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'शादी के बाद महिला का गोत्र बदल जाता है' उत्तराधिकारी कानून पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

Supreme Court की बेंच ने कहा कि एक बार जब महिला की शादी हो जाती है, तो कानून के तहत उसकी जिम्मेदारी उसके पति और उसके परिवार पर आ जाती है.

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Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट में उत्तराधिकारी कानून को चुनौती दी गई थी. (फाइल फोटो: एजेंसी/इंडिया टुडे)
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सृष्टि ओझा
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25 सितंबर 2025 (पब्लिश्ड: 02:55 PM IST)
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा है कि अगर किसी हिंदू महिला की मृत्यु बिना वसीयत के होती है, और अगर उसका पति या बच्चा दुनिया में नहीं है, तो उस हिंदू महिला की संपत्ति उसके पति के उत्तराधिकारी को मिलती है, न कि महिला के परिवार को. क्योंकि हिंदू कानून के तहत विवाह करने से महिला का गोत्र बदल जाता है.

24 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी की. अदालत हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 15(1)(बी) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. इसके अनुसार, अगर किसी हिंदू महिला की बिना वसीयत के मृत्यु हो जाती है, तो उसकी संपत्ति उसके पति के उत्तराधिकारियों को ट्रांसफर हो जाती है, बशर्ते उसका पति या बच्चा न हो.

जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ताओं को कानून के तहत अपनाए गए सांस्कृतिक ढ़ांचे पर विचार करने को कहा. बेंच ने कहा,

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जस्टिस नागरत्ना ने दक्षिण भारत में प्रचलित रीति-रिवाजों का उल्लेख करते हुए कहा,

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पीठ ने कहा कि एक बार जब महिला विवाहित हो जाती है, तो कानून के तहत उसकी जिम्मेदारी उसके पति और उसके परिवार पर आ जाती है. न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, 

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ये भी पढ़ें: 'मानहानि को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का समय आ गया है', सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

याचिकाकर्ता की ओर से क्या दलील दी गई?

एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इसको मनमाना और भेदभाव से भरा हुआ बताया. उन्होंने तर्क दिया,

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इस पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा,

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एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने स्पष्ट किया कि चुनौती कानूनी प्रावधान को लेकर थी, धार्मिक प्रथा को लेकर नहीं. शीर्ष अदालत ने कहा कि उत्तराधिकार कानून राज्यों और समुदायों के बीच अलग-अलग होते हैं. बेंच ने अलग-अलग मामलों को ‘सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता केंद्र’ को भेज दिया. उन्होंने पक्षों को निर्देश दिया कि वो संवैधानिक प्रश्नों को ध्यान में रखते हुए समझौते का प्रयास करें.

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