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मेटा का थर्ड पार्टी फैक्ट चेकिंग प्रोग्राम बंद, जकरबर्ग ने बताया अब कैसे पकड़ेंगे फेक न्यूज

कंपनी ने इसे ‘कम्युनिटी नोट्स’ प्रोग्राम से रिप्लेस करने का प्लान बनाया है. ये प्रोग्राम यूजर्स द्वारा ही लिखे जाएंगे, वैसे ही जैसे एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर होता है.

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Meta replaces fact checking programme with X style community notes
मार्क ज़करबर्ग ने बताया कि फैक्ट-चेकर्स को हटाने का मेटा का फैसला राजनीतिक पूर्वाग्रह की चिंताओं के कारण लिया गया है. (फोटो- X)
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प्रशांत सिंह
7 जनवरी 2025 (पब्लिश्ड: 11:19 PM IST)
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फेसबुक और इंस्टाग्राम चलाने वाली Meta के CEO Mark Zuckerberg ने बताया है कि वो अपने थर्ड पार्टी फैक्ट चेकिंग प्रोग्राम को बंद कर रहे हैं. कंपनी ने इसे ‘कम्युनिटी नोट्स’ प्रोग्राम से रिप्लेस करने का प्लान बनाया है. ये प्रोग्राम यूजर्स द्वारा ही लिखे जाएंगे, वैसे ही जैसे एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर होता है. फैक्ट चेकिंग प्रोग्राम को हटाने की शुरुआत अमेरिका से होगी.

मार्क जकरबर्ग ने एक वीडियो जारी कर कहा कि मेटा ने ये फैसला इसलिए लिया है क्योंकि एक्सपर्ट फैक्ट चेकर्स की अपनी कुछ खामियां हैं और वे किसी एक पक्ष की तरफ झुक सकते हैं. इस कारण बहुत अधिक कॉन्टेंट फैक्ट चेकिंग के दायरे में आ जाते हैं. कंपनी ने कहा है कि ये अब कम्युनिटी नोट्स मॉडल पर केंद्रित होगा.

एक वीडियो मैसेज में मेटा के मालिक मार्क ज़करबर्ग ने बताया कि फैक्ट-चेकर्स को हटाने का मेटा का फैसला राजनीतिक पूर्वाग्रह की चिंताओं के कारण लिया गया है. उन्होंने कहा,

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दी हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कापलान ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा,

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वहीं ज़करबर्ग ने कहा कि कंपनी अपनी 'जड़ों' की ओर वापस जा रही है और गलतियों को कम करने, अपनी नीतियों को सरल बनाने और अपने प्लेटफॉर्म पर फ्री एक्सप्रेशन का ऑप्शन ला रही है. ये बदलाव Facebook, Instagram और Threads पर दिखाई देंगे.

मेटा के इस फैसले पर IFCN के हेड एंजी ड्रोबनिक होलान का बयान भी सामने आया है. एंजी ने कहा है कि इस फैसले से उन सोशल मीडिया यूजर्स को नुकसान होगा जो अपने रोजमर्रा के जीवन और दोस्तों और परिवार के साथ बातचीत के बारे में निर्णय लेने के लिए सटीक, विश्वसनीय जानकारी की तलाश में हैं. उन्होंने कहा,

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एंजी ने आगे कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि ये निर्णय एक नए प्रशासन और उसके समर्थकों के अत्यधिक राजनीतिक दबाव के बीच आया है. फैक्ट चेकर्स अपने काम में पक्षपाती नहीं हैं. ये हमला उन लोगों की ओर से आया है जो ये चाहते हैं कि उन्हें बिना किसी खंडन या विरोधाभास के झूठ बोलने से ना रोका जाए.

वीडियो: Meta ने अपनी रिपोर्ट में क्यों कह दिया, 'Mark Zuckerberg की मौत हो सकती है'

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