श्री श्री रविशंकर के खिलाफ जमीन अतिक्रमण मामले में हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
PIL में बेंगलुरु के दक्षिणी इलाके में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण का आरोप लगाया गया था. Sri Sri Ravishankar पर इस मामले में FIR दर्ज है.

कर्नाटक हाईकोर्ट ने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर को राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने बेंगलुरु में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के एक मामले में उनके खिलाफ दर्ज FIR की जांच को रोकने या कोई अंतरिम सुरक्षा देने से मना कर दिया है.
कोर्ट ने ये फैसला बुधवार, 8 जनवरी को जस्टिस एम नागप्रसन्ना की बेंच ने दिया. बेंच श्री श्री रविशंकर की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें रविशंकर ने उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की थी. जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने कहा,
क्या है मामला?"अभी जांच को रोकना ठीक नहीं होगा, क्योंकि इससे डिवीजन बेंच के पहले दिए आदेश का उल्लंघन होगा. डिवीजन बेंच ने साफ कहा था कि सार्वजनिक जमीन पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो. बिना रिकॉर्ड देखे अभी कोई सुरक्षा/संरक्षण देने का आदेश पास करना उचित नहीं. अगर भविष्य में याचिकाकर्ता को जांच के लिए कोई नोटिस मिलता है, तो वो उस वक्त दोबारा कोर्ट आ सकता है."
रविशंकर को जनहित याचिका (PIL) में प्रतिवादी (respondent) के रूप में नामित किया गया था. बाद में उन्हें पिछले साल दर्ज एक मामले में आरोपी बनाया गया. ये मामला कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम, 1964 की धारा 192A के तहत दर्ज किया गया था. जिसके तहत सरकारी भूमि के अवैध कब्जे के लिए जेल और जुर्माना लगाया जा सकता है. FIR बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन टास्क फोर्स पुलिस द्वारा दर्ज की गई थी, जो हाईकोर्ट में चल रही एक जनहित याचिका में जारी निर्देशों के बाद दर्ज की गई.
PIL में बेंगलुरु के दक्षिणी इलाके में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण का आरोप लगाया गया था. दावा किया गया कि बेंगलुरु साउथ तालुक के कग्गलिपुरा गांव में एक राजकलवे (झीलों को जोड़ने वाली तूफानी पानी की नाली) पर निर्माण किया गया है. जिससे प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित हो रहा है.
हाईकोर्ट ने एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को निर्देश दिया कि वो मामले से संबंधित पूरी फाइल/रिकॉर्ड सुरक्षित कर अगली सुनवाई की तारीख पर कोर्ट के सामने पेश करें. इससे पहले, डिवीजन बेंच ने PIL का निपटारा करते हुए कहा था कि आधिकारिक नक्शों में कई जगहों पर निर्माण दिखाई दे रहे हैं और काफी बड़ा हिस्सा अतिक्रमण (अनधिकृत कब्जे) के अधीन भी है.
बेंच ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वो अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करें. कोर्ट ने इस मामले पर अगली सुनवाई 12 जनवरी को रखी है.
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