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घर बनाया पर घर ना गए, पाकिस्तानी हमले में शहीद हुए इन जवानों की कहानियां रुला देंगी

शहीद सुरेंद्र मोगा नए घर का गृह प्रवेश करवाने वाले थे तो शहीद मुरली नायक घर जाने की तैयारी कर रहे थे. लेकिन उससे पहले ही पाकिस्तान हमले का सामना करते हुए उन्होंने अपनी जान दे दी. देश के इन शहीदों की कहानियां रुला देंगी.

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Seven Jawans And One JK Officer Martyred During Heavy Firing And Artillery By Pakistan
शहीद होने वालों में J&K के एक अधिकारी राज कुमार थापा (नीचे से आखिरी फोटो) भी शामिल हैं.
15 मई 2025 (अपडेटेड: 15 मई 2025, 05:13 PM IST)
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ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के तहत पाकिस्तान और PoK में बने नौ आतंकी ठिकानों को भारतीय सेनाओं ने नेस्तनाबूद कर दिया था. इसके बाद पाकिस्तान ने सीमावर्ती इलाकों में सीज़फायर का उल्लंघन करते हुए गोलाबारी की. इस दौरान भारतीय सेना और अन्य सुरक्षाबलों के कुल सात जवान और जम्मू-कश्मीर स्टेट सर्विस के एक अधिकारी भी शहीद हो गए. बताते हैं देश के लिए जान देने वाले इन जवानों की कहानी.

1. सुरेंद्र कुमार मोगा

10 मई को पाकिस्तान की ओर से की गई गोलाबारी में सुरेंद्र कुमार मोगा शहीद हुए थे. वह राजस्थान के झुंझुनू के मंडावा तहसील के महरादासी गांव के रहने वाले थे. सुरेंद्र मोगा 1 जनवरी, 2010 को एयर फोर्स में भर्ती हुए थे. मोगा वायु सेना की 36वीं विंग में मेडिकल असिस्टेंट सार्जेंट के पद पर थे. हमले से पहले वह बेंगलुरु में तैनात थे. लेकिन भारत-पाकिस्तान तनाव से चार दिन पहले ही उन्हें उधमपुर बुलाया गया था.

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सुरेंद्र कुमार मोगा.

सुरेंद्र मोगा के शहीद होने की ख़बर जैसे ही उनके गांव पहुंची तो वहां मातम पसर गया. उनकी पत्नी सीमा की हालत इतनी बिगड़ी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. उधमपुर में तैनाती से कुछ दिन पहले ही सुरेंद्र ने सीमा और बच्चों को वापस गांव भेजा था. दंपती के दो छोटे  बच्चे हैं. 11 साल की वर्तिका और 7 साल का दक्ष.

बेटे दक्ष ने अपने पिता को मुखाग्नि दी. राष्ट्रीय ध्वज मोगा की बेटी वर्तिका को सौंपा गया. पिता की वीरता को देखते हुए ही वर्तिका ने एलान किया कि वह भी सेना में शामिल होगी. वह दुश्मनों को खत्म करके अपने पिता की मौत का बदला लेगी.

मेहरादासी में हाल ही में बनाया गया सुरेंद्र का मकान अब खाली पड़ा है. वे अपने नए घर का गृह प्रवेश का कार्यक्रम आयोजित करवाने वाले थे. उनके पिता स्वर्गीय शिशपाल सिंह मोगा भी फौजी थे.

2. सूबेदार मेजर पवन कुमार

सूबेदार पवन कुमार 10 मई को पुंछ की कृष्णा घाटी में तैनात थे जब पाकिस्तानी सेना ने उनकी पोस्ट पर अंधाधुंध फायरिंग की. इसमें सूबेदार मेजर पवन कुमार शहीद हो गए. 

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पवन कुमार.

पवन पंजाब रेजिमेंट में JCO के तौर पर तैनात थे. पिता गरज सिंह पंजाब रेजिमेंट में हवलदार के पद से रिटायर हुए. घर में माता-पिता, पत्नी, बेटा-बेटी हैं. वह दो महीने पहले ही रिटायर होने वाले थे.

3. राइफलमैन सुनील कुमार

25 साल के सुनील जम्मू कश्मीर की लाइट इन्फैंट्री का हिस्सा थे. उनकी तैनाती जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर में थी. 10 मई को जब पाकिस्तान की ओर से फायरिंग हुई तो वे बुरी तरह से घायल हो गए. उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया गया. 

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सुनील कुमार

लेकिन कुछ वक्त बाद उनकी जान चली गई. सुनील जम्मू के त्रेवा गांव के रहने वाले थे. उप राज्यपाल मनोज सिंह उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होने पहुंचे थे और शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की थी.

4. BSF के सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज

इम्तियाज़ बिहार के छपरा जिले के नारायणपुर गांव के रहने वाले थे. जम्मू के RS पुरा सेक्टर में उनकी तैनाती थी. वह सात अन्य लोगों के साथ घायल हो गए थे. BSF ने शनिवार 10 मई को एक बयान जारी किया था. इसमें बताया गया था कि सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज ने सीमा चौकी का नेतृत्व करते हुए साहसिक नेतृत्व और वीरता का प्रदर्शन किया. गोलीबारी के बीच भी वे जान की परवाह किए बिना डटे रहे. उनकी बहादुरी और बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा.

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मोहम्मद इम्तियाज़.

