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जिस कंपनी के 40 सैंपल फेल हुए, राजस्थान सरकार ले रही उससे दवा, नतीजा- 2 बच्चों की मौत

Rajasthan children death by cough syrup: राजस्थान में 2 साल में 40 बार जिस कंपनी की दवा के सैंपल फेल हुए, वह मुख्यमंत्री फ्री मेडिसिन योजना के तहत दवाएं सप्लाई कर रही है.

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2 अक्तूबर 2025 (अपडेटेड: 2 अक्तूबर 2025, 03:44 PM IST)
Rajasthan cough syrup death case
राजस्थान में कफ सिरप पीने से 2 बच्चों की मौत हो गई (India Today)
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राजस्थान सरकार फ्री में जो दवा बांट रही है, वो लोगों के लिए मौत का सामान बनती जा रही है. केसॉन कंपनी के बनाए सिरप पीकर यहां दो बच्चों की मौत ने हड़कंप मचा दिया है. कई बच्चों को बेहोश होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है. हैरानी की बात ये है कि जो कफ सिरप पीकर बच्चों की मौत हुई है, उसे बनाने वाली कंपनी केसॉन के सैंपल 2 साल में 40 बार फेल हुए हैं. यह कई बार ब्लैकलिस्टेड भी की जा चुकी है. फिर भी सरकारी विभागों से साठ-गांठ कर ये कंपनी वापस दवाएं सप्लाई करने लगती है.  

इंडिया टुडे से जुड़े शरत कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में भीलवाड़ा में केसॉन कंपनी के कफ सिरप के सैंपल फेल हुए थे. इसके बाद सीकर में 4, भरतपुर में 2, अजमेर में 7, उदयपुर में 17, जयपुर और बांसवाड़ा में 2-2 और जोधपुर में 1 सैंपल फेल हुआ था. इसके बाद केसॉन कंपनी पर कार्रवाई की गई. उसे ब्लैकलिस्ट भी किया गया. लेकिन राज्य सरकार के ड्रग कंट्रोलर विभाग और फ्री मेडिसिन स्कीम के लिए दवाएं खरीदने वाले आरएमएससीएल (Rajasthan Medical Services Corporation Limited) से साठ-गांठ कर कंपनी फिर से टेंडर में शामिल हो जाती है. 

रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में दवाओं की जांच के लिए सरकारी लैब है, लेकिन RMSCL फिर भी प्राइवेट लैब से दवाओं की जांच करवाता है. इसके लिए कई प्राइवेट लैब्स को इंपैनलमेंट यानी सूचीबद्ध किया गया है. आऱोप है कि केसॉन की एक जगह से दवा फेल घोषित होती है तो कंपनी दूसरे प्राइवेट लैब से उसी दवा को सही घोषित करवा लाती है. फिर अधिकारियों की मिलीभगत से उसे वापस टेंडर मिल जाता है. 

ये ‘दूषित’ दवाएं ही ‘फ्री मेडिसिन स्कीम’ के तहत लोगों को मुफ्त में दी जाती हैं.

ये भी पढ़ेंः राजस्थान में 'कफ सिरप' से बच्चों की मौत, सेफ बताने के चक्कर में डॉक्टर भी पी गया, वो भी...  

सैंपल में फेल

काफी समय से राजस्थान में मुफ्त दवा योजना जनता के लिए जानलेवा साबित हो रही है. 1 जनवरी 2019 से अब तक इस योजना के तहत आने वाली दवाइयों के 915 सैंपल फेल हो चुके हैं. ‘आजतक’ की पड़ताल में ये सामने आया है कि पिछले पांच सालों में ‘मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना’ के तहत हर साल 100 से ज्यादा सैंपल फेल हो रहे हैं. साल 2024 में 101 सैंपल फेल हुए थे जबकि 2025 में अब तक 81 सैंपल फेल हो चुके हैं. कोरोना काल में सबसे ज्यादा दवाइयों के सैंपल फेल हुए थे.

2011 से बंट रही हैं मुफ्त दवाएं

राजस्थान में 'मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना' (MNDY) के तहत सरकारी अस्पतालों में मरीजों को जरूरी दवाएं और सर्जिकल सामान फ्री में मिलते हैं. ये योजना 2 अक्टूबर 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुरू की थी. योजना का उद्देश्य आम जनता पर दवाइयों के खर्च का बोझ कम करना और उन्हें हाई क्वालिटी की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है.

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