'गर्मी में अनशन करूंगा, मर गया तो देवेंद्र फडणवीस जिम्मेदार', मराठा आरक्षण पर मनोज जरांगे का ऐलान
Manoj Jarange Hunger strike: मराठा आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे ने 30 मई से आमरण अनशन शुरू करने की घोषणा की है. उन्होंने ये जालाना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा. और बताया कि ये उनका नौंवा आममरण होगा.

“हीट स्ट्रोक से मेरी मौत हुई तो सीएम देवेंद्र फडणवीस जिम्मेदार होंगे.” मराठा आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे ने जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ये बात कही. ऐलान किया कि वे 30 मई से आमरण अनशन पर बैठने वाले हैं. ये उनका नौवां आमरण अनशन होगा.
मनोज जरांगे का कहना है कि उनकी मांगों को जब तक नहीं मान लिया जाता, वे भूखे-प्यासे अनशन पर बैठे रहेंगे. उन्होंने मराठा आरक्षण और समाज की अन्य लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार को 28 मई तक का समय दिया था. आज 28 मई है. अब तक सरकार की तरफ से कोई निर्णय ना लिए जाने के कारण उन्होंने आंदोलन करने का फैसला लिया है. वो भी झुलसाने वाली गर्मी में.
सरकार पर लगाया अनदेखी का आरोपइंडिया टुडे से जुड़े गौरव साली की रिपोर्ट के मुताबिक, जरांगे ने साफ कहा है कि वे गर्मी (भीषण गर्मी) में खुले आसमान के नीचे चारपाई डालकर बैठेंगे. ना ही तो पानी पिएंगे, ना खाना खाएंगे, ना ही पैरों में चप्पल पहनेंगे और पंखे या कोई अन्य सुविधा भी नहीं लेंगे. और अगर उन्हें हीट स्ट्रोक से कुछ हुआ, तो उसकी जिम्मेदार सरकार और देवेंद्र फडणवीस की होगी. नेता मनोज का कहना है कि वे अपने शरीर की चिंता किए बिना समाज के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं.
मनोज जरांगे ने मीडिया से कहा कि उन्होंने सरकार को उम्मीद से ज्यादा समय दिया. लेकिन समाज को न्याय नहीं मिला. अगर सरकार को मराठा समाज की सच में चिंता होती, तो अब तक आरक्षण दे दिया गया होता.
'आंदोलन शांतिपूर्ण मगर निर्णायक'मराठा नेता ने समाज के लोगों से अपील करते हुए कहा है कि उन्हें बड़ी संख्या में अंतरवाली सराटी आने की जरूरत नहीं है. आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक होगा. उन्होंने दोहराया कि उन्हें सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि मराठा समाज की सभी मांगों का पूर्ण अमल चाहिए. आगे उन्होंने कहा, “या तो सरकार टूटेगी, या फिर मेरा शरीर.”
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क्या हैं मांगे?मनोज जरांगे ने सरकार के सामने मराठा समाज की कई प्रमुख मांगें रखीं. इनमें सातारा, कोल्हापुर, औंध और पुणे संस्थान के गजेटियर पर जीआर जारी करने, हैदराबाद गजेटियर के आधार पर कुणबी प्रमाणपत्र वितरण करने, 58 लाख कुणबी नोंदियों को प्रमाणपत्र देने, मराठा आंदोलकों पर दर्ज सभी मामले वापस लेना शामिल हैं.
साथ ही सारथी और महामंडल की बंद योजनाएं फिर शुरू करने, लंबित छात्रवृत्ति राशि जारी करने, आंदोलन में बलिदान देने वाले परिवारों को महावितरण और MIDC में नौकरी देने, शिंदे समिति को एक साल का एक्सटेंशन देने और मराठा-कुणबी के लिए अलग मंत्रालय स्थापित करने जैसी मांगें शामिल हैं.
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