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अडानी समूह पर ट्वीट किए, पत्रकार को 1 साल की जेल, कोर्ट बोला- 'जो लिखा, उसे साबित नहीं किया'

Adani Group Defamation मामले में कोर्ट के सजा सुनाने के बाद पत्रकार Ravi Nair ने अपने एक्स अकाउंट पर फैज अहमद फैज के गीत की लाइनें ‘हम देखेंगे’ लि‍खा. उनका तर्क था कि Adani Group के बारे में उनके ट्वीट्स सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित थे और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत आते हैं. क्या है ये पूरा मामला? आइए जानते हैं.

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journalist ravi nair convicted criminal defamation adani group one year imprisonment and fine for tweets online articles
अडानी समूह के मानहानि मामले में पत्रकार रवि नायर को सजा हुई है (PHOTO-AajTak, X)
11 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 11:51 AM IST)
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अडानी ग्रुप से जुड़े एक मानहानि केस में पत्रकार रवि नायर को दोषी ठहराया गया है. 10 फरवरी को गुजरात के गांधीनगर जिले के मानसा स्थित मजिस्ट्रेट कोर्ट ने नायर को एक साल की साधारण कैद और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. वहीं, कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पत्रकार रव‍ि नायर के एक्स अकाउंट से फैज अहमद फैज के गीत की लाइनें ‘हम देखेंगे’ लि‍खा है. 

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला सितंबर 2021 में अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEML) की ओर से दायर आपराधिक शिकायत से जुड़ा है. कंपनी का आरोप था कि अक्टूबर 2020 से जुलाई 2021 के बीच नायर ने अपने X अकाउंट और ‘adaniwatch.org’ वेबसाइट पर कई ट्वीट और खबरें पोस्ट कीं. इनमें अडानी समूह पर भ्रष्टाचार, क्रोनी कैपिटलिज्म, पर्यावरण कानूनों में हेरफेर, सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग और कारोबार करने के अनैतिक तरीकों के आरोप लगाए गए थे.

adani vijay nair
पत्रकार रवि नायर ने कोर्ट का फैसला आने के बाद एक्स पर पोस्ट किया  (PHOTO- Screengrab from X)

कंपनी का कहना था कि ये आरोप झूठे और अप्रमाणित हैं और इन्हें इस तरह पेश किया गया, जिससे निवेशकों, नियामकों और आम लोगों के बीच उसकी साख को नुकसान पहुंचे. कंपनी का तर्क था कि अडानी समूह सख्त नियमों वाले क्षेत्रों में काम करता है और ऐसे आरोप उसकी विश्वसनीयता और साख पर सीधे असर डालते हैं. वहीं, रवि नायर ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनके पोस्ट जनहित से जुड़े मुद्दों पर आधारित पत्रकारिता और टिप्पणी थे. उनका तर्क था कि ट्वीट्स सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित थे और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत आते हैं. उन्होंने इसे मानहानि के बजाए निष्पक्ष आलोचना बताया.  

हालांकि कोर्ट ने नायर की दलीलों को खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि ट्वीट्स और खबरें सिर्फ राय या नीति की आलोचना नहीं थीं, बल्कि अडानी समूह के खिलाफ सीधे और गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिनकी पर्याप्त पुष्टि नहीं की गई. कोर्ट के मुताबिक, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब ये नहीं है कि बिना ठोस सबूत के किसी पर आरोप लगाए जाएं. अदालत ने ये भी कहा कि नायर यह साबित नहीं कर पाए कि उनके बयान सच थे, सद्भावना में दिए गए थे या कानून के तहत सुरक्षित थे.

दोष साबित होने के बाद कोर्ट ने उन्हें एक साल की साधारण कैद और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. साथ ही प्रोबेशन देने से इनकार करते हुए कहा कि एक पत्रकार होने के नाते उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गंभीर आरोपों के असर और जिम्मेदारी की बेहतर समझ होनी चाहिए थी.

कौन हैं रव‍ि नायर?

रव‍ि नायर की सोशल मीड‍िया प्रोफाइल के मुताब‍िक वो इंडीपेंडेंट जर्नलि‍स्ट हैं. भारत और व‍िदेश के कई मीड‍िया संस्थानों के ल‍िए ल‍िखते हैं. साथ ही वो Organized Crime and Corruption Reporting Project (OCCRP) के साथ भी जुड़े हैं. ये पत्रकारों का एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है, जो संगठित अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़ी खबरों की जांच-पड़ताल करता है.

वीडियो: अमेरिका से आए समन को अडानी तक क्यों नहीं पहुंचा रही भारत सरकार?

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