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हार्ट अटैक आने से पहले मिलेगा अलर्ट, दिल्ली में बनी ये चिप बचाएगी आपकी जिंदगी!

दिल्ली के मिरांडा हाउस कॉलेज ने इसे करीब पांच साल में बनाया है. पहले 2-3 साल रिसर्च चली. फिर पिछले दो साल DRDO के साथ मिलकर इस पर काम किया गया.

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Miranda House, DRDO develop Made-in-India chip that warns soldiers of heart attacks
टीम ने खुद कुछ इंस्ट्रूमेंट्स बनाए, जिससे इसकी कॉस्ट 50-60% कम हो गई. (फोटो- PTI)
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प्रशांत सिंह
30 जनवरी 2026 (अपडेटेड: 30 जनवरी 2026, 08:39 AM IST)
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दिल्ली के मिरांडा हाउस कॉलेज ने DRDO के साथ मिलकर एक ऐसी चिप बनाई है, जो सैनिकों को हार्ट अटैक आने से पहले वॉर्निंग दे देगी. ये ‘मेड इन इंडिया’ डिवाइस उन सैनिकों के लिए काफी काम का है, जो हिमालय जैसी ठंडी जगहों पर ड्यूटी करते हैं. जहां तापमान जीरो से भी नीचे चला जाता है, और ब्लड क्लॉट होने का खतरा ज्यादा रहता है.

खतरे की चेतावनी देगा

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार इस चिप का नाम BioFET है. ये एक छोटा, पोर्टेबल डिवाइस है, जो ब्लड सैंपल से तीन खास बायोमॉलेक्यूल्स (बायोमार्कर्स) को एक साथ चेक करता है. ये तीनों चीजें हार्ट अटैक से सीधे जुड़ी हुई हैं. अगर इनका लेवल तय सीमा से ज्यादा हो जाता है, तो डिवाइस तुरंत खतरे की चेतावनी देता है.

ये डिवाइस ग्लूकोमीटर की तरह काम करता है. सैनिक को बस थोड़ा सा ब्लड सीरम (खून का तरल हिस्सा) चिप पर लगाना होता है. फिर डिवाइस स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाता है. माने ये बताता है कि बायोमार्कर्स का लेवल कितना है और ये सुरक्षित है या नहीं. अगर खतरा दिखता है, तो तुरंत अलर्ट मिल जाता है. इससे डॉक्टर या मेडिकल टीम को जल्दी पता चल जाता है कि सैनिक को बेस कैंप या अस्पताल पहुंचाना जरूरी है.

क्यों है ये इतना जरूरी?

हिमालय के ऊंचे इलाकों में बहुत ज्यादा ठंड पड़ती है. ऐसी स्थिति में शरीर का खून गाढ़ा हो जाता है और क्लॉट (खून का थक्का) बनने की संभावना बढ़ जाती है. इससे अचानक हार्ट अटैक का खतरा बहुत ज्यादा हो जाता है. कई बार सैनिकों की मौत इसी वजह से हो जाती है, क्योंकि समय पर पता नहीं चल पाता.

BioFET चिप से पहले ही खतरा पता चल जाएगा, जिससे इलाज समय पर हो सकेगा और जान बचने के चांस ज्यादा होंगे. ये प्रोजेक्ट करीब पांच साल में पूरा हुआ है. पहले 2-3 साल रिसर्च चली. फिर पिछले दो साल DRDO के साथ मिलकर इस पर काम किया गया. 

प्रोफेसर मोनिका तोमर ने इस टीम को लीड किया. टीम में मिरांडा हाउस के स्टूडेंट्स और फैकल्टी मेंबर्स शामिल थे. साथ ही दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछ अन्य कॉलेजों का भी सहयोग रहा. टीम ने खुद कुछ इंस्ट्रूमेंट्स बनाए, जिससे कॉस्ट 50-60% कम हो गई. पहले ऐसे डिवाइस इंपोर्ट करने पड़ते थे, जो महंगे थे.  

ये छोटा और आसानी से कैरी करने लायक डिवाइस है. अभी ये प्रोटोटाइप स्टेज में है, और DRDO को सौंप दिया गया है, जहां फील्ड ट्रायल्स होंगे. अगर ट्रायल सफल रहे, तो सेना इसे इस्तेमाल कर सकेगी.

प्रोफेसर मोनिका तोमर ने बताया,

"हमारे सैनिक बहुत मुश्किल हालात में काम करते हैं. ठंड में उनका खून गाढ़ा हो जाता है, क्लॉटिंग बढ़ जाती है. BioFET तीन बायोमॉलेक्यूल्स को एक साथ डिटेक्ट करता है. अगर लेवल ज्यादा हो, तो खतरे की वॉर्निंग देता है."

उन्होंने कहा कि ये काम काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब ये डिवाइस तैयार है.

ये डेवलपमेंट भारत के लिए गर्व की बात है. शिक्षा और डिफेंस का साथ मिलकर ऐसा टेक्नोलॉजी बनाना दिखाता है कि हम सेल्फ-रिलायंट बन रहे हैं. सैनिकों की सुरक्षा के लिए ये चिप बहुत बड़ी उम्मीद है. अगर इसके ट्रायल्स सफल रहे, तो न सिर्फ सेना बल्कि भविष्य में आम लोगों के लिए भी हार्ट अटैक की जल्दी जांच का आसान तरीका मिल जाएगा.

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