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रास्ता रोका, मिलने से मना कर दिया... कैलाश विजयवर्गीय भागीरथपुरा पहुंचे तो क्या हुआ?

Indore water contamination deaths: मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बाइक पर सवार होकर अधिकारियों और समर्थकों के साथ भागीरथपुरा की तंग गलियों में पहुंचे. उनका मकसद था प्रभावित लोगों तक पहुंचना, स्थिति का जायजा लेना और राहत पहुंचाना. लेकिन वहां का माहौल बिल्कुल उलटा था.

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Kailash Vijayvargiya confronted at ground zero of Indore water contamination
31 दिसंबर को मीडिया के सवालों पर विजयवर्गीय का गुस्सा फूट पड़ा था. (फोटो- ANI/PTI)
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प्रशांत सिंह
2 जनवरी 2026 (Updated: 2 जनवरी 2026, 08:24 AM IST)
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इंदौर में गंदे पानी से जुड़ी मौतों पर, ‘फोकट के सवाल पूछते हो, क्या घं… हो गया?’ जवाब देने वाले मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय गुरुवार, 1 जनवरी को भागीरथपुरा इलाके में पहुंचे. जहां उन्हें मृतकों के परिवारों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा. पीड़ित परिवार प्रशासन के इस संकट से निपटने के तरीके से नाराज थे. जब कैलाश विजयवर्गीय ने एक मृतक के परिवार से मिलने की कोशिश की, तो उन्होंने मिलने तक से इनकार कर दिया.

साल के पहले दिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय खुद बाइक पर सवार होकर अधिकारियों और समर्थकों के साथ भागीरथपुरा की तंग गलियों में पहुंचे. उनका मकसद था प्रभावित लोगों तक पहुंचना, स्थिति का जायजा लेना और राहत पहुंचाना. लेकिन वहां का माहौल बिल्कुल उलटा था. इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े आनंद मोहन जे की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय महिलाओं ने उनका रास्ता रोक लिया. वो जोर-जोर से शिकायत करने लगीं, "कई दिनों से दूषित पानी की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन किसी ने सुनी नहीं.”

मृतकों के परिवारों ने गुस्से में मंत्री से मिलने से इनकार कर दिया. रिपोर्ट के अनुसार एक मृतक चंद्रकला यादव के परिजनों ने कहा कि परिवार पहले से ही बहुत दुखी है, एक और रिश्तेदार की तबीयत खराब है, ऐसे में मुलाकात नहीं हो सकती. विजयवर्गीय ने बाद में अस्पताल को फोन करके हालचाल जाना.

बुधवार, 31 दिसंबर को मीडिया के सवालों पर विजयवर्गीय का गुस्सा फूट पड़ा था. जब एक पत्रकार ने मौतों और मुआवजे पर सवाल किया, तो उन्होंने कहा, "फोकट के सवाल पूछते हो, क्या घं... हो गया?". इस बयान पर सोशल मीडिया पर भारी बवाल मच गया. शाम तक मंत्री को माफी मांगनी पड़ी. उन्होंने X पर पोस्ट किया,

"मेरी टीम और मैं पिछले दो दिनों से बिना सोए प्रभावित क्षेत्र में लगे हुए हैं. मेरे लोग दूषित पानी से पीड़ित हैं, कुछ की मौत भी हो गई. इस गहरे दुख में मीडिया के सवाल पर मैंने गलत बोल दिया. इसके लिए मुझे खेद है. लेकिन जब तक मेरे लोग पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ नहीं हो जाते, मैं चुप नहीं बैठूंगा."

विपक्ष ने इस मौके का फायदा उठाया. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी 1 जनवरी को भागीरथपुरा पहुंचे. उन्होंने परिवारों से मुलाकात कर शिकायतें सुनीं और कहा,

"इंदौर ने बार-बार भाजपा को वोट दिए, 9 विधायक, मेयर, पार्षद दिए. लेकिन भाजपा ने क्या किया? पानी में जहर मिलाकर मौत दी. इतना घमंड कि पत्रकार सवाल पूछे तो गाली निकाल दी. जब मैं मृतकों के परिवारों से उनके घरों पर मिलने गया, तो सभी को लगा कि सरकार उनकी मदद करेगी."

अब तक 8 लोगों की मौत

गंदा पानी पीने से हुए इस हादसे में अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. तकरीबन 150 लोगों की तबीयत खराब बताई जा रही है. लोगों के इलाज के लिए अरबिंदो हॉस्पिटल में 100 एक्स्ट्रा बेड भी लगाए गए हैं. मामला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने एक्शन लेते हुए कई अधिकारियों को सस्पेंड किया है और एक जांच कमेेटी भी बनाई गई है.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: इंदौर में दूषित पानी से मौतें, कैलाश विजयवर्गीय क्यों भड़के?

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