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सेना के अफसरों की किताबें छपने पर लग सकती है 20 साल की रोक, कैबिनेट मीटिंग में क्या बातें हुईं?

General Naravane book controversy: शुक्रवार, 13 फरवरी को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में जनरल नरवणे की ‘विवादित’ किताब का मुद्दा उठा और कई मंत्रियों का मानना ​​था कि बड़े पदों पर रहने वाले लोगों को रिटायरमेंट के बाद किताब लिखने से पहले कुछ समय का आराम लेना चाहिए. इसके बाद क्या बातें हुईं? सब जानिए

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Naravane book controversy
जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब को लेकर विवाद जारी है. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)
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अर्पित कटियार
14 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 14 फ़रवरी 2026, 01:48 PM IST)
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पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब को लेकर हुए विवाद के बीच सरकार एक नए नियम पर विचार कर रही है (Naravane Book Controversy). इस नियम के मुताबिक, सेना के अफसरों और सरकार के बड़े पदों पर रहे अधिकारियों को रिटायरमेंट के तुरंत बाद किताब छापने की इजाज़त नहीं होगी. अगर यह नियम लागू होता है, तो ऐसे अधिकारियों को 20 साल इंतज़ार (कूलिंग-ऑफ पीरियड) करना पड़ेगा.

हिंदुस्तान टाइम्स ने मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी. अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शुक्रवार, 13 फरवरी को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘विवादित’ किताब का मुद्दा उठा और कई मंत्रियों का मानना ​​था कि बड़े पदों पर रहने वाले लोगों को रिटायरमेंट के बाद किताब लिखने से पहले कुछ समय का आराम लेना चाहिए. 

उन्होंने आगे बताया कि 20 साल के कूलिंग-ऑफ पीरियड पर औपचारिक आदेश जल्द ही जारी होने की संभावना है. मतलब यह कि रिटायर होने के बाद अधिकारी अपने अनुभव, फैसलों या सरकारी कामकाज पर किताब तभी लिख पाएंगे, जब 20 साल गुजर जाएंगे. सरकार का मानना है कि इससे गोपनीय जानकारी, राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकारी फैसलों से जुड़ी संवेदनशील बातें बाहर आने से रोकी जा सकेंगी.

दरअसल, 2 फरवरी 2026 को संसद के बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की ‘अप्रकाशित’ किताब पर आधारित एक पत्रिका में छपे लेख का सदन में जिक्र कर हंगामा मचा दिया था. राहुल गांधी 5 मिनट से भी कम समय तक बोले थे. लेकिन इसी दौरान उनकी स्पीच पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह समेत कई भाजपा सांसदों ने आपत्ति जता दी.

राहुल गांधी ‘कारवां पत्रिका’ में छपे लेख के आधार पर जिस किताब के अंश को कोट कर रहे थे, उसे लेकर सत्ता पक्ष के सांसदों ने उन पर काफी तीखे हमले किए.

राजनाथ सिंह ने पूछा, ‘क्या वह किताब प्रकाशित हो चुकी है जिसमें ये सब बातें लिखी हैं? अगर प्रकाशित हो चुकी है तो उनका उल्लेख करिए. अगर प्रकाशित नहीं हुई है तो उनका जिक्र करना उचित नहीं है.’

राजनाथ सिंह के इस सवाल के बाद दो दिनों के अंदर राहुल गांधी वही किताब लेकर संसद में हाजिर हो गए, जिसके न छपने का दावा बहुत जोर-शोर से राजनाथ सिंह ने किया था. जनरल नरवणे के ‘अप्रकाशित’ संस्मरण 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' की एक प्रति लहराते हुए उन्होंने कहा कि वह इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गिफ्ट में देना चाहते हैं.

इसके बाद, प्रकाशक ‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ ने सोमवार, 9 फरवरी को कहा कि अगर उनकी किताब की कोई भी कॉपी, चाहे पूरी हो या अधूरी, कहीं भी मिलती है, तो वह कॉपीराइट कानून का उल्लंघन है. यह कॉपी छपी हुई हो, डिजिटल हो, PDF हो या किसी और रूप में (ऑनलाइन या ऑफलाइन) सब गैरकानूनी है. प्रकाशक ने कहा कि वह ऐसी कॉपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा.

यह बयान दिल्ली पुलिस द्वारा कुछ घंटे पहले एफआईआर दर्ज करने के बाद आया. पुलिस ने किताब की मैनुस्क्रिप्ट के कथित अवैध प्रसार को लेकर जांच शुरू की है. अगले दिन यानी मंगलवार को जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने पहली बार इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने अपने प्रकाशक के बयान का समर्थन किया और कहा कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है और न ही इसकी कोई कॉपी छपी है, न बेची गई है और न जनता के लिए उपलब्ध कराई गई है.

विवाद का मुख्य कारण किताब में पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी किनारे पर अगस्त 2020 में हुई घटनाओं का विवरण बताया जा रहा है. इसमें यह भी लिखा गया है कि चीन की ओर से उकसावे पर भारतीय सेना को कैसे जवाब देना चाहिए था और उस समय राजनीतिक निर्देशों की कथित कमी क्या थी.

ये भी पढ़ें: एमएम नरवणे की जो किताब छपी ही नहीं वो राहुल गांधी के पास कैसे आई?

दरअसल, यह किताब जनवरी 2024 में प्रकाशित होनी थी. इससे पहले प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) ने दिसंबर 2023 में इसका एक अंश प्रकाशित किया था. लगभग उसी समय नरवणे ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि उनकी किताब “अब उपलब्ध है” और Amazon के प्री-ऑर्डर लिंक का जिक्र किया था.

हालांकि, अग्निवीर योजना पर पीटीआई के प्रकाशित अंश के बाद विवाद बढ़ गया. इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने नरवणे और प्रकाशक को पत्र लिखकर कहा कि किताब को प्रकाशित करने से पहले सेना से मंजूरी ली जाए.

सेना ने किताब को विस्तार से पढ़ा, उस पर अपनी टिप्पणियां दर्ज कीं और अंतिम फैसले के लिए मामला रक्षा मंत्रालय को भेज दिया. फिलहाल, रक्षा मंत्रालय ने पूर्व सेना प्रमुख की इस किताब को अब तक मंजूरी नहीं दी है.

वीडियो: विदेश में बिक रही एमएम नरवणे की 'Four Stars of Destiny' किताब?

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