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पाकिस्तान ट्रेन हाईजैक: जब बलूच विद्रोही ट्रेन में घुसे, जिंदा बचे लोगों ने बताई आगे की कहानी

यात्रियों ने बताया कि जब विद्रोहियों ने ट्रेन पर हमला किया और गैर-बलूच नागरिकों को अलग करने के लिए पहचान पत्रों की जांच शुरू की, तो वहां चीख-पुकार मच गई. फायरिंग हुई, और फिर ब्लास्ट भी हुआ.

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ट्रेन के कोच नंबर तीन में मौजूद मुश्ताक मोहम्मद ने बताया कि फायरिंग एक बहुत बड़े विस्फोट के बाद हुई. जिसके बाद ट्रेन रुक गई. उन्होंने बताया कि फायरिंग एक घंटे तक जारी रही. (फोटो- इंडिया टुडे)
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प्रशांत सिंह
12 मार्च 2025 (Published: 05:18 PM IST)
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बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) विद्रोहियों ने 11 मार्च को पाकिस्तान के पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया. ट्रेन में करीब 500 लोग सवार थे. इनमें से 214 को BLA ने बंधक बना लिया. विद्रोहियों ने 30 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को मार दिया. वहीं आर्मी से मुठभेड़ में 27 विद्रोहियों की मौत भी हुई है. खबर लिखे जाने तक 155 बंधकों को रेस्क्यू कर लिया गया था. अब यात्रियों के बयान सामने आ रहे हैं. इनमें उन्होंने ट्रेन के अंदर हुई भयावहता बयान की है.

'पीछे मुड़कर न देखने को कहा गया'

यात्रियों ने बताया कि जब विद्रोहियों ने ट्रेन पर हमला किया और गैर-बलूच नागरिकों को अलग करने के लिए पहचान पत्रों की जांच शुरू की, तो वहां चीख-पुकार मच गई. फायरिंग हुई, और फिर ब्लास्ट भी हुआ. इंडिया टुडे से जुड़े अरविंद ओझा और शिवानी शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेन में सवार बशीर अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ यात्रा कर रहे थे. विद्रोहियों ने उन्हें ट्रेन से उतरने और पीछे मुड़कर न देखने के लिए कहा. उन्होंने बताया,

"वहां बहुत चीख-पुकार मची हुई थी. लोग ट्रेन में लेट गए थे और मैंने भी वही किया. बाहर फायरिंग हो रही थी और एक विस्फोट भी हुआ."

बशीर ने बताया कि उन्होंने बिना किसी विरोध के विद्रोहियों के आदेशों का पालन किया. उन्होंने कहा,

“उन्होंने मुझे नीचे उतरने को कहा, तो मैं उतर गया. मैंने आदेशों का पालन किया, क्योंकि अगर वो अंदर आ जाते और हमें पीटना शुरू कर देते तो क्या होता? तब हम क्या करते? उन्होंने मुझे, मेरे परिवार और मेरे बच्चों को जाने दिया. उन्होंने हमसे पीछे मुड़कर न देखने को कहा, इसलिए हमने पीछे मुड़कर नहीं देखा.”

ट्रेन से रेस्क्यू किए गए एक और यात्री गुलाम नबी ने बताया कि सभी लोग अपनी सीटों के नीचे छिप गए थे और फर्श पर लेट गए थे. उन्होंने कहा,

"हम समझ नहीं पा रहे थे कि क्या हो रहा है. बहुत ज्यादा फायरिंग हो रही थी."

एक अन्य यात्री ने बताया कि जब हमला हुआ, तब वो सो रहे थे. उन्होंने अपने बच्चों को विद्रोहियों के आदेशों का पालन करने को कहा. इस यात्री ने बताया,

"मैंने अपने बच्चों से कहा कि, चाहे हम कहीं भी हों, ट्रेन के अंदर या बाहर, हमें मार दिया जाएगा. इसलिए उनकी बात सुनना बेहतर है."

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेन के कोच नंबर तीन में मौजूद मुश्ताक मोहम्मद ने बताया कि फायरिंग एक बहुत बड़े विस्फोट के बाद हुई. उसके बाद ट्रेन रुक गई. उन्होंने बताया कि फायरिंग एक घंटे तक जारी रही. उस दौरान घटनास्थल पर मौजूद कोई भी व्यक्ति बचकर भाग नहीं सकता था.

बोगी नंबर सात में सवार इशाक नूर अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ क्वेटा से रावलपिंडी जा रहे थे. उन्होंने बताया,

"विस्फोट इतना जोरदार था कि ट्रेन की खिड़कियां और दरवाजे हिल गए और मेरा बच्चा (जो) मेरी बगल में बैठा था, गिर गया."

मुश्ताक मोहम्मद ने बताया कि कुछ समय बाद विद्रोहियों ने फायरिंग बंद कर दी और फिर वो बोगियों में घुस गए. कुछ यात्रियों ने बताया कि हथियारबंद लोग ट्रेन में घुस आए और पहचान पत्र देखने लगे, जिसके बाद उन्होंने बलूचिस्तान से आए लोगों को अलग कर दिया. वो कुछ लोगों को एक तरफ भी ले गए.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: पाकिस्तान में BLA ने ट्रेन हाईजैक की, कई सैनिकों को मार डाला

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