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सौ साल पुराने मंदिर के पास चर्च बनाने की मांग थी, HC ने 'बुरी नीयत की आशंका' बोल खारिज कर दी

मद्रास हाई कोर्ट ने मरियम्मन मंदिर के पास एक बड़ा चर्च बनाने की मांग पर रोक लगा दी है. मंदिर करीब 100 साल से भी ज्यादा पुराना है, जहां चर्च बनाने की मांग की गई है. कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि ‘अगर मंदिर के पास एक बड़ा चर्च बनाने का प्रस्ताव है, तो बुरी नीयत की आशंका से बिल्कुल इनकार नहीं किया जा सकता है’.

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18 जून 2026 (पब्लिश्ड: 10:58 PM IST)
Madras High Court
मद्रास हाई कोर्ट ने मरियम्मन मंदिर के पास चर्च बनाने पर रोक लगाया. (फोटो- इंडिया टुडे)
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मद्रास हाई कोर्ट ने मरियम्मन मंदिर के पास एक बड़ा चर्च बनाने की मांग पर रोक लगा दी है. मंदिर करीब 100 साल से भी ज्यादा पुराना है, जहां चर्च बनाने की मांग की गई है. कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि ‘अगर मंदिर के पास एक बड़ा चर्च बनाने का प्रस्ताव है, तो बुरी नीयत की आशंका से बिल्कुल इनकार नहीं किया जा सकता है’. 

मरियम्मन मंदिर के पास चर्च बनने से रोकने के लिए कोयंबटूर के कलापट्टी के रहने वाले बालासुब्रमण्यम N ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. मामले की सुनवाई जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और वी लक्ष्मीनारायण की बेंच कर रही थी. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों जजों ने बीती 29 मई को इस मामले में एक अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा था,

‘कोयंबटूर सांप्रदायिक तौर पर संवेदनशील शहर है. इसने बम धमाके और खूनी धार्मिक दंगे देखे हैं. प्रस्तावित चर्च मौजूदा मरियम्मन मंदिर के बहुत पास बनेगा. इलाके में कुछ ईसाई परिवार हैं. ऐसे में अगर मरियम्मन मंदिर के पास एक बड़ा चर्चा बनने का प्रस्ताव है, तो बुरी नीयत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है.’

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि जिस इलाके में चर्च बनाने की मांग की गई है, वहां हिंदुओं की आबादी बहुत ज्यादा है. उन्होंने मंदिर के पास चर्च बनाने का विरोध भी किया है. बेंच ने कहा, 

‘जब हिंदुओं की बहुत बड़ी आबादी हो और वे मंदिर के ठीक पास चर्च बनाने का विरोध करें, तो अधिकारियों को इस आपत्ति को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए.’

हाल ही में तमिलनाडु में विधानसभा के चुनाव हुए हैं. सी जोसेफ उर्फ थलपति विजय नए मुख्यमंत्री बने हैं. हाई कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि याचिकाकर्ता ने सूबे की सरकार में बदलाव होने के बाद मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की थी.

याचिकाकर्ता की ओर से 5 वकील पेश हुए थे. उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य में नई सरकार के आने के बाद से ही कुछ कट्टरपंथी संगठन काफी उत्साहित हो गए हैं. कोर्ट में बहस के दौरान वकीलों ने विधानसभा में स्पीकर जेसीडी प्रभाकर के बाइबल की लाइन पढ़ने, उदयनिधि स्टालिन की ‘सनातन धर्म के विनाश’ की बात वाली टिप्पणी और तमिलनाडु के कुछ गांवों में चर्च बनाने की मांग वाले पोस्टरों का भी जिक्र किया.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी पाया कि 100 साल से भी ज्यादा पुराना मरियम्मन मंदिर सर्वे नंबर 155/1 में स्थित है, जबकि, चर्च को बनाने के लिए सर्वे नंबर 155/2 पर चर्च बनाने की मंजूरी दी गई थी. हालांकि, साल 2010 में इलाके में रहने वाले हिंदुओं ने इसका विरोध किया था. जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और वी लक्ष्मीनारायण की बेंच ने रेवेन्यू रिकॉर्ड के सर्वे नंबर को भी देखा. इस दौरान 155/2 को एक पक्की सड़क के तौर पर दिखाया गया था. 

इस पर कोर्ट ने कहा, 

‘जब रेवेन्यू रिकॉर्ड यह दिखा रहे हैं कि यह एक सार्वजनिक सड़क है, तो ये किसी निजी संस्था को नहीं मिल सकती है.’

कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक स्थिति में बदलाव होने से कानूनी स्थिति नहीं बदल जाती. कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि अगर इस मामले में अंतरिम आदेश नहीं दिया गया, तो ‘सामाजिक सद्भाव को काफी नुकसान’ होगा.

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