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पेड़ों की आड़ में कपल्स बैठते थे, पार्क के पेड़ ही काट डाले, महिलाओं ने किया विरोध

पूर्व पार्षद का दावा है कि पेड़ बहुत बड़े और ऊंचे हो गए थे. इनके मकानों पर गिरने का खतरा था. साथ ही, इन पेड़ों की आड़ में असामाजिक तत्व और लड़के-लड़कियां बैठा करते थे, जिससे मोहल्ले वालों को परेशानी होती थी.

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कॉलोनी के लोग पार्क में जमा हो गए और पूर्व पार्षद ओम पाराशर के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. (फोटो- X)
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प्रशांत सिंह
9 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 12:21 PM IST)
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राजस्थान के भीलवाड़ा में एक पार्क के कई पेड़ों को काट दिया गया. कारण सामने आया तो लोगों के बीच ये चर्चा का विषय बन गया. पेड़ों की आड़ में लड़के-लड़कियां बैठे रहते थे, इसलिए पार्क के पेड़ काट डाले गए. इलाके की महिलाओं ने इसे लेकर विरोध किया तो, पेड़ कटाई का काम रोका गया.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक ये मामला भीलवाड़ा के आरके कॉलोनी का है. जहां पार्क की हरियाली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया. यहां शनिवार, 7 फरवरी को अचानक 7-8 (कुछ रिपोर्टों में 20 से ज्यादा) बड़े-बड़े पेड़ काट दिए गए. ये पेड़ सालों पुराने थे, घने छायादार और पक्षियों का घर बने हुए थे.

कॉलोनी की महिलाएं इस घटना से इतनी दुखी हुईं कि दिनभर रोती रहीं. एक महिला ने भावुक होकर बताया, "मैंने हाथ जोड़कर मिन्नत की कि मत काटो, सिर्फ ऊपर की टहनियां छांट दो. लेकिन उन्होंने पूरे पेड़ जड़ से काट दिए. मेरी एक नहीं सुनी."

आखिर महिलाओं का विरोध इतना तेज हुआ कि पेड़ कटाई का काम रोकना पड़ा. कॉलोनी के लोग पार्क में जमा हो गए और पूर्व पार्षद ओम पाराशर के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. पूर्व पार्षद का दावा है कि पेड़ बहुत बड़े और ऊंचे हो गए थे. इनके मकानों पर गिरने का खतरा था. साथ ही, इन पेड़ों की आड़ में असामाजिक तत्व और लड़के-लड़कियां बैठा करते थे, जिससे मोहल्ले वालों को परेशानी होती थी.

उन्होंने ये भी कहा कि कॉलोनी के कुछ लोगों ने ही उन्हें पेड़ों की छंटाई करवाने के लिए कहा था. लेकिन छंटाई के नाम पर पूरे पेड़ काट दिए गए, जो महिलाओं और पर्यावरण प्रेमियों को बर्दाश्त नहीं हुआ.

कुछ लोगों का दावा है कि ये कटाई सिर्फ इसलिए की गई ताकि पार्क में कपल्स न बैठ सकें. महिलाओं के आंसुओं और विरोध के बाद कटाई रुक गई, लेकिन पार्क अब पहले जैसा हरा-भरा नहीं रहा.

भीलवाड़ा में पेड़ों की आड़ में बैठने वालों से परेशान होकर पूरी हरियाली खत्म कर दी गई. नतीजा? महिलाएं रो रही हैं, पक्षी बेघर हो गए और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा. अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले पर क्या कार्रवाई करता है.

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