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'शादी से पहले लिव-इन-रिलेशनशिप की बात छिपाना धोखा', हाई कोर्ट ने एलिमनी बढ़ाकर 50 लाख की

Jharkhand High Court Vedict: कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा कि पति ने दूसरी महिला के साथ अपने लिव-इन-रिलेशनशिप की बात पत्नी को नहीं बताई थी. हाई कोर्ट ने इसे हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 12(1)(C) के तहत धोखाधड़ी माना.

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28 जनवरी 2026 (पब्लिश्ड: 09:10 AM IST)
jharkhand high court said hiding pre marriage live in relationship is fraud increased alimony to 50 lakh
झारखंड हाई कोर्ट ने मामले में पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाया. (Photo: ITG/File)
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झारखंड हाई कोर्ट ने शादी से पहले लिव इन में रहने और उसके बारे में पत्नी को न बताने को धोखाधड़ी माना. इसके बाद कोर्ट ने एक दंपत्ति की शादी को रद्द करने का फैसला सुनाया. साथ ही कोर्ट ने पत्नी को दिए जाने वाला गुजारा भत्ता 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया.

पूरा मामला झारखंड के एक दंपत्ति के मुकदमों से जुड़ा है. लॉ ट्रेंड की रिपोर्ट के अनुसार उनकी शादी 2 दिसंबर 2015 को हुई थी. हालांकि शादी के कुछ समय बाद ही दोनों में अनबन हो गई. पत्नी ने आरोप लगाया कि उसका पति शादी से पहले किसी दूसरी महिला के साथ लिव इन रिलेशनशिप में था, लेकिन यह बात उसने छिपाई. साथ ही पत्नी का आरोप था कि पति औऱ ससुराल वालों ने उससे 15 लाख रुपये के अतिरिक्त दहेज की मांग की. उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया.

पत्नी ने दायर किया मुकदमा

पत्ती ने दावा किया कि 2 मार्च 2016 को उसे ससुराल से निकाल दिया गया था. इसके बाद पत्नी ने फैमिली कोर्ट में मुकदमा दायर करते हुए मांग की कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत धोखाधड़ी के आधार पर उसकी शादी रद्द की जाए. साथ ही पत्नी ने स्थायी गुजारा भत्ता की भी मांग की. हालांकि फैमिली कोर्ट की सुनवाई में पति शामिल ही नहीं हुआ. इसके बाद कोर्ट ने एकतरफा सुनवाई में पत्नी की याचिका स्वीकार करते हुए शादी रद्द कर दी. साथ ही पति को 30 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया.

हालांकि पत्नी इस भत्ते से संतुष्ट नहीं हुई. इसके बाद उसने हाई कोर्ट का रुख किया. पत्नी की दलील थी कि फैमिली कोर्ट ने स्थायी गुजारा भत्ता तय करते समय किसी खास फॉर्मूले का पालन नहीं किया. यह भी कहना था कि पति की आय और हैसियत पर ठीक से विचार नहीं किया गया. पत्नी के मुताबिक पति एक ऊंचे पद पर था, उसे अच्छी सैलरी मिलती थी और उसके पास कीमती संपत्ति भी थी. पत्नी ने पति से 1 करोड़ रुपये का गुजारा भत्ता देने की मांग की.

पति ने खारिज किए आरोप

इस बार सुनवाई में पति भी शामिल हुआ. उसके वकील ने दलील दी कि फैमिली कोर्ट ने एकतरफा फैसला दिया था. पति का कहना था कि उसे कोर्ट की तरफ से ठीक से समन और नोटिस नहीं दिए गए, इसलिए वह सुनवाई में शामिल नहीं हुआ. पति ने पत्नी के धोखा देने और प्रताड़ित करने के आरोपों को भी खारिज कर दिया और कहा कि पत्नी ने उसके खिलाफ जो झूठीं शिकायतें की हैं, वह क्रूरता के बराबर है. पति का कहना था कि पत्नी के कारण शादी टूटी है.  

इसके बाद हाई कोर्ट में सुनवाई चली. इस दौरान कोर्ट ने पति की फैमिली कोर्ट पर एकतरफा फैसला देने की दलील को गलत माना. कोर्ट का कहना था कि पति के खिलाफ पर्याप्त समन और नोटिस जारी किए गए थे. वह पेश नहीं हुआ और न ही कोई लिखित बयान दिया. इससे फैमिली कोर्ट के पास एकतरफा फैसला सुनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था.

'लिव-इन-रिलेशनशिप की बात छिपाना धोखा'

वहीं कोर्ट ने पति के पिछले रिश्ते को छिपाने के आरोपों पर सबूतों की जांच की. इसके बाद कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा कि पति ने दूसरी महिला के साथ अपने लिव-इन-रिलेशनशिप की बात पत्नी को नहीं बताई थी. हाई कोर्ट ने इसे हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 12(1)(C) के तहत धोखाधड़ी माना. इसके अलावा कोर्ट ने दोनों की शादी को 'बेजान' माना. यह देखते हुए कि दोनों 2016 से अलग रह रहे थे.

यह भी पढ़ें- "लिव-इन में पुरुषों को गलत सजा मिल जाती है", इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रद्द की रेप की सजा

हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट द्वारा गुजारा भत्ता की तय की गई रकम भी बढ़ाने का फैसला दिया. कोर्ट ने कहा कि पति एक अच्छे पद पर कार्यरत है, जहं उसे सैलरी भी अच्छी मिलती है. उसकी फाइनेंसियल डिटेल और पिछली कमाई से साबित होता है कि वह ज्यादा रकम देने की स्थिति में है. इसलिए पत्नी को भी उसी स्तर का गुजारा भत्ता दिया जाना चाहिए. कोर्ट ने पाया कि हालांकि पत्नी के पास एलएलबी की डिग्री जरूर है, लेकिन वह फिलहाल बेरोजगार है और अपने पिता पर निर्भर है. इसके बाद कोर्ट ने पति को फरवरी 2026 और जून 2026 के बीच पांच बराबर मासिक किस्तों में 50 लाख रुपये की रकम देने का निर्देश दिया.

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