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पाकिस्तान जाने वाला पानी होगा बंद, रावी नदी पर बैराज बनने वाला है

रावी नदी पर बनाए जा रहे शाहपुर कंडी बैराज का काम 31 मार्च तक पूरा होने की संभावना है.

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18 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 18 फ़रवरी 2026, 09:05 AM IST)
india shahpur kandi barrage work to complete soon will stop ravi river water to pakistan
जम्मू-कश्मीर सरकार में मंत्री जावेद अहमद राणा ने बैराज के बारे में जानकारी दी है. (सांकेतिक तस्वीर: ITG)
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रावी नदी का अतिरिक्त पानी जो अब तक पाकिस्तान जाता था, भारत में ही स्टोर करने का इंतजाम लगभग पूरा हो गया है. इसके लिए बनाया जा रहा बैराज लगभग बनकर तैयार है. बैराज बन जाने के बाद पहले से ही पानी की समस्या से जूझ रहे पाकिस्तान में संकट और गहरा सकता है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक रावी नदी पर बनाए जा रहे शाहपुर कंडी बैराज का काम 31 मार्च तक पूरा होने की संभावना है. इससे रावी नदी से निकलने वाले ज्यादा बहाव को रोकने में मदद मिलेगी. अतिरिक्त पानी को स्टोर करने की सुविधा भारत में ही हो जाएगी, जिससे यह पानी पाकिस्तान नहीं जा सकेगा.

सिंचाई के लिए होगा इस्तेमाल

जम्मू-कश्मीर सरकार में मंत्री जावेद अहमद राणा ने इसकी जानकारी दी है. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया कि इस बैराज का उद्देश्य सूखे से जूझ रहे कठुआ और सांबा जिलों में सिंचाई की सुविधा देना है. उन्होंने कहा कि बैराज बन जाने के बाद पाकिस्तान को ज्यादा पानी देना बंद कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसे रोकना ही होगा. रिपोर्ट के मुताबिक जब मंत्री से पूछा गया कि इसका पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा, तो उन्होंने कहा,

आप पाकिस्तान की चिंता क्यों करते हैं? वे तो बस मामूली लोग हैं. उन्हें अपनी ही बनाई समस्याओं में उलझने दो.

जावेद अहमद राणा ने बताया कि अभी रावी नदी का ज्यादा पानी माधोपुर से बिना इस्तेमाल के पाकिस्तान चला जाता है. शाहपुर कंडी बैराज, जो पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच राजनीतिक अनदेखी और झगड़े की वजह से रुका हुआ था, जल्द पूरा होने की संभावना. इससे पहले पिछले हफ्ते केंद्रीय जल संसाधन मंत्री CR पाटिल ने भी कहा था कि सिंधु नदी का पानी, जो अभी पाकिस्तान की ओर बह रहा है, उसे रोक दिया जाएगा और भारत के हित में इस्तेमाल किया जाएगा.

पाकिस्तान की हालत और खस्ता होगी

प्रोजेक्ट के पूरा होने और पानी का बहाव रुकने के बाद पाकिस्तान के हालात और मुश्किलों भरे हो सकते हैं. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक कृषि पर निर्भर है और उसकी 80% खेती सिंधु नदी सिस्टम पर ही निर्भर है. पानी के बहाव में रुकावटों से उसकी फसल की पैदावार और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ेगा. खास बात यह है कि पाकिस्तान इस प्रोजेक्ट के खिलाफ न तो कुछ कर सकता है और न ही इसकी शिकायत कर सकता है. क्योंकि भारत पूरी तरह अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए यह बैराज बना रहा है.

वैसे तो भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद ही सिंधू नदी जल समझौते को निलंबित कर दिया था, लेकिन इस प्रोजेक्ट पर उससे भी दशकों पहले से काम चल रहा है और समझौते के तहत ही बैराज बनाया जा रहा है. हालांकि जल समझौता सस्पेंड होने के बाद इस प्रोजेक्ट को फास्ट-ट्रैक जरूर किया गया. 

सिंधू नदी जल समझौते के अनुसार भारत के पास सतलुज, ब्यास और रावी जैसी पूर्वी नदियों के पानी के बिना रोक-टोक इस्तेमाल की इजाज़त थी. वहीं, पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों पर अधिकार दिए गए थे.

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भारत से पाकिस्तान की ओर बहने वाली नदियां. (Photo: ITG)
हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर काम तेज

हालांकि, पूर्वी नदियों से भी पाकिस्तान में अतिरिक्त पानी जाता रहा है, क्योंकि भारत के पास इन्हें स्टोर करने की बेहतर क्षमता नहीं थी. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. भारत तेजी से तई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, जिससे इन नदियों के पानी का इस्तेमाल वह बेहतर ढंग से कर सके. बताते चलें कि शाहपुर कंडी बैराज प्रोजेक्ट की योजना 1979 में ही बना ली गई थी. इंडिया टुडे के मुताबिक तब पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच रंजीत सागर डैम और नीचे की तरफ शाहपुर कंडी बैराज बनाने के लिए एक एग्रीमेंट साइन हुआ था, जिससे पाकिस्तान जाने वाला पानी रोका जा सके.

इसके बाद प्रोजेक्ट की नींव 1982 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी. 1988 की इसकी डेडलाइन तय की गई थी. रंजीत सागर डैम का काम 2001 में पूरा भी हो गया. लेकिन शाहपुर कंडी बैराज पर काम रुका रहा. इस तरह, रावी नदी का पानी पाकिस्तान में बहता रहा. 2008 में शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट को नेशनल प्रोजेक्ट घोषित किया गया. 2013 में कंस्ट्रक्शन का काम शुरू हुआ. लेकिन एक साल बाद, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच विवाद के कारण प्रोजेक्ट फिर से रुक गया.

31 मार्च तक होगा पूरा

दिसंबर 2018 में इसमें कामयाबी मिली, जब नरेंद्र मोदी सरकार ने दखल दिया और दोनों राज्यों के बीच एक एग्रीमेंट करवाया और 485 करोड़ रुपये की फाइनेंशियल ग्रांट का ऐलान किया. काम जोरों पर शुरू हो गया है और 31 मार्च, 2026 तक पूरा होने वाला है. अप्रैल से, यह प्रोजेक्ट 32,000 हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन की सिंचाई में मदद करेगा. बैराज के पूरी तरह चालू होने के बाद पंजाब में 5,000 हेक्टेयर से ज़्यादा खेती की जमीन को फायदा होने की उम्मीद है.

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इसके अलावा भारत ने जम्मू और कश्मीर में चिनाब नदी पर कई हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट्स पर काम तेज कर दिया है. इसके 2027-28 तक पूरा होने की उम्मीद है. इससे पानी का फ्लो और कम हो जाएगा. साथ ही भारत झेलम नदी से पानी के स्टोरेज को रेगुलेट करने के लिए रुके हुए वुलर बैराज पर भी काम फिर से शुरू करने वाला है. 2012 में पाकिस्तान के सपोर्ट वाले आतंकवादियों के प्रोजेक्ट को निशाना बनाने के बाद वुलर बैराज पर काम रोक दिया गया था.

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