‘हार नहीं पचती तो सदन क्यों आते हो’, संसद सत्र के पहले दिन ही पीएम मोदी ने विपक्ष पर तंज कसा
Parliament Winter Session: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कुछ पार्टियों ने सदन का इस्तेमाल अपने सूबे की सियासत को साधने में किया है. अब उन्हें उस खेल पर फिर से सोचना चाहिए, जो वे पिछले 10 सालों से खेल रहे हैं, जिसे देश स्वीकार नहीं कर रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद का इस्तेमाल चुनाव में अपनी हार का गुस्सा निकालने के लिए करता है. पीएम ने तंज कसते हुए कहा कि वह विपक्ष को टिप्स देने के लिए भी तैयार हैं कि उन्हें कैसा परफॉर्म करना चाहिए. पीएम मोदी ने कहा कि संसद में काम होना चाहिए, ड्रामा नहीं. उन्होंने कहा कि पहली बार चुनकर आए सांसदों को सदन के अनुभव का लाभ मिलना चाहिए, उन्हें अपनी बात कहने का मौका मिलना चाहिए. कहा कि सदन का फोकस 'नीति' पर होना चाहिए, 'नारे' पर नहीं.
मालूम हो कि संसद का शीतकालीन सोमवार, 1 दिसंबर से शुरू हो गया है. सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के बाहर मीडिया को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तंज भी कसा और नसीहत भी दी. उन्होंने कहा,
हार नहीं पचा पातीं 1-2 पार्टियां: PMपीएम मोदी ने विपक्ष पर आगे निशाना साधते हुए कहा कि 1-2 पार्टियां ऐसी हैं, जो हार को पचा नहीं पातीं. उन्होंने बिहार चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टियों की बयानबाजी सुनकर ऐसा लगता है कि हार ने उनको अभी तक परेशान करके रखा है. पीएम ने कहा,
'काम होना चाहिए, ड्रामा नहीं'पीएम मोदी ने आगे कहा कि संसद में काम होना चाहिए, ड्रामा नहीं. फोकस 'नीति' (पॉलिसी) पर होना चाहिए, 'नारे' पर नहीं. उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र हार से पैदा हुई फ्रस्ट्रेशन या जीत के बाद घमंड का मैदान नहीं बनना चाहिए. पीएम ने कहा,
पीएम ने आगे बिहार के मतदाताओं की तारीफ करते हुए कहा,
शीतकालीन सत्र में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन पहली बार राज्यसभा के सभापति के तौर पर सत्र को संचालित करेंगे. इस पर पीएम मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं दी. इसके बाद उन्होंने राज्यसभा को संबोधित करते हुए कहा,
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खरगे ने किया पलटवारइधर, पीएम मोदी के हमलों के जवाब में विपक्ष ने भी पलटवार किया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि शीतकालीन सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री जी ने संसद के मुख्य मुद्दों पर बात करने के बजाय फिर से "ड्रामेबाजी की डिलीवरी" की है. उन्होंने आरोप लगाया कि संसदीय मर्यादा और संसदीय प्रणाली को पिछले 11 साल से सरकार ने लगातार कुचला है. खरगे ने कहा कि पिछले मानसून सत्र में ही कम से कम 12 बिल जल्दबाजी में पारित कर दिए गए. कुछ 15 मिनट से भी कम समय में और कुछ बिना किसी चर्चा के.
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