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संसद में महुआ मोइत्रा ने जज लोया की मौत का जिक्र कर हंगामा मचा दिया, कार्रवाई की चेतावनी मिल गई

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि टीएमसी सांसद ने जज लोया के बारे में जो कहा वह बहुत गंभीर विषय है. उन्होंने महुआ मोइत्रा के खिलाफ संसदीय कार्रवाई की चेतावनी दी है.

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13 दिसंबर 2024 (पब्लिश्ड: 10:31 PM IST)
mahua moitra on judge loya
संसद में महुआ मोइत्रा के बयान पर जमकर हंगामा. (फोटो- पीटीआई)
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तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने 13 दिसंबर को लोकसभा में दिवंगत जज बृजगोपाल हरकिशन लोया (Judge BH Loya) की मौत का जिक्र कर संसद में भारी हंगामा मचा दिया. लोकसभा की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी. केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मोइत्रा ने कहा कि जज लोया अपने ‘समय से बहुत पहले दुनिया से विदा हो गए’. इसके अलावा उन्होंने इशारों में पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात का भी जिक्र किया. इन टिप्पणियों के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ ‘संसदीय कार्रवाई’ की चेतावनी दे डाली.

जज लोया का नाम लेकर क्या बोलीं मोइत्रा?

13 दिसंबर को संसद में 'भारतीय संविधान की 75 सालों की यात्रा' पर चर्चा हो रही थी. इसी चर्चा के दौरान महुआ मोइत्रा ने केंद्र सरकार पर पिछले 10 सालों में 'संविधान को नुकसान पहुंचाने' का आरोप लगाया. अपने भाषण में आगे बढ़ते हुए उन्होंने न्यायपालिका पर भी सवाल उठाया. TMC सांसद ने पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ का नाम लिए बिना कहा, 

"मुझे नहीं लगता कि हमारे संविधान निर्माताओं ने कभी सोचा होगा कि जज किसी फैसले को लिखने के लिए कानून और संविधान के तर्कों को छोड़कर भगवान के साथ निजी बातचीत पर भरोसा करेंगे. आज सुबह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिवंगत जस्टिस एचआर खन्ना के साहस का जिक्र किया, जिन्होंने 1976 के फैसले में असहमति जताई थी. मैं सभी को याद दिलाना चाहती हूं कि जस्टिस खन्ना 1976 के बाद भी 32 साल तक रहे, जब अधिकतर समय कांग्रेस की सरकार थी. उन्होंने अपनी आत्मकथा भी लिखी. इसके उलट, जज लोया अपने समय से बहुत पहले इस दुनिया से विदा हो गए."

जस्टिस खन्ना ने आपातकाल का किया था विरोध

जस्टिस एचआर खन्ना 1976 में उस बेंच का हिस्सा थे, जिसने आपातकाल की स्थिति में मौलिक अधिकारों के निलंबन को सही माना था. हालांकि, पांच सदस्यों वाली बेंच में सिर्फ जस्टिस खन्ना ने ही इस फैसले पर आपत्ति जताई थी. बहुमत के फैसले से असहमति जताते हुए उन्होंने कहा था कि आपातकाल के दौरान भी संविधान के अनुच्छेद-21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) को सस्पेंड नहीं किया जा सकता है. इस फैसले के कुछ महीनों बाद वे चीफ जस्टिस बनने वाले थे. लेकिन जनवरी 1977 में जब सबसे सीनियर जज होने के बावजूद उन्हें सीजेआई नहीं बनाया गया. इसके विरोध में जस्टिस खन्ना ने इस्तीफा दे दिया था.

जज बीएच लोया की मौत पर उठे थे सवाल

सीबीआई जज बीएच लोया की 1 दिसंबर, 2014 को मौत हो गई थी. उस दौरान वे गुजरात के चर्चित सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस की सुनवाई कर रहे थे. जज लोया अपने सहयोगी जज की बेटी की शादी में शामिल होने नागपुर गए थे. बताया गया कि वहीं पर हार्ट अटैक के कारण उनकी संदिग्ध मौत हो गई थी. लेकिन इस मौत को लेकर कई सवाल उठे थे.

बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में जज लोया की मौत की स्वतंत्र जांच करवाने की मांग करते हुए एक याचिका डाली थी. अप्रैल, 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था. शीर्ष अदालत ने कहा था कि मौत के समय जज लोया के साथ मौजूद जूडिशियल अधिकारियों पर भरोसा न करने का कोई आधार नहीं है. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि याचिकाओं में कोई मेरिट नहीं है और डॉक्यूमेंट्स से पता चलता है कि जज लोया की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है.

महुआ के बयान पर घमासान

महुआ मोइत्रा के इस बयान पर बीजेपी सांसदों ने आपत्ति जताई. गोड्डा से लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि जज बीएच लोया की मौत का जिक्र तृणमूल कांग्रेस सांसद ने किया है, उनकी असामयिक मौत की पुष्टि दूसरे जजों ने भी की थी.

वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि टीएमसी सांसद ने जज लोया के बारे में जो कहा वह बहुत गंभीर विषय है. उन्होंने कहा, 

"यह एक सेटल्ड (खत्म हो चुका) केस है. जजों के बीच दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई. इसमें किसी के कोई हस्तक्षेप या लिंक का सवाल ही नहीं उठता."

रिजिजू ने आगे कहा कि सांसद (महुआ मोइत्रा) ने जिस तरह का बयान दिया है, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने ये भी कहा, “इस तरह की टिप्पणी करके आप बच नहीं सकते. आप एक बहुत गलत परंपरा बना रही हैं.”

केंद्रीय मंत्री के बयान के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि वे इस पर रिकॉर्ड मंगाकर देखेंगे.

हालांकि, मंत्री के बयान पर तृणमूल कांग्रेस समेत विपक्षी सांसद हंगामा करने लगे. उधर, बीजेपी सांसद भी महुआ के बयान पर शोर कर रहे थे. इस कारण लोकसभा की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई.

महुआ मोइत्रा ने अपने भाषण के दौरान बीजेपी शासित राज्यों में मुसलमानों के खिलाफ अत्याचार का आरोप भी लगाया. कहा कि ये सरकारें बिना कानूनी प्रक्रिया के उनके घरों को गिराकर 'बुलडोजर जस्टिस' का कॉम्पिटिशन कर रही हैं.

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