महाराष्ट्र में शिंदे और उद्धव गुट एक बार फिर साथ आए, कहां पर भाजपा को चुनौती देने की रणनीति?
शिव सेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने कहा कि पार्टी नेतृत्व को इस स्थानीय गठबंधन की पूरी जानकारी नहीं दी गई.

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के बारशी तालुका में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों ने स्थानीय स्तर पर गठबंधन कर लिया है. ये गठबंधन भाजपा की बढ़ती ताकत को रोकने और विरोधी वोटों को एकजुट करने के उद्देश्य से किया गया है.
इंडिया टुडे से जुड़े ओंकार वाबले की रिपोर्ट के मुताबिक गठबंधन में शिवसेना (UBT), शिंदे गुट की शिवसेना, अजित पवार की NCP और शरद पवार गुट की NCP शामिल हैं. इस 'महा अघाड़ी' की घोषणा बारशी के शिवसेना (UBT) विधायक दिलीप सोपाल ने की, जिन्होंने कार्यकर्ताओं से आगामी रैली में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की.
ये गठबंधन भाजपा के सोलापुर जिले में लगातार मजबूत प्रदर्शन के बाद सामने आया है. दो महीने पहले कृषि उत्पाद बाजार समिति (APMC) चुनाव में भाजपा ने 18-0 से ऐतिहासिक जीत हासिल की थी. इसके अलावा नगर परिषद चुनाव में 42 में से 23 सीटें जीतकर अध्यक्ष पद भी हासिल किया.
राजेंद्र राउत कर रहे हैं लीडपूर्व भाजपा विधायक राजेंद्र राउत बारशी में भाजपा का नेतृत्व कर रहे हैं. राउत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी माने जाते हैं. पिछले नगर चुनावों में राउत ने शिंदे गुट के साथ रणनीतिक समझौता किया था, लेकिन शिंदे के उम्मीदवारों को सीटें नहीं मिलीं. भाजपा समर्थित प्रत्याशी धनुष-तीर चिह्न पर लड़े, जिससे शिंदे गुट के कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ गया था. इसी असंतोष को देखते हुए दिलीप सोपाल ने ये गठबंधन तैयार किया.
सीट बंटवारा इस प्रकारसीट बंटवारे के अनुसार, बारशी में कुल 6 जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्र और 12 पंचायत समिति समूह हैं. अजित पवार की NCP को 3 जिला परिषद और 8 पंचायत समिति सीटें मिली हैं. शिंदे गुट को 2 जिला परिषद और 4 पंचायत समिति सीटें दी गई हैं. जबकि शिवसेना (UBT) को सिर्फ 1 जिला परिषद सीट मिली है.
खास बात ये है कि केवल एक सीट पर UBT अपना 'मशाल' चिह्न इस्तेमाल करेगी. बाकी सीटों पर दो NCP गुट 'घड़ी' और 'ट्रंपेट' चिह्न पर. इसके अलावा शिंदे गुट 'धनुष-तीर' चिह्न पर चुनाव लड़ेगा. विभिन्न चिह्नों के बावजूद सभी पार्टियां भाजपा विरोधी समझौते पर एकजुट हैं.
हालांकि, शिव सेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने कहा कि पार्टी नेतृत्व को इस स्थानीय गठबंधन की पूरी जानकारी नहीं दी गई. उन्होंने बताया,
"पार्टी को स्थानीय स्तर पर क्या हो रहा है, इसकी पूरी जानकारी नहीं है. उद्धव ठाकरे भी इस व्यवस्था से पूरी तरह अवगत नहीं हैं."
राउत ने कहा कि वो इसकी जानकारी जुटा रहे हैं.
उधर, राज्य स्तर पर भी शिवसेना गुटों के बीच एकता की मांग तेज हो रही है. शिव सेना (UBT) नेता भास्कर जाधव ने शिंदे से उद्धव गुट का समर्थन करने की अपील की. उन्होंने बालासाहेब ठाकरे की विरासत और मुंबई में सेना मेयर बनाने की महत्वाकांक्षा का हवाला देते हुए ये बात कही. परभनी से सांसद संजय जाधव ने भी पवार परिवार के गुटों के एकजुट होने का उदाहरण देकर सेना के साथ आने की मांग की.
ये गठबंधन महाराष्ट्र में 5 फरवरी को होने वाले 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनावों से पहले सामने आया है. मतगणना 7 फरवरी को होगी. बारशी का ये प्रयोग राज्य स्तर पर राजनीतिक उथल-पुथल का कारण हो सकता है. खासकर जब भाजपा हाल के नगर निगम चुनावों में 29 में से 21 जगहों पर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. सोलापुर जैसे क्षेत्र में भाजपा का गढ़ मजबूत हो रहा है, लेकिन ये स्थानीय गठबंधन विरोधी ताकतों को भी नई उम्मीद दे रहा है.
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