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PMO नहीं अब ‘सेवा तीर्थ’ कहिए जनाब! प्रधानमंत्री मोदी के नए ऑफिस में क्या-क्या होगा?

13 फरवरी को Narendra Modi नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन करेंगे, जो Central Vista परियोजना का अहम हिस्सा है. Delhi में बने इस इंटीग्रेटेड कॉम्प्लेक्स से PMO, कैबिनेट सचिवालय और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल एक ही जगह से काम करेंगे, जिससे गवर्नेंस तेज और प्रशासनिक समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है. यह शिफ्ट भारत के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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PMO gets new address today, Prime Minister to unveil Rs 100 commemorative coin
आजादी के बाद से PMO साउथ ब्लॉक में था. (फोटो- X)
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प्रशांत सिंह
13 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 12:07 PM IST)
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दिल्ली में 13 फरवरी को एक बड़ा बदलाव होने वाला है. देश का सबसे पावरफुल एड्रेस अब बदलने वाला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नए ऑफिस में शिफ्ट हो रहे हैं. पुराना साउथ ब्लॉक छोड़कर अब PMO का नया पता है, सेवा तीर्थ. ये आजादी के बाद पहली बार PMO का ऐसा बड़ा शिफ्ट है.

पीएम मोदी 13 फरवरी को 'सेवा तीर्थ' नाम का अनावरण करेंगे. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक शाम को करीब 6 बजे सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 व 2 का औपचारिक उद्घाटन होगा. और हां, शाम को एक जनसभा को भी एड्रेस करेंगे. ये सब केंद्रीय विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जहां पुराना राजपथ अब कर्तव्य पथ बन चुका है.

पुराना सीन क्या था?

आजादी के बाद से PMO साउथ ब्लॉक में था. वो ब्रिटिश जमाने का बिल्डिंग थी. नॉर्थ ब्लॉक में भी कई काम चलते थे. मंत्रालय इधर-उधर बिखरे हुए थे. पुरानी इमारतें, मेंटेनेंस का खर्चा ज्यादा, कोऑर्डिनेशन में दिक्कत, फाइलें इधर से उधर जातीं, मीटिंग के लिए भागदौड़. अब ये सब खत्म हो गया है.

नया सीन - सेवा तीर्थ क्या है?

ये एक इंटीग्रेटेड कॉम्प्लेक्स है. इसमें तीन हिस्से हैं.
सेवा तीर्थ-1: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
सेवा तीर्थ-2: नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट
सेवा तीर्थ-3: कैबिनेट सेक्रेटेरिएट

ये तीनों अब एक छत के नीचे होंगे. पहले ये अलग-अलग जगहों पर थे. यानी अब स्ट्रैटेजिक डिसीजन तेज होंगे. कोऑर्डिनेशन आसान बनेगा. और कर्तव्य भवन-1 और 2? ये दो बड़े भवन कई अहम मंत्रालयों को घर देंगे. मसलन, फाइनेंस, डिफेंस, हेल्थ एंड, फैमिली वेलफेयर, एजुकेशन, कॉर्पोरेट अफेयर्स, लॉ एंड जस्टिस, इंफॉर्मेशन एंड, ब्रॉडकास्टिंग, एग्रीकल्चर, केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स, ट्राइबल अफेयर्स और भी कई.

सारे बड़े मंत्रालय अब पास-पास होंगे. जनता के लिए एक्सेस आसान होगा. फाइल मूवमेंट फटाफट किया जाएगा. डिसीजन मेकिंग स्पीड ब्रेकर से फुल स्पीड पर रहेगा.

खास फीचर्स क्या हैं?  

इससे डिजिटल इंटीग्रेशन होगा. सब कुछ ई-गवर्नेंस पर, ट्रांसपेरेंसी लेवल बढ़ेगा. पब्लिक इंटरफेस जोन होंगे. जिसमें आम आदमी के लिए स्ट्रक्चर्ड एरिया होगा और रिसेप्शन भी सेंट्रलाइज्ड होगा.

ग्रीन बिल्डिंग बनाई जा रही है. 4-स्टार GRIHA स्टैंडर्ड वाली. जिसमें सोलर एनर्जी, वॉटर कंजर्वेशन, वेस्ट मैनेजमेंट और एनर्जी एफिशिएंसी रहेगी.

सिक्योरिटी टॉप क्लास होगी. स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, CCTV, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम होगा. लेकिन पब्लिक एक्सेस पर कोई रोक नहीं है.

सरकार कह रही है कि ये "ट्रांसफॉर्मेटिव माइलस्टोन" है. यानी पुरानी समस्याएं खत्म होंगी और नया बेंचमार्क सेट किया जाएगा.

पुराने साउथ-नॉर्थ ब्लॉक का क्या होगा?

वो अब म्यूजियम बनेगा. नाम 'युगे युगेन भारत संग्रहालय'. फ्रांस की म्यूजियम डेवलपमेंट एजेंसी से 2024 में समझौता हो चुका है. टेक्निकल हेल्प मिलेगी. इतिहास को संजोया जाएगा. पब्लिक के लिए ओपन रहेगा.

कुल मिलाकर, आज से भारत का एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम नई उड़ान भरने वाला है. पुरानी ब्रिटिश वाली सोच से निकलकर 'सेवा' और 'कर्तव्य' की नई इमारतों में शिफ्ट. पीएम मोदी के विजन के मुताबिक ये सब किया गया है. जिससे गवर्नेंस तेज हो. और जनता की सेवा की जा सके.

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट विवाद

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट 2019 में मोदी सरकार ने शुरू किया. लागत 20,000 करोड़ रुपए से ज्यादा. लेकिन ये प्रोजेक्ट शुरू से विवादों में घिरा रहा. कोरोना महामारी के दौरान, जब लोग ऑक्सीजन और वैक्सीन के लिए तरस रहे थे, सरकार ने इतना खर्च क्यों किया? इस पर सवाल उठे. आलोचक कहते हैं कि ये "वैनिटी प्रोजेक्ट" है. पीएम मोदी की शान बढ़ाने वाला.

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे ‘क्रिमिनल वेस्ट तक कह दिया था. बोले थे कि इसी पैसे को लोगों की जान बचाने पर लगाना चाहिए.

पर्यावरण से जुड़े दावे भी किए गए. दिल्ली की हवा पहले से जहरीली है. आरोप लगाए गए कि प्रोजेक्ट में हजारों पेड़ कटे. जिससे ग्रीन स्पेस कम हुआ है. आरोप ये भी लगाया गया कि हेरिटेज बिल्डिंग्स जैसे IGNCA, नेशनल म्यूजियम डेमोलिश किए गए. आर्किटेक्ट्स ने कहा कि ये सब कुछ इतिहास मिटाने का हिस्सा है.

इस प्रोजेक्ट की ट्रांसपेरेंसी पर भी सवाल खड़े हुए. कहा गया कि कोई ओपन डिजाइन कॉम्पिटिशन नहीं था. पब्लिक ओपिनियन नहीं लिया गया. कोर्ट में केस हुए, लैंड यूज चेंज पर भी सवाल खड़े हुए.

वीडियो: संसद में आज: PMO ने PM Cares Funds को लेकर क्या निर्देश दिए कि बवाल मच गया?

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