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शंकराचार्य से माफी मांगेगा प्रशासन? अफसर वाराणसी लेने जाएंगे, अविमुक्तेश्वरानंद ने रखीं 2 शर्तें

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद माघी पूर्णिमा यानी 1 फरवरी को स्नान के लिए प्रयागराज आने वाले हैं. लेकिन इससे पहले उन्होंने 2 शर्तें रखी हैं. उनका कहना है कि अधिकारी उनकी बातें मानने के लिए तैयार हो गए हैं. हालांकि अभी तक प्रशासन की तरफ से इस मामले पर कुछ नहीं कहा गया है.

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prayagraj administration agreed to apologise to shankaracharya avimukteshwaranand
(PHOTO-AajTak)
30 जनवरी 2026 (अपडेटेड: 30 जनवरी 2026, 11:47 AM IST)
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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच का विवाद अब खत्म होता दिख रहा है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में शंकराचार्य की तरफ से दावा किया गया है कि प्रयागराज प्रशासन माफी मांगने को तैयार हो गया है. माघी पूर्णिमा यानी 1 फरवरी को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद स्नान के लिए प्रयागराज आने वाले हैं. लेकिन इससे पहले उन्होंने 2 शर्तें रखी हैं. उनकी पहली शर्त है कि घटना के जिम्मेदार माफी मांगे, लिखित माफीनामा दें. उनकी दूसरी मांग है कि स्नान के लिए चारों शंकराचार्य का प्रोटोकॉल लागू किया जाए. हालांकि अभी तक प्रशासन की तरफ से इस नए डेवलपमेंट पर कुछ नहीं कहा गया है.

इस बात की जानकारी अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने दी है. 28 जनवरी को शंकराचार्य प्रयागराज से वाराणसी पहुंचे थे. उनके मीडिया प्रभारी ने बताया,  

लखनऊ के दो बड़े अधिकारियों ने कॉन्टैक्ट कर के पूर्णिमा पर माघ मेले में सम्मान के साथ स्नान कराने की बात कही है. अधिकारियों का कहना था कि प्रयागराज के अफसरों को उम्मीद नहीं थी कि शंकराचार्य अचानक माघ मेला छोड़कर वाराणसी चले जाएंगे. वो यही सोच रहे थे कि माघ पूर्णिमा यानी एक फरवरी के स्नान के बाद शंकराचार्य की वापसी होगी तब तक तो हम उन्हें मना लेंगे.

खबर है कि अब शासन के कुछ अधिकारी वाराणसी आएंगे. वहां से वो शंकराचार्य को लेकर प्रयागराज जाएंगे. उन्हें माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान कराया जाएगा.

क्या था पूरा विवाद?

18 जनवरी मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी में बैठकर स्नान करने जा रहे थे. पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा. इस बात को लेकर पुलिस और उनके शिष्यों की बीच झड़प हो गई. इससे नाराज अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए. 11 दिन धरने के बाद वो 28 जनवरी की सुबह प्रयागराज से वाराणसी आ गए थे.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक विवाद सुलझाने के लिए एक दिन पहले 27 जनवरी को अधिकारियों के साथ उनकी सीक्रेट मीटिंग हुई थी. तब अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्रशासन से लिखित माफी की मांग की थी. लेकिन अधिकारी तैयार नहीं हुए थे. मेले में क्राउड मैनेजमेंट के दौरान जो कुछ हुआ उस पर अधिकारियों ने खेद जताया. लेकिन सार्वजनिक माफी के लिए तैयार नहीं हुए थे. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने खुद अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि अधिकारियों ने लेटर भेजकर उन्हें सम्मान के साथ स्नान कराने का प्रस्ताव भेजा था. 

प्रस्ताव में ये भी लिखा था कि जो अधिकारी घटना के समय संगम नोज पर थे वो अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान के दौरान मौजूद रहेंगे. उन पर पुष्प वर्षा करेंगे. लेकिन शंकराचार्य तैयार नहीं हुए. और वहां से वापस लौट गए. लेकिन अब खबर है कि प्रयागराज प्रशासन माफी मांगने को तैयार हो गया है. और 1 फरवरी को वो प्रयागराज में स्नान के लिए आ रहे हैं.

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