'4 मिनट में 52 बार सॉरी बोला... प्रिंसिपल ने धमकाया', कक्षा 8 का स्टूडेंट स्कूल की इमारत से कूद गया
Madhya Pradesh: छात्र ने बाद में बताया कि प्रिंसिपल ने कथित तौर पर ‘उसका करियर खत्म करने’ की धमकी दी थी. ऑफिस के अंदर, लगभग चार मिनट तक वह अपनी गलती के लिए बार-बार माफी मांगता रहा और उसने 52 बार ‘सॉरी’ कहा.

मध्य प्रदेश के रतलाम में कक्षा 8 के एक छात्र ने स्कूल की तीसरी मंजिल से कूदकर सुसाइड करने की कोशिश की. गंभीर रूप से घायल लड़के को एक प्राइवेट अस्पताल में ले जाया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है. घटना के CCTV फुटेज में छात्र को प्रिंसिपल ऑफिस में जाते हुए देखा जा सकता है, जहां उसने लगभग चार मिनट तक बार-बार माफी मांगी और डर और परेशानी में 52 बार ‘सॉरी’ कहा.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरा मामला रतलाम में डोंगरे नगर के एक प्राइवेट स्कूल का है. 14 साल का छात्र नेशनल-लेवल स्केटिंग है और अब तक छह राष्ट्रीय पदक जीत चुका है. उसे 4 दिसंबर 2025 को विशाखापत्तनम में होने वाले एक और नेशनल कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेना था.
शुरुआती जांच से पता चला है कि दो दिन पहले यानी गुरुवार, 27 नवंबर को छात्र ने क्लास का एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, जो वायरल हो गया. घटना के बाद बच्चे के माता-पिता को स्कूल बुलाया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, ऑफिस के अंदर, वह लगभग चार मिनट तक अपनी गलती के लिए बार-बार माफी मांगता रहा और उसने 52 बार ‘सॉरी’ कहा.
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, लड़के ने बाद में बताया कि प्रिंसिपल ने कथित तौर पर ‘उसका करियर खत्म करने’, उसे सस्पेंड करने और ‘उसके मेडल छीन लेने’ की धमकी दी थी. कुछ ही देर बाद, छात्र को ऑफिस से बाहर निकलकर गलियारे से बेतहाशा भागते और स्कूल की छत से छलांग लगाते हुए देखा गया. यह घटना स्कूल के कॉरिडोर में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई.
हैरानी की बात यह है कि उस वक्त छात्र के पिता स्कूल के वेटिंग रूम में बैठे थे और उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मीटर की दूरी पर क्या हो रहा है. कूदने के बाद, उसे पहले पास के CHL अस्पताल में भर्ती कराया गया. लेकिन बाद में चोटों की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे गीतादेवी अस्पताल रेफर कर दिया. जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है.
मुख्य पुलिस अधीक्षक (CSP) रतलाम, सत्येंद्र घनघोरिया ने बताया है कि पुलिस घटना की जांच कर रही है. जिला शिक्षा अधिकारी अनीता सागर ने कहा,
'जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई की जाएगी. हमने पुलिस को जांच के लिए पत्र लिखा है. छात्र का परिवार स्कूल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है.
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एक महीने में ऐसा तीसरा मामलायह पहला ऐसा मामला नहीं है, जब स्कूल के कथित दबाव, प्रताड़ना और अनदेखी के चलते किसी छात्र ने इस तरह का कोई कदम उठाया हो. इससे पहले, 1 नवंबर को जयपुर के एक प्राइवेट स्कूल में क्लास 6th में पढ़ने वाली 9 साल की बच्ची ने अपनी जान दे दी थी. CBSE की जांच रिपोर्ट में पता चला कि छात्रा डेढ़ साल से मानसिक प्रताड़ना (बुलिंग) झेल रही थी. क्लासमेट्स छात्रा के साथ गाली-गलौज तक किया करते थे. लेकिन टीचर या स्कूल ने कोई एक्शन नहीं लिया.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि घटना वाले दिन आखिरी 45 मिनट में वह क्लास टीचर के पास 5 बार मदद मांगने गई. लेकिन उसे मदद नहीं मिली, जिसके बाद उसने बिल्डिंग से कूदकर अपनी जान दे दी.
इसी तरह के एक दूसरे मामले में, दिल्ली के राजेंद्र पैलेस में 16 साल के 10वीं कक्षा के छात्र ने आत्महत्या कर ली थी. 18 नवंबर को वह घर से ड्रामा क्लब जाने के लिए निकला था, लेकिन कुछ घंटे बाद राजेंद्र पैलेस मेट्रो स्टेशन पर उसने जान दे दी. कथित तौर पर एक लेटर में उसने एक टीचर पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया. उसे BLK अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.
क्या है पीछे की वजह?मेंटल हेल्थ कंसल्टेंट डॉ. अखिल अग्रवाल ने बताया कि बच्चों में जान देने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है. उन्होंने कहा,
बच्चों में धैर्य की कमी होती जा रही है. उन्हें अकेलेपन से जूझना पड़ रहा है. उनके पास ऐसे लोग नहीं है कि वे अपनी मन की बात शेयर कर सकें. माता-पिता ध्यान नहीं दे रहे हैं और बच्चे अपना ज्यादातर समय फोन पर बिता रहे हैं. हम सब एक असल दुनिया की जगह वर्चुअल दुनिया में जीना शुरू कर चुके हैं. यह इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है.
डॉ अखिल ने बताया कि इससे बचने के लिए बच्चों से बातचीत करना बहुत जरूरी है. जितनी जिम्मेदारी परिजनों की है, उतनी ही जिम्मेदारी स्कूल की भी है कि वे बच्चों को खुलना सिखाएं, जिससे वे अपनी मन की बात कह सकें.
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