लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में विपक्ष, लेकिन SP और TMC सहमत नहीं!
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर विपक्ष में मतभेद सामने आए हैं. सपा और टीएमसी ने प्रस्ताव पर अंतिम रुख स्पष्ट नहीं किया है, जबकि कांग्रेस भी अभी निर्णय की स्थिति में नहीं दिख रही. बजट सत्र के दौरान पीएम मोदी की मौजूदगी और महिला सांसदों से जुड़े विवाद के बाद यह राजनीतिक मुद्दा और गरमा गया है.

लोकसभा में ताजा विवाद के बीच खबर है कि विपक्ष स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. हालांकि ‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल समाजवादी पार्टी (सपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के रुख से संकेत मिलते हैं कि पूरा विपक्ष इस मुद्दे पर एकमत नहीं है. यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस अभी अंतिम फैसला नहीं कर पाई है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सपा सूत्रों ने बताया कि पार्टी प्रस्ताव के पक्ष में है, लेकिन इसकी पहल कांग्रेस से चाहती है. वहीं टीएमसी के एक सांसद ने कहा कि पार्टी ने अभी कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है और आला कमान से निर्देश का इंतजार कर रही है. सांसद ने सवाल उठाया कि,
कांग्रेस खुद भी निश्चित नहीं है. अगर वे बिरला के खिलाफ प्रस्ताव ला रहे हैं, तो केसी वेणुगोपाल (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव) स्पीकर से मिलने क्यों गए?
टीएमसी सांसद, वेणुगोपाल और बिरला के बीच विवाद खत्म करने के लिए हुई बैठक का जिक्र कर रहे थे. बैठक के बाद वेणुगोपाल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया,
क्या है पूरा मामला?हमने अध्यक्ष के सामने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. अब उन्हें हमारी मांगों पर अपना रुख बताना होगा.
दरअसल, लोकसभा में बजट सेशन चल रहा है. विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने की मांग कर रहा है. स्पीकर ने कहा था कि विपक्ष की कुछ महिला सांसदों ने पीएम मोदी के आसपास इकट्ठा होकर कुछ ऐसा किया जिससे उन्हें खतरा हो सकता था. इसी वजह से पीएम सदन में नहीं आए.
इंडिया टुडे से जुड़ी मौसमी की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस की महिला सांसदों ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी सदन में नहीं आए क्योंकि उनमें विपक्ष का सामना करने की हिम्मत नहीं थी.
पत्र में लिखा है कि जब वो स्पीकर से मिलीं तो स्पीकर ने माना कि गलती हुई है और शाम 4 बजे फिर आने को कहा. लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि वो सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं. इससे लगता है कि स्पीकर अब खुद फैसला नहीं ले पा रहे, बल्कि सरकार के इशारे पर चल रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक सांसदों ने कहा कि वो गरीब पृष्ठभूमि से आती हैं, पहली पीढ़ी की नेता हैं. उन्होंने लोगों के बीच सालों की मेहनत से जगह बनाई है. उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाना हर मेहनती महिला के लिए अपमान है.
माना जा रहा है कि लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए नोटिस जल्द ही लोकसभा सचिव महासचिव को दिया जा सकता है. ये संविधान के अनुच्छेद 94(C) के तहत होगा. अनुच्छेद 94(C) के तहत लोकसभा के स्पीकर या डिप्टी स्पीकर को उनके पद से हटाया जा सकता है, अगर लोकसभा में एक प्रस्ताव (रेजोल्यूशन) पास हो जाए. इस प्रस्ताव को पास करने के लिए लोकसभा के उस समय मौजूद कुल सदस्यों (सभी सदस्यों की कुल संख्या) में से बहुमत (आधे से ज्यादा) का समर्थन चाहिए.
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इसमें कुछ महत्वपूर्ण शर्त भी हैं. मसलन, ऐसा प्रस्ताव लाने की मंशा की सूचना (नोटिस) कम से कम 14 दिन पहले देनी जरूरी है. यानी, स्पीकर को हटाने के लिए कोई भी सदस्य प्रस्ताव नहीं ला सकता जब तक कि 14 दिन का नोटिस न दिया जाए.
ये फैसला सोमवार, 9 फरवरी की सुबह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के चैंबर में विपक्षी नेताओं की बैठक में लिया गया. इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC), वामपंथी दल, DMK, समाजवादी पार्टी (SP), RJD, शिवसेना (UBT), NCP (SP) और RSP के नेता शामिल हुए थे.
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