ईरान ने स्टारलिंक का जैम किया, हाईटेक जैमिंग में चीन-रूस, किसने दिया साथ?
Iran Protest: ब्लैकआउट के दौरान प्रदर्शनकारी स्टारलिंक की मदद से तस्वीरें और वीडियो बाहर भेज पा रहे थे. लेकिन ईरान सरकार ने इसे भी निशाना बनाया.

ईरान में खामनेई सरकार विरोधी प्रदर्शन अब तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुके हैं. 18वें दिन तक देशभर में कम से कम 280 स्थानों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं. प्रदर्शनकारी आर्थिक संकट, महंगाई और शासन की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं. प्रदर्शनों के बीच ईरान सरकार ने 8 जनवरी को पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर दिया गया. जिसका असर 8 करोड़ ईरानी नागरिकों पर पड़ा है. ये ब्लैकआउट पिछले साल ईरान-इजरायल युद्ध के दौरान 12 दिनों के शटडाउन से भी ज्यादा गंभीर है. 2022 के महसा अमिनी विरोध प्रदर्शनों के बाद से ईरान में स्टारलिंक की पहुंच बढ़ी थी. अनुमान है कि 40 हजार से 50 हजार लोग स्टारलिंक का इस्तेमाल कर रहे थे.
स्टारलिंक, एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है. जो प्रदर्शनकारियों के लिए आखिरी उम्मीद बन गई थी. ये लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स के जरिए काम करती है, जो स्थानीय टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर नहीं होती. ब्लैकआउट के दौरान प्रदर्शनकारी इससे तस्वीरें और वीडियो बाहर भेज पा रहे थे. लेकिन ईरान सरकार ने इसे भी निशाना बनाया.
शासन ने मिलिट्री-ग्रेड "किल स्विच" सक्रिय किया, जिससे स्टारलिंक सैटेलाइट्स को जाम कर दिया गया. ईरान वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरू में 30% अपलिंक-डाउनलिंक ट्रैफिक प्रभावित हुआ, जो कुछ घंटों में 80% से ज्यादा हो गया. GPS सिग्नल जाम करके रिसीवर को सैटेलाइट से कनेक्ट होने से रोका जा रहा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये हाई-पावर माइक्रोवेव जैमिंग है, जो मोबाइल कम्युनिकेशन को भी प्रभावित कर रही है और नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकती है.
चीन-रूस, किसका हाथ?ये जैमिंग टेकनीक इतनी हाईटेक है कि एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके पीछे रूस या चीन का हाथ हो सकता है. या इसे घरेलू रूप से विकसित किया गया हो. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट आमिर रशीदी ने टेकराडार को बताया,
"मैं पिछले 20 सालों से इंटरनेट के एक्सेस की निगरानी और रिसर्च कर रहा हूं, और मैंने अपने जीवन में ऐसा कुछ कभी नहीं देखा."
रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने यूक्रेन युद्ध में स्टारलिंक को जाम करने की तकनीक इस्तेमाल की थी. जबकि चीन ने ताइवान जैसे क्षेत्रों में सैटेलाइट जैमिंग के सिमुलेशन किए हैं. ईरान में स्टारलिंक पर पहले से प्रतिबंध है. अनधिकृत इस्तेमाल पर 6 महीने से 2 साल की जेल और जासूसी से जुड़े मामलों में मौत की सजा का प्रावधान है.
ईरान की अर्थव्यवस्था को नुकसानइस ब्लैकआउट से ईरान की अर्थव्यवस्था को प्रति घंटा 1.56 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है. देश में चल रहे प्रदर्शन में अब तक 530 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और हजारों गिरफ्तार हुए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा हुई तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा. ट्रंप ने एलन मस्क से बात करने की बात भी कही, और इंटरनेट बहाल करने पर विचार करने का आश्वासन दिया.
ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट और स्टारलिंक जैमिंग शासन की दमनकारी रणनीति का हिस्सा है. ये विरोध को कुचलने के लिए डिजिटल स्पेस को नियंत्रित करने की कोशिश है. लेकिन प्रदर्शन जारी हैं और देश पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है.
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