चपरासी ने 10 करोड़ रुपयों की चपत लगाई, पैसों से पैसा बनाने की ऐसी प्लानिंग कि सुनकर माथा पीट लेंगे!
MP Peon Embezzlement Case: पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने सरकारी योजना के तहत ख़रीदी गई ज़मीन पर प्रोजेक्ट शुरू करने और इसके तहत सब्सिडी पाने की प्लानिंग की थी.

मध्य प्रदेश की राजधानी में एक चपरासी समेत 6 लोगों को गिरफ़्तार किया है. आरोप है कि इन लोगों ने 10 करोड़ रुपये की हेराफेरी की और इन पैसों का कुछ हिस्सा ज़मीन ख़रीदने में इस्तेमाल किया. पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने सरकारी योजना के तहत ख़रीदी गई ज़मीन पर प्रोजेक्ट शुरू करने और इसके तहत सब्सिडी पाने की प्लानिंग की थी. यानी हेराफेरी के पैसों से पैसा बनाने की प्लानिंग. हालांकि, इस प्लानिंग से पर्दा हट गया है (Peon Rs 10 crore embezzling case).
इन सबकी शुरुआत हुई 4 महीने पहले, जब मुख्य आरोपी बृजेन्द्र दास नामदेव ने अन्य लोगों के साथ मिलीभगत करके एक बैंक अकाउंट से 10 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपोज़िट कर ली. आरोपी चपरासी बृजेन्द्र दास MPSCA मध्य प्रदेश बीज प्रमाणीकरण एजेंसी (MP Seed Certification Agency) के लिए काम करता है. उसने अपने साथी दीपक पंटी (अकाउंटिंग असिस्टेंट पद पर काम करने वाला) के साथ मिल कर MPSCA से जुड़े जाली दस्तावेज और मुहरें तैयार कीं.
इसके बाद बैंक मैनेजर नोएल सिंह से भी मिलीभगत की और अपने अकाउंट में फिक्स डिपॉजिट ट्रांसफर करा लिया. पुलिस के मुताबिक़, डिपार्टमेंट की फ़र्ज़ी मुहरों और डिपार्टमेंट हेड के फ़र्ज़ी साइन के साथ नामदेव को चपरासी की जगह ‘आहरण एवं संवितरण अधिकारी’ (Drawing and Disbursing Officer) बताया गया. इसके बाद, 5-5 करोड़ रुपये के दो डिमांड ड्राफ़्ट तैयार किए गए.
इसके बाद एंट्री हुई आरोपी धनंजय गिरी (एक प्राइवेट बैंक के सीनियर सेल्स मैनेजर) की. जिनकी मदद से फेक डॉक्यूमेंट्स के आधार पर उसी बैंक में बिना किसी वेरिफ़िकेशन के बृजेन्द्र का अकाउंट खुलावाया गया. फिर इन 10 करोड़ रुपयों को नए अकाउंट में ट्रांसफ़र किया गया. बाद में उन्हें 50 अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर किया गया.
इसके लिए काम किया एक और आरोपी शैलेंद्र प्रधान ने. उसने अपने साथियों के साथ मिलकर कई फेक डॉक्यूमेंट्स तैयार कर कई बैंक अकाउंट खुलवाए. जिन लोगों के नाम बैंक खाते में रजिस्टर्ड थे. उन्होंने अपना कमीशन काटकर आरोपियों को कैश दिया. इसके बाद आरोप लगा ज़मीन ख़रीदने का. आगे के आरोपों के मुताबिक़, हेराफेरी की गई 10 करोड़ की रकम से 6.40 करोड़ और 1.25 करोड़ रुपये की क़ीमत के दो प्लॉट ख़रीदे गए.
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प्लानिंग के मुताबिक़, ‘राष्ट्रीय पशुपालन योजना’ (National Animal Husbandry Scheme) के तहत इन ज़मीनों पर 5-5 एकड़ के तीन अलग-अलग प्रोजेक्ट शुरू किए जाने थे. इस स्कीम में 5 करोड़ रुपये तक के लोन का प्रावधान हैं. जिसमें लोन पर सरकार की तरफ़ से 50 फ़ीसदी सब्सिडी भी मिलती है.
हालांकि, इस प्लानिंग का पर्दाफाश करने के लिए एंट्री हुई बीज प्रमाणीकरण अधिकारी (Seed Certification Officer) सुखदेव प्रसाद अहिरवार की. उन्होंने 14 सितंबर को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी. बाद में जांच के लिए SIT गठित की गई. मामले में नामदेव और उसके सहयोगियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान चलाया गया.
आरोपी बृजेन्द्र दास नामदेव, दीपक पंथी, धनंजय गिरी और शैलेंद्र को गिरफ़्तार किया गया है. साथ ही, अकाउंट होल्डर्स राजेश शर्मा और पीयूष शर्मा की संलिप्तता की भी ख़बर मिली, तो उन्हें हिरासत में लिया गया है. वहीं, जिन 50 बैंक खातों में पैसे भेजे गए थे, उन्हें फ्रीज कर दिया गया है. पुलिस ने नामदेव के पास से फ़र्ज़ी डॉक्यूमेंट्स, फ़र्ज़ी मुहरें भी जब्त की हैं.
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