Ground Report: महाकुंभ की वजह से वाराणसी में जाम का झाम, स्कूल बंद, पैदल भी नहीं निकल पा रहे लोग
Mahakumbh 2025: महाकुंभ की तस्वीरों के इतर अगर Varanasi की तस्वीरों पर नज़र डालेंगे तो नज़ारा महाकुंभ से कम का नहीं लगेगा. वैसे तो वाराणसी की कुल आबादी 15 लाख ही है. लेकिन यहां बाहरी श्रद्धालुओं की संख्या 30 लाख तक पहुंचने का अंदाज़ा लगाया जा रहा है. भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है. इतना ही नहीं, 8वीं तक के स्कूलों को भी बंद कर दिया गया है.

प्रयागराज (Prayagraj) में 13 जनवरी से शुरू हुए महाकुंभ (Mahakumbh) का असर आसपास के शहरों में भी दिख रहा है. महाकुंभ में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे श्रद्धालु सिर्फ प्रयागराज तक ही सीमित नहीं हैं. वे अयोध्या और वाराणसी भी पहुंच रहे हैं. इन शहरों में भारी भीड़ अपने पूरे शबाब पर है. इन शहरों को भी उन दिक्कतों से दो-चार होना पड़ रहा है जो दिक्कतें प्रयागराज में हैं. मिसाल के तौरपर जाम से जूझना, खाने की चीज़ों का कई गुना कीमत पर मिलना और शहर में ज़रूरत की चीज़ों का नहीं पहुंच पाना. बनारस में इन्हीं दिक्कतों का जायज़ा लेती एक ग्राउंड रिपोर्ट के बारे में आपको बताते हैंः
महाकुंभ की तस्वीरों के इतर अगर बनारस की तस्वीरों पर नज़र डालेंगे तो नज़ारा महाकुंभ से कम का नहीं लगेगा. वैसे तो वाराणसी की कुल आबादी 15 लाख ही है. लेकिन यहां बाहरी श्रद्धालुओं की संख्या 30 लाख तक पहुंचने का अंदाज़ा लगाया जा रहा है. भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है. इतना ही नहीं, 8वीं तक के स्कूलों को भी बंद कर दिया गया है.

जगह-जगह भीड़ और जाम जैसे आम-सी बात हो गई है. रिक्शा और ई-रिक्शा वाले सवारियों से मनमाने किराया मांग रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले प्रदीप बनारस पहुंने वाले श्रद्धालुओं में से एक हैं. वह शहर के भैसासुर घाट से लोहटिया तक अपने साथी के साथ रिक्शा पर बैठकर आए. यहां रिक्शाचालक ने उनसे 120 रुपये मांगे. पैसे न देने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं था. उनका कहना है कि देश के सभी बड़े धार्मिक स्थलों का यही हाल है.
शहर के बुलानाला इलाके में एक सिगड़ी पर फल खरीद रहे श्रद्धालु विक्रम ने बताया कि उन्हें 80 रुपये दर्जन के भाव से केला खरीदना पड़ा, जो काफी महंगा है. वहीं फल विक्रेता ने बताया कि महंगा लाकर महंगा ही बेचा जा रहा है. जब उससे पूछा गया कि शहर के बाकी हिस्सों में जहां श्रद्धालु की भीड़ नहीं है वहां कैसे सही रेट में फल बिक रहे हैं तो उसने कुछ भी कहने से मना कर दिया.

शहर के लोहटिया इलाके के व्यापारी सुनील और संदीप ने बताया कि इन दिनों गज़ब की लूट मची हुई है. सबसे ज्यादा रिक्शा और ई-रिक्शा वाले पैसे वसूल रहे है. मैदागिन से कैंट जाने का आम दिनों में जो किराया 15 रुपये हुआ करता था लेकिन अब 100-100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं. मारवाड़ी अस्पताल में इलाज कराने आई बेनियाबाग की रहने वाली प्रीति शर्मा ने बताया,
पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर रोक की वजह से रोज़ उन्हें अस्पताल पैदल ही जाना पड़ रहा है. इसकी वजह से उनके जैसे कई मरीज़ों को काफी तकलीफ हो रही है. प्रशासन को इसके बारे में सोचना चाहिए.
पेशे से वकील श्रीपति मिश्रा का कहना है,
शहर की भीड़ को देखते हुए मैंने अपने दो पहिया वाहन को पार्क कर दिए हैं. पैदल ही किसी साधन को पकड़कर कचहरी के लिए निकलना पड़ रहा है क्योंकि शहर में भारी भीड़ की वजह से आबोहवा पूरा तरह से दूषित हो चुकी है.

वहीं, बुलानाला इलाके के व्यापारी प्रदीप गुप्ता ने भी बताया कि रिक्शा और ऑटो वालों ने बहुत लूट मचाई हुई है. इसकी वजह से न तो उनकी दुकान पर कस्टमर आ पा रहे हैं और न ही वे लोग कहीं जा पा रहे हैं. जिसे देखो वही अनाप-शनाप रेट वसूल रहा है. चश्मा कारोबारी सुनील जायसवाल ने बताया कि पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेडिंग की हुई है. इसकी वजह से उनकी दुकान तक भी लोग नहीं पहुंच पा रहे हैं.
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बड़ा गणेश मंदिर के महंत राजेश तिवारी ने बताया कि शादियों का सीज़न चल रहा है. लेकिन शहर में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए परिवार के साथ कहीं निकलना तो दूर अकेले भी निकलने के पहले सोचना पड़ रहा है. रिक्शा वाले हों, ऑटो वाले या फिर खाने का सामान बेचने वाले सभी ने खूब लूट मचा रखी है.
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