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राष्ट्रगान से पहले गाया जाए वंदे मातरम, सभी 6 छंद गाना जरूरी, सरकार ने जारी किए नए नियम

नए नियमों के अनुसार, जब राष्ट्रगीत (वंदे मातरम) और राष्ट्रीय गान (जन गण मन) दोनों साथ में बजाए या गाए जाते हैं, तो वंदे मातरम पहले होगा.

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six stanzas of Vande Mataram a must before national anthem new rules for the national song
स्कूलों में भी रोजाना दिन की शुरुआत वंदे मातरम से हो सकती है. (फोटो- X)
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प्रशांत सिंह
11 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 11 फ़रवरी 2026, 01:35 PM IST)
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केंद्र सरकार ने वंदे मातरम गीत के लिए नए नियम जारी किए हैं. गृह मंत्रालय ने एक आदेश में कहा है कि अब सरकारी कार्यक्रमों में नेशनल सॉन्ग वंदे मातरम के पूरे छह छंद (stanzas) गाए या बजाए जाएंगे. ये करीब 3 मिनट 10 सेकंड का होगा. इससे पहले इस गाने के सिर्फ दो छंद ही इस्तेमाल होते थे, लेकिन अब पूरा गाना अनिवार्य है.

वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1870 के दशक में लिखा था. 1950 में आजादी के बाद इसके पहले दो छंदों को ही राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया था. लेकिन अब सरकार ने पूरा छह छंद वाला संस्करण आधिकारिक रूप से अपनाया है.

नए नियमों के अनुसार, जब वंदे मातरम और राष्ट्रीय गान (जन गण मन) दोनों साथ में बजाए या गाए जाते हैं, तो वंदे मातरम पहले होगा. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दर्शकों को इस दौरान खड़े होकर ध्यान की मुद्रा में रहना होगा. ये नियम किन-किन मौकों पर लागू होंगे?

- तिरंगा झंडा फहराने के समय
- राष्ट्रपति के किसी सरकारी या औपचारिक कार्यक्रम में आने-जाने पर
- राष्ट्रपति के भाषण या राष्ट्र को संबोधन से पहले और बाद में
- राज्यपाल या उपराज्यपाल के राज्य में औपचारिक कार्यक्रमों में आने-जाने पर
- सिविल सम्मान समारोहों (जैसे पद्म पुरस्कार) में
- सांस्कृतिक या औपचारिक कार्यक्रमों में (परेड को छोड़कर), जहां सामूहिक तौर पर इसे गाया जाए

रिपोर्ट के मुताबिक स्कूलों में भी रोजाना दिन की शुरुआत वंदे मातरम से हो सकती है. एक खास बात, अगर कोई फिल्म या न्यूज रील में वंदे मातरम बजता है, तो दर्शकों को खड़े होने की जरूरत नहीं है. क्योंकि इससे सिनेमा हॉल में बैठे लोगों को मूवी देखने में दिक्कत हो सकती है.

ये आदेश 28 जनवरी को जारी किया गया था और सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों को भेजा गया है. सरकार का ये कदम वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के मौके पर आया है. पिछले साल संसद में भी इस गीत पर लंबी बहस हुई थी, जहां प्रधानमंत्री ने कहा था कि पहले गीत को बांटा गया, फिर देश बंटा.

क्या कहते हैं नियम?

सरकार के आदेश में बताया गया कि जब किसी बैंड द्वारा राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम) बजाया जाता है, तो गीत शुरू होने से पहले ड्रम की रोल (लगातार ड्रम की आवाज) बजाई जाएगी. ये रोल इसलिए बजाई जाएगी, ताकि दर्शकों को पता चल जाए कि राष्ट्रीय गीत अब बजने वाला है और वो खड़े हो जाएं. अगर पहले से कोई दूसरा स्पष्ट संकेत हो, जैसे फैनफेयर बजना, तो रोल की जरूरत नहीं है.

स्लो मार्च में 7 कदम (7 paces) होंगे. इसे शुरू में धीरे-धीरे और बीच में जितना जोर से हो सके उतना तेज आवाज में बजाना होगा. लेकिन सातवें बीट तक ये पूरी तरह सुनाई देना चाहिए. इसके बाद एक बीट (एक पल) का स्टॉप लिया जाएगा. फिर राष्ट्रीय गीत शुरू किया जाता है.  

दूसरी कैटेगरी वो है जिसमें राष्ट्रीय गीत को ‘मास सिंगिंग’ यानी सब लोग मिलकर गाने के साथ बजाते हैं. इसमें तिरंगा झंडा फहराना भी शामिल है. ये सांस्कृतिक कार्यक्रमों या परेड के अलावा अन्य सरकारी समारोहों में किया जाता है. सरकार के मुताबिक इसके लिए एक choir रखें जो सही जगह पर खड़ा हो और बैंड के साथ मिलकर गाना गाए. पब्लिक ऑडिशन सिस्टम बहुत अच्छा होना चाहिए, ताकि अलग-अलग जगहों पर बैठे लोग कोरस के साथ एक साथ गा सकें. जहां जरूरत हो, वहां लोगों को इस गाने के लिरिक्स की प्रिंटेड कॉपी भी दी जाए.

तीसरी कैटेगरी वो है जहां राष्ट्रीय गीत गाया जा सकता है. इसमें स्कूल के कार्यक्रम शामिल हैं. आदेश में साफ कहा गया है कि सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत वंदे मातरम गाकर की जा सकती है.

स्कूलों के लिए नियम?

सरकार ने बताया कि स्कूल वाले अपने प्रोग्राम में अच्छी व्यवस्था करें ताकि बच्चे राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय ध्वज (झंडा) और राष्ट्रगान का सम्मान करना सीखें और इन्हें गाने की आदत डालें. इसके अलावा, गीत ऐसे मौकों पर भी गाया जा सकता है जो पूरी तरह औपचारिक (सेरेमोनियल) नहीं होते, लेकिन मंत्री या बड़े अधिकारी मौजूद होने की वजह से वे महत्वपूर्ण हो जाते हैं. ये नियम राष्ट्रीय गीत का सम्मान बढ़ाने और बच्चों में देशभक्ति की भावना जगाने के लिए हैं. सरकार ने आदेश में कहा कि स्कूलों में रोजाना सुबह इसे गाया जाना चाहिए.

वीडियो: राज्यसभा में वंदे मातरम पर चर्चा, आप सांसद संजय सिंह ने ऐसा क्या कह दिया कि बीजेपी ने मांफी मांगने को कहा

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