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जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजने की सिफारिश, बार एसोसिएशन ने फिर किया विरोध

Supreme Court कॉलेजियम ने Justice Yashwant Varma को वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजने की सिफारिश की है. वहीं, इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने मांग की है कि इन्हें यहां न भेजिए, इन पर महाभियोग चलाइए, जांच कीजिये.

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24 मार्च 2025 (अपडेटेड: 24 मार्च 2025, 09:13 PM IST)
Justice Yashwant Varma Transfer
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजने की सिफारिश की.
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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सोमवार, 24 मार्च को जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में वापस भेजने की सिफारिश की है. सुप्रीम कोर्ट ने इसकी मंजूरी के लिए सरकार के पास एक प्रस्ताव भेजा है. आने वाले दिनों सरकार इस सिफारिश पर आखिरी फैसला लेगी. दूसरी तरफ, इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजने का फैसला रोकने की मांग की है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की यह सिफारिश इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के विरोध के बीच आई है. बार एसोसिएशन जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजने का विरोध कर रही है. सोमवार को हुई एक जनरल बॉडी मीटिंग में बार एसोसिएशन ने कुल 11 प्रस्ताव पास किए, जिसमें जस्टिस यशवंत वर्मा की वापसी का विरोध भी शामिल है.

इंडिया टुडे से जुड़े पंकज के इनपुट के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने यह भी कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट 'डंपिंग ग्राउंड' नहीं है. बार एसोसिएशन ने केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) से जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग लाए जाने की भी मांग की है. इसके अलावा बार एसोसिएशन ने कहा कि सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (CBI) और एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) को जस्टिस वर्मा के खिलाफ केस रजिस्टर करने की इजाजत मिलनी चाहिए.

बार एसोसिएशन ने तो बड़ी मांगें कर दीं

बार एसोसिएशन का कहना है कि जस्टिस वर्मा का ट्रायल उसी तरह से होना चाहिए जैसे एक सिविल सर्वेंट, पब्लिक सर्वेंट या राजनेता का होता है. अगर जरूरत पड़े तो जस्टिस यशवंत वर्मा को सीजेआई की इजाजत से कस्टडी में लिया जाए. बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच को भी खारिज कर दिया. इसके अलावा बार एसोसिएशन ने जस्टिस वर्मा की तरफ से दी गई सफाई और सारी दलीलों को नकार दिया.

बार एसोसिएशन ने 'अंकल जज सिंड्रोम' का भी मुद्दा उठाया. इसके तहत बार एसोसिएशन ने यह मांग है कि जिस अदालत में कोई जज हो, वहां उसके परिवार के सदस्य वकालत ना करें. इसके साथ ही बार एसोसिएशन ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में जजों के खाली पदों को भरने की भी मांग की है, ताकि अदालत का कामकाज सही ढंग से चल सके.

इन सभी मुद्दों को इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने जनरल बॉडी मीटिंग में पास किया. अपना विरोध दर्ज कराने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकील लंच के बाद हड़ताल पर चले गए. हालांकि, मंगलवार से हाई कोर्ट के सभी वकील काम पर लौटेंगे.

बता दें कि 14 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले में आग लग गई थी. आरोप है कि आग बुझाने के बाद एक कमरे से भारी मात्रा में कैश बरामद किया गया था. जस्टिस वर्मा ने इस मामले में कहा कि इस कैश का ना तो उनसे और ना ही उनके परिवार के किसी सदस्य से कोई संबंध है. उन्होंने इसे अपनी मान-मर्यादा को नुकसान पहुंचाने की साजिश बताया. जस्टिस वर्मा ने कहा कि यह घटना उन्हें बदनाम करने की कोशिश का हिस्सा हो सकती है.

फिलहाल, दिल्ली हाई कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा को किसी भी न्यायिक जिम्मेदारी से हटा दिया है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने एक तीन जजों का पैनल बनाया है, जो जस्टिस वर्मा के खिलाफ कैश बरामदगी मामले की जांच कर रहा है. जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट से पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट में जज थे.

वीडियो: जस्टिस यशवंत वर्मा के घर बाहर भी मिले नोट, सफाईकर्मी ने क्या बता दिया?

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