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प्रशासन की कस्टडी में जब्त टैंकरों से गायब हुई 1.5 करोड़ की LPG, फूड अफसर ही निकला मास्टरमाइंड

LPG Gas Scam: कथित गैस चोरी की पूरी डील करीब 80 लाख रुपये में फाइनल की गई. आरोप है कि 31 मार्च को ट्रकों की कस्टडी सौंपे जाने के अगले ही दिन गैस करोबारी संतोष ठाकुर ने डिस्ट्रिक्ट फूड ऑफिसर अजय यादव को 50 लाख रुपये दिए. बाकी रकम अन्य दो लोगों को दी गई.

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नीरज कुमार
| मौ. जिशान
11 मई 2026 (अपडेटेड: 11 मई 2026, 03:30 PM IST)
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छत्तीसगढ़ के महासमुंद में कथित LPG चोरी में पकड़े गए आरोपी. (ITG)
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छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सरकारी अधिकारी के साथ मिलकर आरोपियों ने कथित तौर पर 92 टन LPG गैस चोरी कर डाली. बाजार में इसकी कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपये है. पुलिस ने जिला खाद्य अधिकारी, माने डिस्ट्रिक्ट फूड ऑफिसर अजय यादव को इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड बताया है. मामले में अब तक अजय यादव समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो आरोपी फरार हैं.

कहानी 23 दिसंबर 2025 से शुरू होती है. महासमुंद जिले के सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में पुलिस ने छह लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) कैप्सूल ट्रकों को पकड़ा, जिनसे गैर-कानूनी तरीके से घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर रिफिल किए जा रहे थे. कार्रवाई के बाद सभी ट्रकों को जब्त कर थाने में खड़ा कर दिया गया. ट्रकों में भारी मात्रा में LPG भरी हुई थी.

इंडिया टुडे से जुड़े अरविंद यादव की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में तापमान बढ़ने और गर्मी को देखते हुए पुलिस ने थाना परिसर में इतने बड़े पैमाने पर ज्वलनशील गैस से भरे ट्रकों को रखना खतरनाक माना. सुरक्षा कारणों से जिला प्रशासन को पत्र लिखकर ट्रकों को सेफ जगह पर शिफ्ट करने की मांग की गई. यहीं से कथित गैस चोरी की साजिश शुरू हुई.

पुलिस जांच के मुताबिक, 23 मार्च को जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर के बीच बैठक हुई, जिसमें ट्रकों में भरी LPG निकालकर बेचने की प्लानिंग बनाई गई. आरोप है कि दोनों ने अनुमान लगाया कि ट्रकों में बड़ी मात्रा में गैस मौजूद है और इसे बेचकर भारी मुनाफा कमाया जा सकता है.

कैसे पूरी साजिश को अंजाम दिया?

जांच में सामने आया कि पंकज चंद्राकर को खरीदार तलाशने और पूरी डील सेट करने की जिम्मेदारी दी गई, जबकि आरोपी मनीष चौधरी को रायपुर की गैस एजेंसियों से संपर्क साधने का काम सौंपा गया. 26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर सिंघोड़ा थाना पहुंचे और ट्रकों में मौजूद LPG का आकलन किया. उन्होंने अनुमान लगाया कि ट्रकों में करीब 105 मीट्रिक टन गैस भरी हुई है, जिसे निकालकर बेचा जा सकता है.

उसी रात आरोपियों ने रायपुर के गैस कारोबारी और ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक संतोष ठाकुर के साथ मीटिंग की और पूरी डील करीब 80 लाख रुपये में फाइनल कर ली. आरोप है कि 31 मार्च को ट्रकों की कस्टडी सौंपे जाने के अगले ही दिन संतोष ठाकुर ने अजय यादव को 50 लाख रुपये दिए. बाकी रकम में से 10 लाख रुपये मनीष चौधरी और 20 लाख रुपये पंकज चंद्राकर को दिए गए.

30 मार्च को फूड डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने आधिकारिक रूप से छह LPG ट्रकों की जिम्मेदारी सुपुर्दनामा के जरिए ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स को सौंप दी. इसके बाद ट्रकों को सिंघोड़ा थाने से रायपुर जिले के अभनपुर स्थित पेट्रोकेमिकल प्लांट ले जाया गया, जहां ट्रकों से कथित तौर पर लगभग 92 मीट्रिक टन LPG गैस निकालकर बाजार में बेच दी गई. पुलिस के अनुसार चोरी की गई गैस की कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपये है.

महासमुंद के पुलिस अधीक्षक (SP) प्रभात कुमार ने कहा,

“छह भरे हुए (ट्रक) कैप्सूल्स जब्त किए गए थे. थाने में रखे हुए थे. बाद में प्रक्रिया के तहत इन्हीं कैप्सूल्स को सुरक्षित तरीके से किसी सुरक्षित माहौल में रखने के लिए पुलिस के द्वारा प्रशासन के साथ पत्राचार किया गया था. खाद्य विभाग को उसकी जिम्मेदारी दी गई थी और खाद्य विभाग उसी जिम्मेदारी के तहत एजेंसियों को ढूंढ रहा था और उसे सुपुर्द करने की तैयारी कर रहा था. इसी संदर्भ में यह केस और यह गबन, एक बड़ा गबन का मामला सामने आया है, जिसमें इन छह कैप्सूल्स को प्लान बनाकर एक अपराधी को दिया गया. फिर वहां से लगभग 92 टन गैस की चोरी की गई उसको मार्केट में बेचा गया, जिसकी मार्केट में कीमत लगभग 1.6- 1.5 करोड़ रुपये है.”

SP प्रभात कुमार ने आगे बताया,

“कुल 80 लाख रुपये में से 50 लाख रुपये खाद्य अधिकारी अजय यादव को मिले, 20 लाख रुपये पंकज चंद्राकर (जो मुख्य क्रियान्वयन कर रहे थे) को मिले और 10 लाख रुपये (जो रायपुर के कोऑर्डिनेटर थे, रायपुर की गैस एजेंसियों से बात कर रहे थे) को मिले. इस तरह से 80 लाख रुपये का बंटवारा हुआ है.”

उन्होंने बताया कि आरपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की 316(3), 316(5), 238, 336, 338, 340(2) के अलावा एसेंशियल कमोडिटी एक्ट की 3 और 7 धारा के तहत मामला दर्ज किया गया है.

LPG की चोरी का पता कैसे चला?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चोरी का पता अप्रैल में तब चला जब ट्रकों के असली ट्रांसपोर्टर ट्रक वापस लेने के लिए सिंघोड़ा पुलिस स्टेशन पहुंचे. उन्होंने ट्रकों की जांच की और पाया कि गैस चोरी हो गई है और पुलिस में शिकायत की.

पुलिस ने कहा कि उन्होंने ट्रकों में लगे GPS डिवाइस के आधार पर चोरी की पुष्टि की, जिससे पता चला कि उन्हें आरोपी के प्लांट के अंदर ले जाया गया था. इसके अलावा, आरोपी की डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की सेल रसीदों से पता चला कि अप्रैल में केवल 47 टन LPG खरीदी गई थी और जीरो ओपनिंग स्टॉक था, जबकि 107 टन गैस बेची गई थी.

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जांच में यह भी सामने आया कि पूरे मामले को दबाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड से भी छेड़छाड़ की गई. फर्जी वजन पर्चियां तैयार की गईं और नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और निखिल वैष्णव को गिरफ्तार कर लिया है. ठाकुर पेट्रोकेमिकल के संचालक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है.

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