The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Justice Yashwant Varma Supreme Court Begins Probe Delhi High Court Judge On Leave

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच शुरू, SC ने रिपोर्ट मांगी, घर से बरामद हुआ है कैश

कॉलेजियम के कुछ सदस्यों का मानना ​​है कि Justice Yashwant Varma का ट्रांसफर करना काफी नहीं है. उनका कहना है कि इस तरह की गंभीर घटना से न्यायपालिका की छवि धूमिल होगी.

Advertisement
Justice Yashwant Varma
जस्टिस वर्मा के घर से भारी नकदी मिली थी. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)
pic
रवि सुमन
21 मार्च 2025 (Updated: 21 मार्च 2025, 04:05 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा (Justice Yashwant Varma) के घर से मिले पैसों को लेकर विवाद जारी है. लेटेस्ट अपडेट ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी है. शीर्ष अदालत ने इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से रिपोर्ट मांगी है. लीगल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब भी किसी हाईकोर्ट के न्यायाधीश के खिलाफ कदाचार के आरोप लगते हैं, तो उस न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक रिपोर्ट देनी होती है. यदि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के खिलाफ आरोप लगते हैं, तो सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश की पहल पर एक इन-हाउस समिति का गठन किया जाता है.

इस बीच ये भी खबर आई है कि जस्टिस वर्मा छुट्टी पर हैं. बार एंड बेंच ने 21 मार्च को रिपोर्ट किया है कि जस्टिस वर्मा आज अपनी कोर्ट में नहीं बैठे. उनके सहयोगियों ने कोर्ट को बताया कि वो छुट्टी पर हैं. 

राज्यसभा में पहुंचा मामला

इस मामले पर बहस तब शुरू हुई जब उनके घर में आग लगी. तब वो शहर में मौजूद नहीं थे. आग बुझाने के लिए जैसे ही बचावकर्मी घर के अंदर घुसे तो उनको भारी मात्रा में कैश दिखा. आला अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई. फिर तो आग लगने की ये खबर आग की ही तरह फैली. सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने उन्हें दूसरे हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया.

इस बीच मामले को राज्यसभा में भी उठाया गया है. कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी पर चर्चा की मांग की. राज्यसभा के चेयरमैन और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है. और वो इस मुद्दे पर एक स्ट्रकचर्ड डिस्कशन करवाएंगे.

कौन हैं Justice Yaswant Varma?

साल 1969 में जन्मे जस्टिस वर्मा ने दिल्ली के हंसराज कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई की. 1992 में उन्होंने रीवा यूनिवर्सिटी से ‘लॉ’ में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद कोर्ट में वकालत शुरू की. 8 अगस्त, 1992 को खुद को एक वकील के रूप में एनरोल किया. उनकी प्रैक्टिस में ज्यादातर सिविल पक्ष से जुड़े मामले रहें. वो संवैधानिक विषय, औद्योगिक, कॉर्पोरेट, टैक्स, पर्यावरण आदि के मामलों से जुड़े.

वो उत्तर प्रदेश राज्य के 'मुख्य स्थायी वकील' (Chief Standing Counsel) भी बनाए गए थे. इस पद पर वो अगस्त 2013 तक रहे. इसके बाद वो कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता बनाए गए. अक्टूबर 2014 में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में ही एडिशनल जज बनाया गया. और फरवरी 2016 में वो परमानेंट जज बन गए. अक्टूबर 2021 में उनका ट्रांसफर दिल्ली हाईकोर्ट में हुआ.

ये भी पढ़ें: दिल्ली हाईकोर्ट के जज के बंगले में लगी आग बुझाने पहुंची थी फायर ब्रिगेड, कमरे में मिला कैश का भंडार

इस्तीफे की मांग 

जस्टिस वर्मा के घर में भारी नकदी होने की सूचना, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना को दी गई. उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लिया. कॉलेजियम की बैठक बुलाई गई और तुरंत ही उनका ट्रांसफर कर दिया गया. उन्हें वापस उनके पैरेंट कोर्ट यानी इलाहाबाद हाईकोर्ट में भेज दिया गया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पांच जजों वाले कॉलेजियम के कुछ सदस्यों का मानना ​​है कि उनका ट्रांसफर करना काफी नहीं है. उनका कहना है कि इस तरह की गंभीर घटना से न्यायपालिका की छवि धूमिल होगी. और संस्था के प्रति लोगों का विश्वास भी कम होगा. उनका कहना है कि जस्टिस वर्मा को इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए. और अगर वो मना करते हैं तो CJI को इन-हाउस जांच करानी चाहिए.

वीडियो: अदालत में बढ़ती व्यवस्था को लेकर वकीलों पर गुस्सा हो गए जस्टिस गवई

Advertisement

Advertisement

()