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'जो विधर्मियों ने नहीं किया, वो यूपी पुलिस ने किया', शिष्यों की चोटी खींचने पर भड़के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती

शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने प्रयागराज माघ मेले में ब्रह्मचारियों की शिखा (चोटी) खींचे जाने की घटना को सनातन धर्म का अपमान बताया और कहा कि ‘जो काम विधर्मियों ने नहीं किया, वह पुलिस ने कर दिया’. उन्होंने पुलिस और प्रशासन से कई मांगें की हैं.

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 Sadananda Saraswati on avimukteshwaranand
शंकराचार्य स्वामी सदानंद (बाएं) ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सम्मान के साथ त्रिवेणी स्नान कराया जाए. (फोटो: आजतक)
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अर्पित कटियार
31 जनवरी 2026 (अपडेटेड: 31 जनवरी 2026, 04:10 PM IST)
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प्रयागराज माघ मेला प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच त्रिवेणी स्नान को लेकर हुआ विवाद जारी है. इस बीच, शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती (Swami Sadananda Saraswati) ने प्रयागराज पुलिस और प्रशासन पर कड़ा हमला बोला है. उन्होंने ब्रह्मचारियों की शिखा (चोटी) खींचे जाने की घटना को सनातन धर्म का अपमान बताया और कहा कि ‘जो काम विधर्मियों ने नहीं किया, वह पुलिस ने कर दिया’. 

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, खेडा (गुजरात) में मौजूद शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने साफ शब्दों में कहा कि राजा का पहला कर्तव्य प्रजा की रक्षा करना होता है, लेकिन इस मामले में पुलिस ने धर्म का उल्लंघन किया है. उन्होंने कहा, 

राजधर्म का अर्थ है प्रजा और उनके धर्म की रक्षा. शिखा और यज्ञोपवीत (सूत्र) का अपमान किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि त्रिवेणी स्नान श्रद्धालुओं का धार्मिक अधिकार है और इसे सम्मान सहित कराया जाना चाहिए. उन्होंने मांग की कि प्रशासन तुरंत अपनी गलती स्वीकार करे और सार्वजनिक रूप से माफी मांगे.

स्वामी सदानंद ने आदि शंकराचार्य का जिक्र करते हुए कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए ही उनका अवतार हुआ था और आज भी उसी परंपरा को निभाया जा रहा है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन होता रहा, तो संत समाज चुप नहीं बैठेगा. उन्होंने प्रशासन से मांग की स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सम्मान के साथ त्रिवेणी स्नान कराया जाए.

ये भी पढ़ें: शंकराचार्य से माफी मांगेगा प्रशासन? अफसर वाराणसी लेने जाएंगे, अविमुक्तेश्वरानंद ने रखीं 2 शर्तें

क्या था पूरा विवाद?

18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी में बैठकर स्नान करने जा रहे थे. पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा. इस बात को लेकर पुलिस और उनके शिष्यों के बीच झड़प हो गई. इससे नाराज अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए. इस बीच प्रशासन ने उनके शंकराचार्य होने का प्रमाणपत्र भी मांगा, जिससे विवाद और बढ़ गया. 11 दिन धरने के बाद वो 28 जनवरी की सुबह प्रयागराज से वाराणसी चले गए.

इसके बाद 30 जनवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी के विद्या मठ में प्रेस वार्ता के दौरान यूपी के मुख्यमंत्री को अपने हिंदू होने का प्रमाण देने की चुनौती दी. उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से गोमाता को 'राज्यमाता' का दर्जा देने और मांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है. अविमुक्तेश्वरानंद ने इन मांगों को पूरा करने के लिए शासन को 40 दिनों का समय दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 10-11 मार्च तक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे लखनऊ में संतों के समागम के बीच बड़ा फैसला लेंगे.

वीडियो: सीएम योगी को शंकराचार्य की चुनौती, गोमांस बेचने का आरोप लगा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने क्या अल्टीमेटम दे दिया?

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