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सेशन जज ने केस का ऑर्डर एक ही पेज पर प्रिंट करा लिया, हाई कोर्ट गदगद हो गया

जस्टिस कालसन ने सेशन कोर्ट के जज की तारीफ करते हुए आगे कहा कि यह ऑर्डर कागज को फिजूल बर्बादी से बचाने का एक सफल और सराहनीय उदाहरण है. उन्होंने कागज को एक बहुमूल्य संसाधन बताया. साथ ही कहा कि कोर्ट से जुड़ी कार्यवाही में इसका इस्तेमाल समझदारी से किया जाना चाहिए.

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1 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 1 फ़रवरी 2026, 05:06 PM IST)
Punjab Haryana High Court
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने कागज के कम इस्तेमाल पर सेशन कोर्ट के जज की तारीफ की. (फोटो- इंडिया टुडे)
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सेशन जज ने एक ही शीट पर केस का फैसला प्रिंट करा दिया तो हाई कोर्ट गदगद हो गया. पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने इस जज की जमकर तारीफ की है. जज ने ये कोशिश की थी कि एक केस से जुड़े ऑर्डर को जहां तक संभव हो सके, एक ही कागज की शीट पर प्रिंट कराया जाए. हाई कोर्ट ने कहा कि सेशन जज की इस पहल से कागज की फिजूल बर्बादी को रोकने का भी प्रयास किया गया.

हाई कोर्ट ने जज की तारीफ उस समय की जब एक अपहरण की याचिका पर सुनवाई हो रही थी. जस्टिस नीरजा के. कालसन ये सुनवाई कर रही थीं. लाइव लॉ के रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस कालसन ने कहा,

‘कोर्ट मामले से जुड़े ऑर्डर को खारिज करने से पहले इस बात की तारीफ करता है. जिसमें अधिकारी ने कागजों के कम से कम उपयोग करने की हर संभव कोशिश की है. केस के ऑर्डर को एक ही शीट पर प्रिंट करने की कोशिश की गई. जिसे सभी कोर्ट्स को करना चाहिए.’

जस्टिस कालसन ने लुधियाना के एक सेशन कोर्ट के जज की तारीफ करते हुए आगे कहा कि यह ऑर्डर कागज को फिजूल बर्बादी से बचाने का एक सफल और सराहनीय उदाहरण है. उन्होंने कागज को एक बहुमूल्य संसाधन बताया. साथ ही कहा कि कोर्ट से जुड़ी कार्यवाही में इसका इस्तेमाल समझदारी से किया जाना चाहिए.

हाई कोर्ट में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (ICDC, 2023) की धारा 528 के तहत एक याचिका दायर की गई थी. जिसकी सुनवाई कोर्ट में की जा रही थी. इस याचिका में याचिकाकर्ता ने लुधियाना के एक फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के उस आदेश को खारिज करने की मांग की. जिसमें उसे IPC की धारा 363, 366-A और POCSO की धारा 12 के तहत अपराधी बताया गया था.

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इसी ऑर्डर को सेशन कोर्ट के एडिशनल सेशन जज ने जारी किया था. जिसमें उन्होंने कम से कम कागज की शिट के इस्तेमाल की कोशिश की. साथ ही एक ही शीट पर ज्यादा से ज्यादा फैक्ट्स रखने की कोशिश की थी. 

बता दें कि हाई कोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की. कोर्ट ने पाया की सेशन कोर्ट यह साबित नहीं कर पाया कि याचिकाकर्ता गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार या छिप गया था. जो कि ऑर्डर पास करने की एक जरूरी शर्त है.

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