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डेढ़ साल के बच्चे को सर्दी हुई, सरकारी डॉक्टर ने ऐसी दवा दी आंखों की रोशनी चली गई

Madhya Pradesh के सागर के सिविल अस्पताल में गलत दवा मिलने से डेढ़ साल के मासूम की आंखों की रोशनी चली गई. सर्दी और आंख की लाली का इलाज कराने गए बच्चे की तबीयत सुधरने के बजाय बिगड़ गई.

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29 जून 2026 (पब्लिश्ड: 03:17 PM IST)
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गलत दवाई से डेढ़ साल के बच्चे की आंखों की रोशनी चली गई. (फोटो: ITG)
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मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक डेढ़ साल के मासूम की आंखों की रोशनी चली गई. पिता ने बताया कि वह अपने छोटे बेटे को सर्दी और आंखों में लाली के इलाज के लिए सिविल अस्पताल ले गए थे. आरोप है कि डॉक्टर ने ऐसी दवा दी कि तबीयत ठीक होने के बजाय खराब होती चली गई. साथ ही बच्चे की आंख की रोशनी भी चली गई.

क्या है पूरा मामला?

आज तक से जुड़े हिमांशु पुरोहित की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 साल 7 महीने के बच्चे विनय विश्वकर्मा को सर्दी लग गई थी. साथ में आंख लाल हो रही थी. इसलिए उसके पिता इंद्रराज विश्वकर्मा 29 मई को बच्चे को बंडा सिविल हॉस्पिटल ले गए. रिपोर्ट के मुताबिक, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु वर्मा ने जांच के बाद बच्चे को आई ड्रॉप, पैरासिटामोल सिरप, एक इंजेक्शन और कुछ दवाइयां दीं. 

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिता इंद्रराज का आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने उनके बेटे की आंखों में नोजल ड्रॉप (कफ साफ करने वाली दवा) की बूंदें डाल दीं. 3-4 घंटे तक बच्चा अपने परिवार के साथ अस्पताल में ही रहा. फिर उसकी तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई. 

इसके बाद बच्चे को सागर जिला अस्पताल भेज दिया गया. वहां भी कोई राहत नहीं मिली. फिर बच्चे को भोपाल एम्स रेफर किया गया. एम्स के डॉक्टरों ने कहा कि इंफेक्शन फैल चुका है और बच्चे की आंख की रोशनी पूरी तरह से जा चुकी है. डेढ़ साल का बच्चा अब नेत्रहीन हो गया है. 

बच्चे के पिता का कहना है कि दवाई देने वाले डॉक्टर का नाम उन्हें याद नहीं है. लेकिन वो शक्ल से पहचान लेंगे. पीड़ित पिता ने इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराते हुए आरोपी डॉक्टर और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. आरोप है कि FIR के बाद भी कोई उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है. एक छोटे बच्चे की आंख चली गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया.

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डॉक्टर ने क्या बताया?

डॉ. हिमांशु वर्मा का कहना है कि केमिस्ट ने बच्चे को वो दवा नहीं दी, जो उन्होंने लिखी थी. उन्होंने कहा,

“अगर बच्चे के पिता दवा खरीदने के बाद मेरे पास आते तो मैं उन्हें बताता कि ये गलत दवा है, लेकिन पिता मेरे पास आए ही नहीं.”  

ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) योगेंद्र खटीक ने बताया कि मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई गई है. जांच के बाद जो भी चीजें सामने आएंगी, उसके आधार पर एक्शन लिया जाएगा. 

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