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नकली पनीर बेचो, पर देते समय ग्राहक को बता दो..., फूड डिपार्टमेंट ने जारी किए निर्देश, 1 मई से लागू

Maharashtra के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने एक निर्देश जारी किया है, जिसके तहत रेस्टोरेंट और फास्ट फूड आउटलेट्स को यह बताना जरूरी होगा कि वे असली पनीर का इस्तेमाल कर रहे हैं या नकली पनीर का. दोनों में क्या अंतर होता है यह भी जान लीजिए.

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23 अप्रैल 2026 (अपडेटेड: 23 अप्रैल 2026, 02:38 PM IST)
maharashtra Paneer Fraud,  new rule for cheese analogue
अब ‘नकली’ पनीर को असली पनीर बताकर नहीं बेचा जा सकेगा. (सांकेतिक फोटो: आजतक)
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महाराष्ट्र में अब ‘नकली’ पनीर को असली पनीर या चीज बताकर नहीं बेचा जा सकेगा. राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने रेस्टोरेंट्स और फास्ट फूड आउटलेट्स को निर्देश जारी किए हैं. ये नए नियम 1 मई से लागू होंगे. नियमों के मुताबिक, अब मेनू, डिस्प्ले बोर्ड और यहां तक कि बिल पर भी यह साफ-साफ लिखा होना चाहिए कि किसी डिश में ‘चीज एनालॉग’ का इस्तेमाल किया गया है या ‘पनीर' का.

दोनों में क्या अंतर होता है यह भी जान लीजिए.

चीज एनालॉग (Cheese Analogue) को ‘नकली पनीर’ भी कहते हैं. एनालॉग का मतलब ही नकल होता है. यह दूध/डेयरी वसा के बजाय वनस्पति तेल (जैसे पाम ऑयल), प्रोटीन और अन्य रसायनों से बना एक सस्ता प्रोडेक्ट होता है. यह स्वाद और बनावट में असली पनीर जैसा लगता है, लेकिन इसे फास्ट फूड, पिज्जा और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में लागत कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

महाराष्ट्र राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के फूड सेफ्टी कमीश्नर श्रीधर दुबे-पाटिल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि एनालॉग पनीर नहीं है. यह वेजिटेबल फैट, स्टार्च, इमल्सीफायर और दूसरी चीजों से बनता है. दूसरी तरफ, पनीर खास तौर पर दूध से बना प्रोडक्ट है. उन्होंने बताया,

“पनीर गर्म करने पर नहीं उबलता, जबकि एनालॉग उबलता है, क्योंकि यह तेल से बना होता है. FSSAI के स्टैंडर्ड्स के मुताबिक, इसे ‘चीज एनालॉग’ की कैटेगरी में रखा गया है.”

उन्होंने साफ किया कि दोनों ही खाने लायक हैं, लेकिन उनके पोषक तत्वों में फर्क होता है. श्रीधर दुबे ने बताया, 

“एनालॉग पनीर जहरीला नहीं है. यह भी एक खाने की चीज ही है. जहां पनीर प्रोटीन, कैल्शियम, फैट और दूसरे पोषक तत्वों का एक बढ़िया जरिया है, वहीं एनालॉग में तेल होता है और इसमें ट्रांस फैट ज्यादा होता है. सबसे जरूरी बात यह है कि लोगों को पता होना चाहिए कि वे क्या खा रहे हैं. चाहे वह एनालॉग चीज हो या असली पनीर."

ये भी पढ़ें: नोएडा के पनीर प्रेमियों सावधान, दूसरे शहर से आ रहा था नकली पनीर, फैक्ट्री से 1400 किलो जब्त

उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम लोगों में जानकारी की कमी की वजह से उठाया गया है. उन्होंने कहा कि लोग रेस्टोरेंट जाते हैं, पनीर ऑर्डर करते हैं और यह सोचकर एनालॉग चीज खा लेते हैं कि यह असली पनीर है.

FDA ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा कि जो रेस्टोरेंट/केटरर/होटल/फास्ट फूड विक्रेता अपने खाने में ‘चीज एनालॉग’ या ‘पनीर’ का इस्तेमाल करते हैं. उन्हें बिल, मेनू और अपनी जगह पर लगे डिस्प्ले बोर्ड/इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड पर इस बात का जिक्र करना होगा.

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