इंडिगो की फ्लाइट से उनका पार्थिव शरीर पटना लाया गया. एयरपोर्ट पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. इसके बाद उनके शरीर को उनके पैतृक गांव ले जाया गया. बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "नाज़ है. सेना की वजह से ही हम चैन से सो पाते हैं."

उनके बेटे इमरान ने अपने पिता की शहादत पर कहा,

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद उनके घर पहुंचे और परिवार से मुलाकात की. उन्होंने परिजनों को सांत्वना दी और 50 लाख रुपये की मदद देने का एलान किया. मुख्यमंत्री ने करीब पांच मिनट तक शहीद के परिजनों से बातचीत की. इस दौरान मोहम्मद इम्तियाज के परिजनों ने कुछ मांगें रखीं, जैसे कि गांव में हेल्थ केंद्र, सड़क और स्मारक का नाम शहीद के नाम पर किया जाए. साथ ही छोटे बेटे को सरकारी नौकरी दी जाए. मुख्यमंत्री ने सभी मांगें तुरंत मानने का आदेश दिया.

5. BSF के सिपाही दीपक चिमंगखाम

दीपक चिमंगखाम मणिपुर के इम्फाल के रहने वाले थे. 10 मई को जम्मू जिले के RS पुरा इलाके में सीमा पर गोलीबारी हुई थी. इसमें वह बुरी तरह घायल हो गए थे. 11 मई को उन्होंने अंतिम सांस ली. 

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दीपक चिमंगखाम.

बीएसएफ के डीजीपी और सभी जवानों ने उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है. उनका अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ जम्मू के फ्रंटियर मुख्यालय पलौरा में हुआ.

6. शहीद लांस नायक दिनेश कुमार शर्मा

दिनेश हरियाणा में पलवल के मोहम्मदपुर गांव के रहने वाले थे. वह सेना की 5 फील्ड रेजिमेंट में तैनात थे. पांच भाइयों में वह सबसे बड़े थे. उनके तीन भाई भी सेना में ही तैनात हैं. उनके बच्चों की उम्र महज़ 4 और 8 साल है.

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दिनेश कुमार शर्मा.

दिनेश दो साल से पुंछ में पोस्टेड थे. 7 मई की रात करीब 11 बजे व्हाइट नाइट कोर की तरफ से 5 Field Regiment के लांस नायक दिनेश कुमार के बलिदान को सलामी दी गई. उन्होंने पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी के दौरान अपनी जान कुर्बान कर दी. दिनेश की गर्दन पर चोट लगी थी. इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया.

7. सिपाही एम मुरली नायक

आंध्र प्रदेश के सत्य साईं जिले के रहने मुरली नायक अग्निवीर स्कीम के तहत 3 साल पहले सेना में भर्ती हुए थे. वे सिर्फ 23 साल के थे. अगले साल वापस घर जाने वाले थे. पिछले कई सालों से उनका परिवार मुंबई में रह रहा है.

2022 में 20 साल की उम्र में मुरली अग्निवीर स्कीम के तहत सेना में भर्ती हुए. पहले 6 महीने नासिक में ट्रेनिंग ली. एक साल के लिए असम में पोस्टेड रहे. इसके बाद पंजाब में सेवा दे रहे थे. ऑपरेशन सिंदूर के चलते मुरली की ड्यूटी उरी में थी. 8-9 मई की दरमियानी रात वह शहीद हुए.

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एम. मुरली नायक.

शहीद मुरली नायक के पिता मज़दूरी करते हैं. वे आखिरी बार जनवरी में 15 दिनों की छुट्टी पर अपने घर गए थे. शहीद होने से दो दिन पहले उन्होंने घर पर फोन करके बताया था कि युद्ध जैसी स्थिति में देश की सेवा के लिए जम्मू-कश्मीर जा रहे हैं.

एक सीनियर अधिकारी ने मुरली की मां को सुबह करीब 6 बजे फोन किया और बताया कि आधी रात 3 से 3.30 के बीच गोलीबारी में मुरली अपने साथियों के साथ घायल हो गए. बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया.

8. राज कुमार थापा

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में तैनात जम्मू एंड कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज यानी JKAS के अफसर राज कुमार थापा की शेलिंग में मौत हो गई. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर उनकी शहादत की जानकारी दी.

54 साल के थापा ने पिछले साल मार्च के महीने में राजौरी में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट कमिश्नर का काम संभाला था. शेलिंग के वक्त वह राजौरी में अपने सरकारी निवास पर थे. पाकिस्तान की ओर से हुई शेलिंग में उनका घर और आसपास का क्षेत्र बुरी तरह से तबाह हो गया. 

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राज कुमार थापा

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला उनके परिजन से मिलने उनके घर भी पहुंचे थे. सीएम ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “कल ही वह Deputy CM के साथ जिले के दौरे पर थे और मेरी अध्यक्षता में हुई ऑनलाइन बैठक में भी शामिल हुए थे. आज राजौरी शहर को निशाना बनाकर पाकिस्तान ने गोलाबारी की जिसमें उनका घर क्षतिग्रस्त हो गया, उनकी मृत्यु हो गई.”

सीएम ने कहा कि अधिकारी की मौत पर दुख व्यक्त करने के लिए उनके पास शब्द नहीं हैं और वे कामना करते हैं कि उनकी आत्मा की शांति मिले.

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