नोएडा के युवक पर डकैती का आरोप था, कबूल किया तो जज ने जेल की जगह बेल दे दी
9 जून को इस मामले की वापस सुनवाई हो रही थी. मामले की सुनवाई एडिशनल सेशंस जज सोमप्रभा मिश्रा की बेंच कर रही थी. तमाम सबूतों-गवाहों और रिहान के बयान के बाद वो दोषी पाया गया. जज ने उसे 8 साल की और सजा सुनाई.

नोएडा में एक शख्स ने करीब 16 साल जेल में बिताने के बाद अपना जुर्म कबूल किया. ऐसा उसने जेल से बाहर आने के लिए किया. साल 2010 में शख्स पर डकैती के आरोप के बाद केस दर्ज किया गया था. लेकिन केस का ट्रायल पूरा नहीं हुआ. ऐसे में आरोपी ने अपनी रिहाई के लिए अपना जुर्म ही कबूल कर लिया. कार्यवाही में तेजी आई और शख्स को और 8 साल की सजा सुनाई गई. लेकिन उसे जेल में नहीं रहना पड़ेगा. क्योंकि, दोषी ने निर्धारित कानून से ज्यादा समय जेल में बिता लिया है.
आरोपी की पहचान गौतम बुद्ध नगर के निवासी रिहान के तौर पर हुई है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी गिरफ्तारी के बाद से ही रिहान ने पूरा समय जेल में काटा. इस दौरान उसने न ही अपना जुर्म कबूल किया और न ही रिहाई की याचिका दायर की. डकैती के केस में रिहान ने पहली बार साल 2024 में गवाही दी.
मंगलवार, 9 जून को इस मामले की वापस सुनवाई हो रही थी. मामले की सुनवाई एडिशनल सेशंस जज सोमप्रभा मिश्रा की बेंच कर रही थी. तमाम सबूतों-गवाहों और रिहान के बयान के बाद वो दोषी पाया गया. जज ने उसे 8 साल की और सजा सुनाई. अपने बचाव में रिहान ने खुद को गरीब बताया और कहा कि उसका पक्ष रखने वाला भी कोई नहीं है. ऐसे में उसे कम से कम सजा दी जाए. क्योंकि, उसने अपराध के लिए तय सीमा से ज्यादा सजा काट ली है.
जज सोमप्रभा ने फैसला सुनाते हुए रिहान पर 10 हजार का जुर्माना लगाया. और कहा कि जुर्माना न भरने पर दोषी को एक महीने की और सजा काटनी होगी. हालांकि, ये उसके पहले से बिताए जेल के समय में ‘एडजस्ट’ कर दिया जाएगा. यानी, अब 16 साल जेल में बिताने के बाद रिहान आजाद होगा.
मामला क्या था?27 जुलाई 2010 में रिहान ने कथित तौर पर अपने साथियों के साथ मिलकर नोएडा के सेक्टर 41 में एक घर में डकैती की. इसमें उसने 21 हजार के गहने, 22 हजार कैश, ड्राइविंग लाइसेंस समेत कई अन्य चीजें लूटी थीं. डकैती के आरोप में उसके खिलाफ सेक्टर 39 पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 395 के तहत केस दर्ज किया गया.
पुलिस ने मामले की जांच पूरी की और चार्जशीट दाखिल कर दी. बाद में केस को साल 2015 में सेशंस कोर्ट में भेजा गया. रिपोर्ट के मुताबिक, 11 सालों में ये केस करीब 12 कोर्ट्स में ट्रांसफर किया गया. अपनी आखिरी सुनवाई के पहले इस केस की 157 बार सुनवाई हुई.
आरोपों से किया इनकारशुरुआती दिनों में रिहान ने आरोपों से साफ इनकार कर दिया था, जिसके बाद केस का ट्रायल शुरू हुआ. बाद में शिकायतकर्ता नजबुल हसन ने साल 2024 ने अभियोजन पक्ष की ओर से अपना बयान दिया. इसके बाद रिहान ने भी अपना जुर्म कबूल कर लिया.
कोर्ट की कार्यवाही के दौरान अभियोजन पक्ष ने सभी सबूत पेश किए. रिहान ने भी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना बयान दर्ज कराया. केस की सुनवाई कर रहे सेशंस जज सोमप्रभा मिश्रा ने कहा कि रिहान के खिलाफ आरोपों की पुष्टि शिकायतकर्ता की गवाही और उसके खुद के कबूलनामे के बाद ही हुई है. जज ने रिहान को IPC की धारा 395 के तहत सजा सुनाई. हालांकि, उसने पहले ही जरूरत से ज्यादा सजा काट ली है.
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