न बिजली मिलेगी, न इंटरनेट होगा, लद्दाख के 'खूनी लाल' आसमान के संकेत बेहद खतरनाक हैं
वैज्ञानिकों का कहना है कि लद्दाख के हानले में दिखीं ऑरोरा जैसी घटनाएं आने वाले समय में ग्लोबल इंटरनेट ब्लैकआउट की वजह बन सकती हैं.
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क्या आप सोच भी सकते हैं कि पूरी दुनिया की बिजली एक साथ गुल हो जाए? यही नहीं, ग्लोबल इंटरनेट ब्लैकआउट से पूरी दुनिया का इंटरनेट एक झटके में बंद हो जाए. जीपीएस सिस्टम हफ्तों तक काम न करे. हमारी जिंदगी से ये सब चीजें ऐसे नत्थी हो गई हैं कि इनके बिना एक पल की भी कल्पना से हम हिल जाते हैं. लेकिन, बीते दिनों लद्दाख के लाल आसमान ने इशारा किया है कि अब इसके लिए भी हमें तैयार रहना चाहिए.
वैज्ञानिकों का कहना है कि लद्दाख के हानले में दिखीं ऑरोरा जैसी घटनाएं आने वाले समय में ग्लोबल इंटरनेट ब्लैकआउट की वजह बन सकती हैं. इससे पूरी दुनिया में बिजली और इंटरनेट का सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त हो सकता है.
लद्दाख में दिखीं लाल लाइटेंये 19 और 20 जनवरी 2026 के रात की बात है. लद्दाख के हानले गांव के पास आसमान में तेज लाल रौशनी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा था. यह नॉर्डिक इलाकों के ऑरोरा लाइट्स जैसा ही था. लेकिन यहां पर हरे रंग की जगह लाल रंग का आसमान दिखाई दिया. यह इत्तेफाक ही है कि लाल रंग खतरे का रंग होता है और जैसा ‘खूनी लाल’ आसमान लद्दाख में दिखा, उसका इशारा भी कुछ-कुछ ‘खतरनाक’ ही है.

दरअसल, ये लाइट्स सूरज से निकले एक खतरनाक तूफान (Solar Storm) की वजह से पैदा हुई थीं. 18 जनवरी को सूरज पर एक X‑class solar flare फूटा था. Solar Flare सूरज में होने वाला वह विस्फोट है, जिससे भारी मात्रा में एनर्जी, रौशनी और हाई स्पीड पार्टिकल्स निकलते हैं. X-Class सबसे शक्तिशाली धमाका होता है.
18 जनवरी को जब यह X‑class solar flare फूटा तो इसके साथ ही सूरज ने एक Coronal Mass Ejection (CME) धरती की तरफ फेंका. यह सूरज की गैस और मैग्नेटिक एनर्जी का एक बहुत बड़ा बादल होता है. यह बादल बहुत ही तेज स्पीड से धरती की तरफ आया था. धरती पर आकर यह इसके मैग्नेटिक फील्ड से टकराया. इस टकराव की वजह से G4 लेवल का एक Geomagnetic Storm बन गया, जो बेहद खतरनाक तूफान होता है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि X‑class solar flare से संकेत मिलता है कि सूरज पहले से कहीं ज्यादा सक्रिय हो रहा है. ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया था.

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इस विस्फोट से उठने वाले तूफान से सबसे ज्यादा खतरा ये नहीं है कि इससे धरती पर तापमान बढ़ जाएगा या सब कुछ सोख लेने वाली गर्मी धरती पर सर्वनाश कर देगी. वैज्ञानिक जिस बात से ज्यादा चिंतित हैं, वो खतरा इलेक्ट्रोमैग्नेटिज्म से जुड़ा है. ये पृथ्वी का इलेक्ट्रोमैग्नेटिज्म ही है, जो सूरज से आने वाले खतरनाक कणों को धरती पर आने से रोकता है और उन्हें दूर फेंक देता है. यह सूरज से आने वाली सौर हवा (solar wind) और चार्ज्ड कणों से धरती की रक्षा करने वाला ‘प्राकृतिक कवच’ है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे-जैसे सूरज ज्यादा एक्टिव होगा, वैसे-वैसे कैरिंगटन इवेंट जैसे भयानक सोलर स्टॉर्म का खतरा बढ़ेगा. कैरिंगटन इवेंट एक बेहद खतरनाक सोलर तूफान होता है. अगर ऐसा तूफान आज की दुनिया में आया तो यह बिजली ग्रिड में इतना तेज करंट पैदा कर सकता है कि पावर ट्रांसफॉर्मर पिघल जाएंगे. इतना ही नहीं, सैटेलाइट के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भी फुंक जाएंगे.

अब सवाल है कि इसका असर कितना खतरनाक हो सकता है?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे सोलर तूफान अगर आते हैं तो पूरी दुनिया में इंटरनेट महीनों या सालों तक बंद हो सकता है. बिजली ग्रिड पूरी तरह फेल हो सकते हैं. पूरी दुनिया में बिजली गुल हो सकती है. सैटेलाइट खराब हो सकते हैं और हो सकता है कि GPS हफ्तों तक काम न करे. भारत जैसे देश में जहां तेजी से डिजिटल सिस्टम बढ़ रहे हैं, वहां ऐसा सोलर तूफान बैंकिंग सिस्टम ठप कर सकता है. मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद कर सकता है, जिससे संचार व्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो सकती है.
कुल मिलाकर, हानले में दिखीं ऑरोरा लाइट्स देखने में भले ही खूबसूरत थीं लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक ये आने वाले बड़े खतरे की एक चेतावनी भी हो सकती हैं.
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