जम्मू-कश्मीर के वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की MBBS मान्यता रद्द, मुस्लिम छात्रों के एडमिशन पर क्या हुआ?
कॉलेज में एडमिशन ले चुके सभी छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य सरकारी मेडिकल संस्थानों में अलग से सीटें बनाकर एडमिट किया जाएगा.

जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) में MBBS कोर्स की पढ़ाई अब नहीं हो सकेगी. नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) ने कॉलेज में MBBS कोर्स की मान्यता को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है. ये फैसला गंभीर कमियों के आधार पर लिया गया है. जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर में कमी, फैकल्टी की पर्याप्त संख्या ना होना, क्लिनिकल मटेरियल की कमी आदि शामिल हैं.
NMC ने पिछले साल सितंबर में अपनी एक्सपर्ट टीम की विस्तृत जांच के बाद इस कॉलेज को लेटर ऑफ परमिशन (LoP) जारी किया था. जिसके तहत 50 छात्रों को MBBS कोर्स में एडमिशन की अनुमति मिली थी. इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े अरुण शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक इन 50 सीटों के लिए 44 मुस्लिम छात्र NEET मेरिट के आधार पर चुने गए थे.
NMC के आदेश के अनुसार, 2025-26 एकेडमिक ईयर में SMVDIME में एडमिशन ले चुके सभी छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य सरकारी मेडिकल संस्थानों में अलग से सीटें बनाकर एडमिट किया जाएगा. इससे छात्रों का कोई नुकसान नहीं होगा और वो अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे.
NMC द्वारा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को जारी किए गए लेटर के अनुसार, निरीक्षण टीम ने संस्थान की बुनियादी सुविधाओं में कई गंभीर कमियां पाईं. रिपोर्ट में बताया गया कि टीचिंग फैकल्टी में 39 प्रतिशत की कमी है. जबकि ट्यूटर्स, डेमोंस्ट्रेटर्स और सीनियर रेजिडेंट्स की संख्या में 65 प्रतिशत की भारी कमी पाई गई. आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) में मरीजों की संख्या न्यूनतम आवश्यकता से भी 50 प्रतिशत कम रही. वहीं अस्पताल में बेड ऑक्यूपेंसी केवल 45 प्रतिशत दर्ज की गई, जो निर्धारित 80 प्रतिशत के मानक से काफी नीचे है.
ICU में भी औसत बेड ऑक्यूपेंसी लगभग 50 प्रतिशत ही रही. इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति और भी चिंताजनक पाई गई. कई विभागों में छात्रों के लिए प्रैक्टिकल लैबोरेटरी और रिसर्च लैबोरेटरी बिल्कुल उपलब्ध नहीं थीं. लेक्चर थिएटर भी न्यूनतम निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे. लाइब्रेरी की स्थिति सबसे खराब रही, जहां जरूरी किताबों में मात्र 50 प्रतिशत ही उपलब्ध थीं और जर्नल्स की संख्या केवल 2 थी. जबकि न्यूनतम 15 जर्नल्स होने चाहिए. कुल मिलाकर, ये सभी कमियां मेडिकल कॉलेज की शैक्षिक गुणवत्ता और NMC के निर्धारित मानकों के मुताबिक नहीं थे.
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