्राम का ये रवैया उसे एक तरह के 'डार्क वेब' में बदल रहा है. एक तरफ वॉट्सऐप पर जहां किसी फॉरवर्डेड मैसेज को ट्रैक करना या ग्रुप साइज पर लिमिट लगाना आसान है, वहीं टेलीग्राम पर एक-एक चैनल में लाखों लोग जुड़े होते हैं. लिमिटेड सर्च की वजह से ये चैनल सर्चिंग में नहीं आते, जिससे अपराधियों को पकड़ना भूसे के ढेर में सुई ढूंढने जैसा हो जाता है. भारत सरकार का कहना है कि ये कोई मामूली टेक फीचर नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा लूपहोल है.

​टेक और प्राइवेसी की जंग: राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम यूजर राइट्स

​इस पूरे मामले के दो पहलू हैं और दोनों ही अपनी-अपनी जगह बेहद मजबूत तर्क रखते हैं. सरकार का पक्ष साफ है कि देश की सुरक्षा, परीक्षाओं की शुचिता और नागरिकों का डेटा सर्वोपरि है. अगर कोई प्लेटफॉर्म भारतीय कानूनों (IT Act) के तहत नोडल ऑफिसर नियुक्त करने या जांच में सहयोग करने से कतराता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी ही चाहिए. सरकार का मानना है कि प्राइवेसी के नाम पर क्राइम को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता.

Telegram
टेलीग्राम पर बैन के पक्ष-विपक्ष में तर्क (AI से तैयार ग्राफिक्स)

​दूसरी तरफ टेक एक्सपर्ट्स और प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स का कहना है कि टेलीग्राम को ब्लॉक करना समस्या का हल नहीं है. टेलीग्राम का इस्तेमाल सिर्फ अपराधी नहीं बल्कि लाखों स्टूडेंट्स, एजुकेटर्स, डेवलपर्स और स्टार्टअप्स अपने जरूरी काम के लिए करते हैं. अगर सरकार इस पर पूरी तरह रोक लगाती है या बैकडोर एंट्री मांगती है, तो ये सीधे तौर पर आम नागरिकों की प्राइवेसी पर हमला होगा. डिजिटल राइट्स संगठनों का कहना है कि सरकार को अपराधियों को पकड़ना चाहिए, न कि पूरे प्लेटफॉर्म का गला घोंटना चाहिए.

​तो क्या सचमुच ब्लॉक हो जाएगा टेलीग्राम? जानिए इनसाइड क्रोनोलॉजी

​अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या टिकटॉक की तरह टेलीग्राम भी भारत में इतिहास बन जाएगा. अंदरूनी सूत्रों की मानें तो सरकार तुरंत बैन लगाने के मूड में नहीं है, बल्कि वो एक सोची-समझी क्रोनोलॉजी के तहत दबाव बना रही है. सरकार की पहली कोशिश ये है कि टेलीग्राम को भारतीय कानूनों के दायरे में लाया जाए. इसके लिए उसे नोटिस भेजे जा चुके हैं और सीक्रेट मीटिंग्स में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर 'लिमिटेड सर्च' और हिडन चैनल्स के जरिए होने वाले अपराधों पर टेलीग्राम ने खुद लगाम नहीं लगाई, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे.

​अगर टेलीग्राम सरकार के नियमों को मानने से पूरी तरह इनकार कर देता है, तभी बैन जैसा आखिरी कदम उठाया जाएगा. अभी की स्थिति 'वेट एंड वॉच' की है. सरकार सिर्फ डरा नहीं रही है, बल्कि वो एक मजबूत लीगल ग्राउंड तैयार कर रही है ताकि कोर्ट में भी उसके फैसले को चुनौती न दी जा सके. यूजर्स के लिए सलाह यही है कि वे स्थिति पर नजर रखें, क्योंकि टेक और सरकार की इस लड़ाई का सीधा असर भारत के करोड़ो इंटरनेट यूजर्स पर पड़ने वाला है.

ये भी पढ़ें: 'Telegram नया डार्क वेब, आतंकी यूज करते हैं', प्लेटफॉर्म पर केंद्र के गंभीर आरोप
 

वीडियो: दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने टेलीग्राम को लेकर क्या कहा?

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