The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Pune child rape murder death sentences to 65 year old Judge Salunkhe Verdict

'उस बच्ची की चीख...', पुणे रेप-मर्डर केस में जज की बातें अंदर तक हिला देंगी

Pune child rape murder: स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जज आरएस सालुंखे ने दोषी भीमराव कांबले को सजा सुनाते हुए ये बातें कहीं तो वहां मौजूद हर शख्स अंदर से हिल गया. 65 साल के भीमराव कांबले को कोर्ट ने बच्ची की किडनैपिंग, रेप और मर्डर के लिए मौत की सजा सुनाई है.

Advertisement
pic
30 जून 2026 (अपडेटेड: 30 जून 2026, 11:57 PM IST)
Pune child rape murder
घटना के बाद पूरे महाराष्ट्र में आक्रोश पैदा हो गया था. (फोटो-इंडिया टुडे/Pexels)
Quick AI Highlights
Click here to view more

तीन साल की बच्ची के साथ रेप और फिर हत्या के केस में कोर्ट को न सिर्फ तथ्यों पर विचार करना है, बल्कि उसकी गंभीरता को भी महसूस करना है. वो चीख, वो मासूमियत, 18 चोटें और उसके माता-पिता का दर्द.

स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जज आरएस सालुंखे ने दोषी भीमराव कांबले को सजा सुनाते हुए ये बातें कहीं तो वहां मौजूद हर शख्स अंदर से हिल गया. 65 साल के भीमराव कांबले को कोर्ट ने बच्ची की किडनैपिंग, रेप और मर्डर के लिए मौत की सजा सुनाई है. उसके अपराध को रेयरेस्ट ऑफ द रेयर कहा.  

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जज सालुंखे ने सजा के ऐलान से पहले बच्ची पर बात की जो सिर्फ एक बछड़े को देखना चाहती थी. और इसीलिए खुशी-खुशी दोषी के साथ चली गई. जज ने कहा,

“कोर्ट को ‘तथ्यों’ पर न सिर्फ ‘विचार’ करना है, बल्कि उन्हें अपनी ‘इंद्रियों से महसूस भी करना है. कोर्ट को बच्चे की आखिरी चीख सुनने के लिए अपने सेंस को सचेत रखना होगा. ये चीख इतनी तेज थी कि ऑडियो-वीडियो CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई. यह कोर्ट उस छोटी बच्ची को पहुंचाई गई 18 चोटों को महसूस करेगा.

अदालत CCTV फुटेज को अपने सेंस से महसूस करेगी. जिसमें मासूम बच्ची आरोपी पर भरोसा करके खुशी-खुशी अपने छोटे-छोटे कदमों से उसके साथ चल रही है. वह एक बछड़े के नए जीवन की सुंदरता देखने के लिए उत्सुक थी. उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि इसकी कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी. ये उसके जीवन की आखिरी यात्रा होगी. कोर्ट अपनी इंद्रियों से उस पीड़िता के माता-पिता की भावनाओं को महसूस करेगा, जो अपनी प्यारी बेटी को न्याय दिलाने के इंतजार में कोर्ट के दरवाजे पर खड़े हैं.”

कोर्ट ने यह भी कहा,

“पीड़िता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटें, तीन साल की बच्ची के साथ हुए अमानवीय व्यवहार को दर्शाती हैं. आरोपी उस बच्ची के साथ जो कुछ भी करना चाहता था, उसने वह बिना किसी डर के, बेहद बर्बर तरीके से और नतीजों की परवाह किए बिना किया. ऐसा शायद इसलिए हुआ क्योंकि उसे पहले से लगता था कि अगर उस पर मुकदमा चलाया भी गया, तो भी कोर्ट में कुछ नहीं होगा.”

आरोपी का पहले भी क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है. अदालत ने मामले को लेकर लोगों के गुस्से पर भी बात की. कहा कि समाज के हर वर्ग के लोग पीड़ित बच्ची के शव के साथ मुंबई-बेंगलुरु नेशनल हाईवे पर आ गए. उनकी मांग थी कि आरोपी को उन्हें सौंप दिया जाए, क्योंकि वे खुद उसे सजा देकर न्याय करना चाहते थे. उन्हें कानून लागू करने वाली एजेंसियों पर भरोसा नहीं था. यह सोचने वाली बात है कि लोगों में ऐसी सोच क्यों बनती है.

आखिर में जज सालुंखे ने दोषी पर फैसला सुनाते हुए कहा,

“इस कोर्ट की न्यायिक अंतरात्मा इस पक्के नतीजे पर पहुंचती है कि आरोपी के लिए एकमात्र उचित सजा मौत ही है.”

ये भी पढ़ें: 3 साल की बच्ची का रेप-हत्या करने वाले बुजुर्ग को मौत की सजा, 2 महीने में आया फैसला

इसी साल 1 मई को पुणे में भीमराव कांबले ने तीन साल की बच्ची को अगवा कर पहले उसका रेप किया, फिर हत्या कर दी. घटना के बाद पूरे महाराष्ट्र में आक्रोश पैदा हो गया. पुलिस ने जांच तेज की और महज 15 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल कर दी. फिर मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में शुरू हुई. 25 जून को अदालत ने कांबले को दोषी ठहराया. यानी क्राइम होने के बाद 60 दिनों के ही अंदर ट्रायल पूरा किया गया. इसके बाद 29 जून को अदालत ने कांबले को मौत की सजा सुना दी.

वीडियो: 8 लाख की ज़मीन, 25 लाख का मकान, लवकुश मिश्रा की आलीशान प्रॉपर्टी में क्या दिखा?

Advertisement

Advertisement

()