Noida Techie Death Case: बिल्डर्स ने नोएडा अथॉरिटी पर मढ़ा दोष, कहा- उसी ने हटवाए थे बैरिकेड
Noida Techie Death Case: प्लॉट के डेवलपर ने कोर्ट में दावा किया है कि उसने जानलेवा दुर्घटना से काफी पहले नोएडा अथॉरिटी को सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बारे में बताया था.
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नोएडा के सेक्टर 150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत जिस प्लॉट में बने गड्ढे में गिरकर हुई थी, वहां लगे बैरिकेड कथित तौर पर नोएडा अथॉरिटी ने हटवाए थे. यह दावा किया है प्लॉट के मालिक ने. प्लॉट मालिक ने नोएडा की स्थानीय अदालत को बताया है कि अथॉरिटी ने 2021 में विज्ञापन वाले बैरिकेड हटाने को कहा था.
मालिक का कहना है कि अथॉरिटी ने विज्ञापन के लिए छह लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था. एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक 27 जनवरी को नोएडा के सूरजपुर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की सुनवाई के दौरान यह बातें सामने आई. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं. साथ ही उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाने का आदेश दिया. अब 29 जनवरी को इस मामले में फिर से सुनवाई होनी है.
पहले ही दी थी चेतावनी: डेवलपररिपोर्ट के अनुसार प्लॉट के डेवलपर ने कोर्ट को बताया कि जनवरी 2021 में सेक्टर 150 में नोएडा स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. इसके बाद साइट से बैरिकेड हटा दिए गए थे. डेवलपर ने यह भी दावा किया कि उसने जानलेवा दुर्घटना से काफी पहले नोएडा अथॉरिटी को सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बारे में बताया था.
विजटाउन प्लानर्स नाम के डेवलपर ने कहा कि उसने 14 मार्च 2022 को नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पत्र लिखा था. इस पत्र में उसने चेतावनी दी थी कि अथॉरिटी के सीवर और नाली लाइनों के ढहने से प्लॉट में लगातार पानी बह रहा है. इससे बेसमेंट में पानी भर गया है और एक गंभीर दुर्घटना का खतरा पैदा हो गया है.
डेवलपर का दावा है कि उन्होंने प्रशासन को पहले ही खतरों के बारे में आगाह कर दिया था. बताया था कि मिट्टी के कटाव और पानी के दबाव के कारण पास की सड़क धंस रही है. साइट पर लगी बैरिकेडिंग भी गिर रही है. डेवलपर ने कोर्ट में कहा कि उन्होंने अथॉरिटी से अनुरोध किया था कि दुर्घटना को रोकने के लिए क्षतिग्रस्त सीवर लाइनों की तुरंत मरम्मत की जाए और जमा पानी को बाहर निकाला जाए.
अथॉरिटी ने खारिज किए आरोपन्यूज एजेंसी ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि जिस प्लॉट पर यह हादसा हुआ है, उस पर पहले लोटस ग्रीन्स नाम के बिल्डर्स का मालिकाना हक था. बाद में 2019-20 में नोएडा अथॉरिटी की मंजूरी के बाद इसे विजटाउन प्लानर्स को ट्रांसफर कर दिया गया था. विजटाउन के आरोपों पर जवाब देते हुए नोएडा अथॉरिटी के एक सीनियर अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि अथॉरिटी ने केवल अवैध विज्ञापनों वाले बैरिकेड हटाने को कहा था.
अधिकारी का कहना है कि अथॉरिटी ने कभी भी सुरक्षा से समझौता करने के लिए नहीं कहा था. साइट पर बिना विज्ञापनों वाले सादे बैरिकेड भी लगाए जा सकते थे. मालूम हो कि 16 और 17 जनवरी की दरमियानी रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की पानी से भरे एक गड्ढे में डूबकर मौत हो गई थी. उनकी कार सेक्टर 150 में एक कंस्ट्रक्शन साइट के पास गड्ढे में गिर गई थी.
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हादसे के बाद लोगों ने घटना पर खूब आक्रोश जताया. स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और डेवलपर्स और नोएडा अथॉरिटी पर लापरवाही के आरोप लगाए. इस मामले में पुलिस ने विज़टाउन प्लानर्स के डायरेक्टर अभय कुमार और रियल एस्टेट फर्म लोटस ग्रीन्स के दो साथियों रवि बंसल और सचिन करणवाल को गिरफ्तार किया है. उन पर गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से मौत का कारण बनने जैसी धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है. यूपी सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) भी बनाई है.
वीडियो: ग्रेटर नोएडा एक्सीडेंट के बाद इमरजेंसी एजेंसियां क्यों फेल हुईं?

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