तेजस्वी बने महागठबंधन के विधायक दल के नेता, कांग्रेस MLA के मीटिंग में न आने की क्या वजह बताई?
बिहार विधानसभा का पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू होगा. इस दौरान विपक्ष कई मुद्दों पर NDA सरकार को घेरने की तैयारी में है. महागठबंधन के नेताओं ने बैठक में इसी पर चर्चा की.

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद विपक्षी महागठबंधन ने शनिवार, 29 नवंबर को पहली बैठक की, जिसमें नवनिर्वाचित विधायकों ने तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को विधानमंडल में अपने दल का नेता चुना. बिहार विधानसभा का पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू होगा. इस दौरान विपक्ष कई मुद्दों पर NDA सरकार को घेरने की तैयारी में है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक पटना में RJD नेता तेजस्वी यादव के 1 पोलो रोड स्थित आवास पर हुई. चुनाव नतीजों के बाद सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहे तेजस्वी यादव शनिवार को पटना लौटे और बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में महागठबंधन के नेताओं ने विधानसभा के आगामी सत्र की तैयारी और सदन में सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा की. RJD नेता और मनेर से विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा,
हम पूरे पांच दिवसीय विधानसभा सत्र के दौरान मौजूद रहेंगे और सदन में हर मुद्दे को उठाएंगे, खासकर सरकार की गलत नीतियों का विरोध करेंगे.
दिलचस्प बात यह है कि इस बैठक में एक भी कांग्रेस विधायक मौजूद नहीं था. सिर्फ एक कांग्रेस MLC समीर सिंह शामिल हुए. बताया गया कि बाकी कांग्रेस विधायक पार्टी की बैठक के लिए दिल्ली गए थे.
समीर सिंह ने बताया कि बैठक में चुनाव नतीजों को लेकर चिंता जताई गई. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और प्रशासन की गड़बड़ियों से यह हालात बने. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने विधानसभा के अंदर और बाहर मजबूती से लड़ने का संकल्प लिया है और गठबंधन में दरार की बातें बेबुनियाद हैं.
इस महीने की शुरुआत में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में NDA ने 243 में से 202 सीटें जीतकर शानदार जनादेश हासिल किया. BJP को 89, JD(U) को 85, LJP को 19, HAM को पांच और RLD को चार सीटें मिलीं. महागठबंधन को सिर्फ 35 सीटें मिलीं, जिनमें से 25 RJD ने, छह कांग्रेस ने, और बाकी चार सीटें CPI (ML) L, CPI(M) और IIP के बीच बंटी.
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अब विपक्ष एकजुटता दिखाने की तैयारी में है, जबकि NDA मजबूत बहुमत के साथ सदन में जा रहा है. ऐसे में बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र नई सरकार का शुरुआती कामकाज तय करेगा. यह सत्र 5 दिसंबर तक चलेगा. पहले दिन नवनिर्वाचित विधायक शपथ लेंगे, दूसरे दिन विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा, और इसके बाद राज्यपाल का अभिभाषण तथा सरकार से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज पूरे सत्र में किए जाएंगे.
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