The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • New Railway Travel Rules: Fine Up To ₹2500 for Unauthorized Entry in Ladies Coach and Jail for Carrying Inflammable Items

ट्रेन की महिला कोच में घुसे तो सीधा जेल होगी, जुर्माना भी दस गुना! पटाखे ले जाना भी भारी पड़ेगा

New Railway Travel Rules: भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने 1 जुलाई 2026 से सुरक्षा नियमों को सख्त कर दिया है. नए नियमों के तहत महिला कोच में अनधिकृत प्रवेश और खतरनाक सामान ले जाने पर अब भारी जुर्माना और जेल या फिर दोनों सजा एक साथ हो सकती है.

Advertisement
pic
1 जुलाई 2026 (पब्लिश्ड: 02:59 PM IST)
New Railway Travel Rules
महिला कोच में घुसे तो सीधे जेल (फोटो- PTI)
Quick AI Highlights
Click here to view more

भारतीय रेल (Indian Railways) ने 1 जुलाई 2026 से अपनी सुरक्षा नीति और पेनाल्टी स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव लागू कर दिए हैं. अब अगर आप ट्रेन के अंदर नियमों को लेकर लापरवाह हैं, तो आपकी जेब पर भारी चोट पड़ सकती है और मामला पुलिस तक भी पहुंच सकता है. रेलवे ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

महिला कोच की सुरक्षा और कड़ा रुख

जानते हैं कि भारतीय रेल के नए नियमों में क्या कुछ बदल गया है. अब तक महिला कोच में पुरुषों का अनाधिकृत प्रवेश एक आम समस्या रही है. लेकिन ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक अब रेलवे ने इसे सीधे 'अपराध' की श्रेणी में रखते हुए जुर्माना राशि बढ़ाकर 2,500 रुपये तक कर दी है. कई बार यात्री जल्दी में या भीड़ का हवाला देकर महिला कोच में घुस जाते हैं, पर अब आरपीएफ (RPF) को सख्त निर्देश दिए गए हैं.

रियलिटी टेस्ट: क्या जमीनी हकीकत बदलेगी?

कागज पर नियम तो सख्त हो जाते हैं, मगर क्या जमीन पर उसका असर देखने को मिलता है. रेलवे के नए और सख्तों नियमों की सच्चाई जानने के लिए लल्लनटॉप ने कुछ ऐसी महिला यात्रियों से बात की जो नियमित तौरपर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और आनंद विहार स्टेशन से सफर करती हैं. इस दौरान ज्यादातर  महिलाओं का कहना था कि सिर्फ जुर्माने की राशि बढ़ाने से काम नहीं चलेगा. 

पारुल नाम की एक महिला यात्री ने लल्लनटॉप को बताया, 

जुर्माना तो कागज पर बढ़ गया है, लेकिन जब तक आरपीएफ की तैनाती हर कोच के गेट पर नहीं होगी, तब तक पुरुष अपनी आदत नहीं छोड़ेंगे.

ये बयान अपने आप में सारी हकीकत बयां कर देता है. और देखा जाए तो असल चुनौती भी यही है कि क्या आरपीएफ के पास इतनी मैनपावर है कि वो हर ट्रेन की निगरानी कर सके. कहीं ऐसा तो नहीं कि जुर्माने के डर से भ्रष्टाचार और अवैध लेनदेन बढ़ जाए?

त्यौहारों की भीड़ और नियम की मार

सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा होता है जब फेस्टिवल सीजन आता है. त्यौहारों के समय ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं होती. ऐसे में जनरल टिकट वाले यात्रियों की भीड़ का क्या होगा? क्या वो मजबूरी में महिला या स्लीपर कोच में नहीं घुसेंगे? रेलवे के रिटायर्ड स्टेशन मास्टर अशोक कुमार सिंह कहते हैं कि जब प्लेटफॉर्म और ट्रेनों में पैर रखने की भी जगह ना हो तो भला जुर्माना कैसे वसूला जा सकेगा. लल्लनटॉप से बात करते हुए अशोक कुमार सिंह कहते हैं,

नियम सबके लिए बराबर हैं, लेकिन भीड़ के दबाव में अक्सर कानून का पालन करवाना टीटीई, स्टेशन मास्टर और यहां तक की आरपीएफ के लिए भी किसी सिरदर्द से कम नहीं है.

कुल मिलाकर बात फिर एक बार रेलवे के मेनपावर बनाम रेल यात्रियों की बढ़ती तादाद के बीच आकर फंस जाती है.

खतरनाक सामान: कागजों पर चेकिंग, हकीकत में लूपहोल

रेलवे स्टेशनों पर लगे स्कैनर और चेकिंग मैकेनिज्म की स्थिति किसी से छिपी नहीं है. अक्सर देखा जाता है कि स्टेशनों पर लगे स्कैनर या तो खराब रहते हैं या फिर उन पर ध्यान ही नहीं दिया जाता. पटाखे, गैस सिलेंडर या स्टोव जैसी चीजें ट्रेनों में ले जाना जानलेवा हो सकता है, लेकिन चेकिंग के नाम पर अभी भी बहुत ढिलाई बरती जाती है. नए नियमों में जेल का प्रावधान है, लेकिन जब तक एंट्री पॉइंट पर चेकिंग सख्त नहीं होगी, तब तक ये नियम सिर्फ कागजी रहेंगे. 

ये भी पढ़ें: रेलवे वेटिंग से लेकर स्पीड पोस्ट की लेटलतीफी तक, आखिर क्यों फंसता है आम आदमी?
 

वीडियो: रेलवे ने बदला टिकट कैंसिल का नियम, अश्विनी वैष्णव ने क्या बताया?

Advertisement

Advertisement

()