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नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत का जिम्मेदार कौन? नोएडा अथॉरिटी को पता था, लेकिन...

ये घटना नोएडा के सेक्टर 150 की है. यहां 27 साल के युवराज मेहता की पानी में डूबने से मौत हो गई. धुंध बहुत ज्यादा थी. युवराज की गाड़ी रोड से नीचे गिर गई. नीचे एक बेसमेंट था जिसमें पानी भरा था.

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Noida builder had flagged dangers of water pit years before techie yuvraj mehta death
नोएडा सेक्टर 150 में पानी से भरे गड्ढे में डूबने से इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई. (PHOTO- ITG)
21 जनवरी 2026 (Published: 03:07 PM IST)
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इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों की यादें अभी ताजा हैं. इंदौर में हुई इस वीभत्स घटना अब तक 25 लोगों की जान जा चुकी है. शहर के निवासी लगातार नगर निगम के अधिकारियों से शिकायतें करते रहे, लेकिन अधिकारी सोते रहे. एक पाइपलाइन के टेंडर को पास होने में 3 साल लग गए. और वो टेंडर पास तब हुआ जब 10 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी थी. लेकिन ये लापरवाही का आलम सिर्फ इंदौर तक ही सीमित नहीं है. ठीक वैसा ही हाल अब यूपी के नोएडा में नजर आ रहा है जहां अधिकारियों की अनदेखी की वजह से एक यंग सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान चली गई. 27 साल का युवराज मेहता दुनिया को कितना बदल सकता था, ये हम अब कभी नहीं जान पाएंगे क्योंकि अब वो इस दुनिया में नहीं है.

ये घटना नोएडा के सेक्टर 150 की है. यहां 27 साल के युवराज मेहता की पानी में डूबने से मौत हो गई. धुंध बहुत ज्यादा थी. युवराज की गाड़ी रोड से नीचे गिर गई. नीचे एक बेसमेंट था जिसमें पानी भरा था. नोएडा में ऐसी तमाम जगहें हैं जहां आपको ऐसे दृश्य दिख जाएंगे. गड्ढों में पानी भरा मिल जाएगा. सवाल है कि क्या स्थानीय लोगों ने कभी इसकी शिकायत नहीं की या अधिकारियों को इसके बारे में पता नहीं था? जवाब है कि अधिकारियों को सब पता था. सालों से प्लान भी बनाया जा रहा था. लेकिन स्क्रिप्ट हूबहू इंदौर जैसी ही लिखी जा रही थी. इसीलिए टेंडर को पास होने में सालों लग गए.

2015 में हुआ था सर्वे

साल 2015 में अधिकारियों ने मुद्दे का संज्ञान लिया था. सर्वे भी हुआ था. बाकायदा इसके लिए बजट भी बना लेकिन काम नहीं हुआ. ये काम हुआ तब जब एक 27 साल के युवक की मौत हो गई. लोग सड़कों पर उतर आए. मामले ने इतना तूल पकड़ा कि मुख्यमंत्री को दखल देना पड़ा. तब जाकर, अधिकारियों की नींद टूटी. सवाल है कि अधिकारियों की नींद तुड़वाने के लिए आम लोगों को कब इतनी महंगी कीमत अदा करनी होगी? कैसे हुई ये घटना, सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं.

इंडिया टुडे की श्रेया चटर्जी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2015 में नोएडा सेक्टर 150 के निचले इलाकों में जलभराव को रोकने के लिए एक ‘रेगुलेटर’ बनाने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि बारिश का पानी हिंडन नदी में ड्रेन आउट किया जा सके. फिर साल बदला और 2016 के फरवरी महीने में नोएडा अथॉरिटी ने इस रेगुलेटर के सर्वे और डिजाइन के लिए 13.5 लाख रुपये जारी किए. 7 साल बाद साल 2023 से पहले कंसल्टेंट के जरिए मैकेनिकल गेट वाला डिजाइन तैयार किया गया. बाकायदा IIT-दिल्ली से इसकी जांच करवाई गई.

फिर 4 अक्टूबर, 2023 को अथॉरिटी और सिंचाई विभाग के जॉइंट इंस्पेक्शन किया. बताया गया कि नाले से अब और भी कई सेक्टर से आने वाला पानी जुड़ गया है, जिससे पानी का बहाव काफी बढ़ गया है. उसी महीने नोएडा अथॉरिटी ने मैकेनिकल गेट की जगह हाइड्रोलिक/न्यूमैटिक माने मशीनी गेट लगाने का सुझाव दिया. सिंचाई विभाग ने नए सर्वे, रिवाइज्ड डिजाइन और नए डेटा के लिए 30 लाख की मांग की गई.

लेकिन 2023 से अब 2026 आ गया है. नए सर्वे की रिपोर्ट अभी तक पेंडिंग ही है. लेकिन 16-17 जनवरी की दरम्यानी रात हुई युवराज की मौत के बाद जब अधिकारियों की लापरवाही उजागर होने लगी तो आनन फानन में सालों से दबी फाइलें निकाली जाने लगीं. अधिकारी अचानक से एक्शन मोड में आ गए. सिंचाई विभाग के सूत्रों का कहना है कि काम एक हफ्ते के भीतर शुरू हो जाएगा. इसके लिए नोएडा अथॉरिटी ने 10.5 करोड़ रुपये का खर्च उठाने की बात कही है.

रिपोर्ट के मुताबिक 2015 से 2023 के बीच कई बार चिट्ठियों का आदान-प्रदान हुआ. फाइल एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर लगाती रहीं. तेजी से विकसित हो रहे सेक्टरों से बारिश के पानी को निकालने की जरूरत पर बार-बार जोर भी दिया गया. लेकिन बात महज जोर देने तक ही सीमित रही. कोई मुकम्मल कार्रवाई नहीं हुई.

लेकिन सवाल फिर वही है कि चाहे इंदौर हो या नोएडा. जहां एक शहर अपने माथे पर स्वच्छता का तमगा लिए फिरता है तो दूसरा खुद को आधुनिकता का पर्याय बताता है. ऊंची इमारतों पर फक्र करता है. लेकिन आलम ये है कि अधिकारी AC कमरों में बैठ प्लान पर प्लान पास करते रहते हैं. आम लोग अपना पेट काट कर टैक्स भरते हैं. और अंत में अधिकारियों की लापरवाही का हर्जाना भी टैक्स भरने वालों को ही चुकाना पड़ता है. फिर इन्हीं टैक्स के पैसे देखकर आर्थिक मदद की पेशकश की जाती है. ये सब कुछ सालों से चलता आ रहा है. उम्मीद है अब सिलसिला थमेगा.

वीडियो: नोएडा इंजीनियर युवराज मेहता के पिता ने एक-एक मिनट की बात बताई

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