डिजिटल अरेस्ट हुआ पुराना, लुटेरों ने फर्जी पत्रकार बन महिला अधिकारी के वीडियो बना डाले
तस्वीरों और वीडियो को दिखाकर उन्होंने पीड़िता से 50 लाख रुपये की डिमांड शुरू कर दी. उन्होंने धमकी दी कि अगर उनकी बात मानकर पैसे नहीं दिए गए तो वे फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे.
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फर्जी पुलिस और फर्जी पुलिस स्टेशन बनाकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने का हथकंडा भी पुराना हो चला. मार्केट में लूट का नया फॉर्मूला आ गया है. कर्नाटक के बेलगावी में एक सरकारी महिला अधिकारी को कुछ लुटेरों ने फर्जी पत्रकार बनकर ब्लैकमेल किया. उन्होंने पीड़ित अधिकारी के घर में छिपे हुए कैमरे लगा दिए. बाद में प्राइवेट फोटो और वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल किया और 50 लाख रुपये की डिमांड की.
डिजिटल ब्लैकमेलिंग के इस नए तरीके से पुलिस भी चौंक गई होगी. इंडिया टुडे से जुड़े सगाय राज की रिपोर्ट की मुताबिक, कुछ समय पहले तीन लोग महिला अधिकारी के घर पहुंचे थे. इनके नाम समीर निसार, अब्दुल रशीद मकंदर और मोहम्मद बालेकुंद्री हैं. इन्होंने खुद को 'पत्रकार' बताया. आरोप है कि मौका पाकर उन्होंने घर के अलग-अलग हिस्सों में हिडन कैमरे लगा दिए. इन्हीं कैमरों के जरिये उन्होंने अधिकारी की निजी तस्वीरें लीं और वीडियो बनाए.
कुछ समय बाद इन्हीं तस्वीरों और वीडियो को दिखाकर उन्होंने पीड़िता से 50 लाख रुपये की डिमांड शुरू कर दी. उन्होंने धमकी दी कि अगर उनकी बात मानकर पैसे नहीं दिए गए तो वे फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे.
आरोपियों की धमकी और बार-बार के फोन कॉल से परेशान होकर महिला ने पुलिस कमिश्नर के पास शिकायत दर्ज कराई. मालामारुति पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की. उसने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया. अधिकारियों ने बताया कि प्राइवेट वीडियो बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए इस तरीके ने उन्हें भी हैरान कर दिया है.

मामले की जांच करते हुए पुलिस ने 2 सैमसंग गैलेक्सी अल्ट्रा मोबाइल फोन, 1 वीवो मोबाइल फोन, एक 64GB पेनड्राइव, 6 हिडन कैमरे, 2 OTG, 2 मेमोरी कार्ड, 8-128 GB मेमोरी कार्ड और एक इनोवा क्रिस्टा कार को बरामद कर सीज कर दिया है.

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मामले में आगे की जांच जारी है. पुलिस ये जानने में लगी है कि क्या ये तीन लोग ही फर्जी पत्रकार बनकर लोगों को लूट रहे थे या इसके पीछे पूरा गिरोह है.
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