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'जूडिशरी पर सोचा-समझा हमला'... NCERT की नई किताब पर क्यों भड़के CJI सूर्यकांत?

CJI Surya Kant on NCERT 8th Book Row: CJI ने कहा कि उन्हें किताब को लेकर हाई कोर्ट के जजों समेत कई लोगों के कॉल और मैसेज आ रहे हैं. लोग किताब के कंटेंट पर चिंता जता रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं देंगे.

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ncert class 8 book judiciary chapter controversy cji surya kant raises strong objection
CJI ने NCERT की किताब के एक चैप्टर पर नाराजगी जताई है. (Photo: PTI/File)
25 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 25 फ़रवरी 2026, 05:01 PM IST)
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NCERT की 8वीं क्लास की किताब के एक चैप्टर को लेकर विवाद हो रहा है. इस चैप्टर में जूडिशरी यानी न्यायपालिका को लेकर कुछ ऐसा लिखा गया है, जिस पर अब चीफ जस्ट‍िस ऑफ इंड‍िया सूर्यकांत ने भी नाराजगी जताई है. CJI ने इसे जूडिशरी पर “सोचा-समझा और गहरा” हमला बताया है. CJI ने इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए तीखी टिप्पणियां की हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक CJI ने कहा कि उन्हें किताब को लेकर हाई कोर्ट के जजों समेत कई लोगों के कॉल और मैसेज आ रहे हैं. लोग किताब के कॉन्टेंट पर चिंता जता रहे हैं. CJI ने कहा,

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किताब में क्या है?

ऐसे में सवाल है कि नई किताब में आखिर ऐसा है क्या जिस पर CJI भड़क गए. दरअसल NCERT ने 23 फरवरी को 8वीं क्लास की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक जारी की थी. रिपोर्ट के अनुसार इसमें “The role of the judiciary in our society” नाम का एक चैप्टर है. इस चैप्टर में “corruption in the judiciary” नाम का एक सेक्शन है. इसमें बताया गया है कि अदालतों को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इसमें साफ लिखा है कि न्यायपालिका के अलग-अलग स्तरों पर भ्रष्टाचार की घटनाएं सामने आती रही हैं. इस चैप्टर में सुप्रीम कोर्ट के 81 हजार, हाईकोर्ट्स के 62 लाख 40 हजार, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है.

इस चैप्टर में ये भी बताया गया है कि कैसे सरकार की ओर से बनाए गए कुछ कानूनों को न्यायपालिका ने निरस्त कर दिया. जबकि उन कानूनों को संसद की मंजूरी थी. फिर भी उसे चुनौती दी गई. जिसके बाद न्यायपालिका ने उन कानूनों पर रोक लगा दी थी. रिपोर्ट के अनुसार चैप्टर में लिखा है,

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करप्शन वाले सेक्शन में बताया गया है कि जज एक कोड ऑफ कंडक्ट से बंधे होते हैं, जो न केवल कोर्ट में बल्कि कोर्ट के बाहर भी उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है. चैप्टर में ज्यूडिशियरी के इंटरनल अकाउंटेबिलिटी सिस्टम को भी समझाया गया है. सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम यानी CPGRAMS के जरिए शिकायतें लेने के तय प्रोसेस का जिक्र है. किताब के मुताबिक CPGRAMS सिस्टम के जरिए 2017 और 2021 के बीच 1,600 ज्यादा शिकायतें मिली थीं.

इलेक्टोरल बॉन्ड मामले का जिक्र

किताब में गंभीर मामलों में जजों को हटाने के संवैधानिक नियम के बारे में भी बताया गया है कि कैसे पार्लियामेंट इंपीचमेंट मोशन पास करके जज को हटा सकती है. इसमें कहा गया है कि ऐसे मोशन पर सही जांच के बाद ही विचार किया जाता है, जिसके दौरान जज को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है. इसके अलावा किताब में इलेक्टोरल बॉन्ड, इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट को लेकर कोर्ट के फैसले का भी जिक्र है.

इलेक्टोरल बॉन्ड पर लिखा गया है कि साल 2018 में, सरकार ने पॉलिटिकल पार्टियों के लिए फंड जुटाने के एक तरीके के तौर पर इलेक्टोरल बॉन्ड शुरू किए, जिससे लोग और कॉर्पोरेशन बिना नाम बताए पैसे डोनेट कर सकते हैं. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रोविजन को अनकॉन्स्टिट्यूशनल (गैर संवैधानिक) बताते हुए रद्द कर दिया था. कहा था कि वोटर्स को ये जानने का अधिकार है कि पॉलिटिकल पार्टियों को कौन फंडिंग कर रहा है.

वहीं इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2009 के बारे में किताब बताती है कि इसे लागू होने के कुछ साल बाद सरकार ने एक क्लॉज़ जोड़ा, जिससे लोगों को इंटरनेट या सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट के लिए जेल हो सकती थी. 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने नए क्लॉज़ को अनकॉन्स्टिट्यूशनल घोषित किया. सरकार को इसे एक्ट से हटाने का निर्देश दिया.

किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का भी जिक्र है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है. बदलाव के साथ किताब के नए संस्करण को 23 फरवरी को मंजूरी मिल चुकी है. पर किताब अभी बाजार में नहीं आई है. ना तो ऑनलाइन और ना ही ऑफलाइन.

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पिछली किताबों में क्या था?

बात करें कि इसी किताब के पिछले संस्करण में क्या था, तो पिछले सेशन की किताबों में न्यायपालिका की कार्यप्रणाली, उसकी संरचना और उनके अधिकारों के बारे में पढ़ाया जाता था. यह भी बताया जाता था कि अदालतों में मामलों के निपटारे में कई साल लग जाते हैं. ‘Justice delayed is justice denied’ यानी ‘न्याय में देरी, न्याय से वंचित करना’ वाली बात भी समझाई गई थी.

फिलहाल नई किताब का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. दूसरी ओर किताब को मंजूरी मिल चुकी है. अब देखना है कि आने वाले वक्त में कोर्ट इस मामले में क्या फैसला लेती है. और कोर्ट के फैसले का नई किताब पर क्या असर होता है. क्या कोर्ट किताब के चेप्टर से कुछ सेक्शन या लाइन हटाने के लिए कहेगी या सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ देगी. 

वीडियो: सुप्रीम कोर्ट पहुंची ममता बनर्जी, सुनवाई के बाद क्या बोले CJI?

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