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'सिर्फ हिंदी सीखी इसलिए टेबल साफ़ कर रहे... ', तमिलनाडु के मंत्री उत्तर भारतीयों पर ये क्या बोल गए?

तमिलनाडु के कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम ने हिंदी और उत्तर भारतीयों को लेकर एक विवादित बयान दिया है. मंत्री ने कहा है कि उत्तर भारत के लोग, जिन्होंने सिर्फ़ हिंदी सीखी है, उन्हें यहां छोटी-मोटी नौकरियां करनी पड़ती हैं.

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Tamil Nadu Agriculture Minister MRK Panneerselvam statement
एमआरके पन्नीरसेल्वम | फ़ाइल फोटो: इंडिया टुडे
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अभय शर्मा
5 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 5 फ़रवरी 2026, 12:21 PM IST)
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तमिलनाडु में तीन भाषा फार्मूले का मुद्दा चुनाव से पहले फिर गर्माता दिख रहा है. बुधवार, 4 फरवरी को राज्य के कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम ने हिंदी और उत्तर भारतीयों को लेकर एक विवादित बयान दिया है. मंत्री ने कहा है कि उत्तर भारत के लोग, जिन्होंने सिर्फ़ हिंदी सीखी है, उनके पास दक्षिणी राज्य में नौकरी के सीमित मौके हैं और इसलिए उन्हें यहां छोटी-मोटी नौकरियां करनी पड़ती हैं. पन्नीरसेल्वम के मुताबिक इससे इतर तमिलनाडु के लोगों को राज्य की दो भाषा नीति से फायदा होता है, वो तमिल और अंग्रेजी दोनों पर फोकस करते हैं, जिससे उन्हें अमेरिका और लंदन में नौकरियां मिल जाती हैं.

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक एमआरके पन्नीरसेल्वम ने कहा,

‘ ...जो लोग उत्तर भारत से तमिलनाडु आ रहे हैं. वो यहां आकर टेबल साफ़ करते हैं... वो यहां आते हैं इमारत बनाने के लिए लेबर का काम करने और पानी पुरी बेचने, क्योंकि उन्होंने केवल हिंदी सीखी है. लेकिन आप हमारे बच्चे देखिए, वो हमारे यहां लागू दो भाषा वाली पॉलिसी के चलते अच्छे से अंग्रेजी भी सीखते हैं और इस वजह से वो विदेश जाते हैं, अमेरिका और लंदन. उन्हें वहां करोड़ों रुपये कमाने के मौके मिलते हैं... ’

ये बयान सामने आने के बाद सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने तुरंत इस पर सफाई दी है. पार्टी प्रवक्ता डॉ. सैयद हफीजुल्लाह ने यह कहकर स्थिति को संभालने की कोशिश की कि 'हर कानूनी काम की अपनी गरिमा होती है... हम इसके (तीन भाषा पॉलिसी) के खिलाफ नहीं हैं.' ये भी कहा कि तमिलनाडु को हिंदी बोलने वाले लोगों और उनके काम से कोई परेशानी नहीं है.

हालांकि इस दौरान वो ये भी बोले,

‘दो भाषा पॉलिसी ने तमिलनाडु और यहां के लोगों की मदद की है. अंग्रेजी भाषा लोगों को डेवलपमेंट में मदद करती है और पूरी दुनिया में उनके लिए मौकों का द्वार खोलती है. लेकिन हिंदी भाषी राज्यों में शिक्षा के क्षेत्र में अंग्रेजी को यह प्राथमिकता न मिलने के कारण  लोग उस तरह से विकास नहीं कर पाए हैं... ’

DMK के लोकसभा सांसद टीआर बालू ने कहा कि मंत्री पन्नीरसेल्वम के बयान का गलत मतलब निकाला जा रहा है. बोले-

‘पन्नीरसेल्वम एक ज़िम्मेदार मंत्री हैं... उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है, उसमें उत्तर भारतीयों के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा गया है.’

बता दें कि नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 में तीन-भाषा फॉर्मूला लाया गया है. जबकि तमिलनाडु 1968 से ही केवल दो भाषा (तमिल और अंग्रेजी) नीति पर चला रहा है. नई शिक्षा नीति का तमिलनाडु की सरकार विरोध कर रही है. मार्च 2025 में इस पर जमकर बयानबाजी हुई थी. राज्य सरकार का मानना है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार तीन भाषा फॉर्मूले के माध्यम से हिन्दी को लागू करने का प्रयास कर रही है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का आरोप है कि यह तमिल भाषी राज्य में हिंदी थोपने की कोशिश है.

तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन का भी साफ़ तौर पर कहना है कि तमिलनाडु हमेशा से तीन-भाषा नीति के खिलाफ रहा है. हम इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे. उनके मुताबिक केंद्र NEP का इस्तेमाल बैक डोर से हिन्दी की एंट्री के रूप में करना चाहता है.

इस विवाद पर केंद्र सरकार की तरफ से भी बयान दिया जा चुका है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना था कि NEP 2020 पॉलिसी भाषाई आजादी देती है और ज्यादा विकल्प उपलब्ध करवाती है. उन्होंने आरोप लगाया था कि डीएमके सरकार भाषा को लेकर राजनीति कर रही है और भाषा विवाद पैदा करने की कोशिश में है.

वीडियो: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच राजनीतिक विवाद क्यों?

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